नई दिल्ली : उत्तराखंड में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. राहुल गांधी का पुराने नेताओं से नहीं मिलना भारी पड़ सकता है. ऐसे में कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई से भाजपा की उम्मीदों को पंख लगे हैं. हरीश रावत पर एक्शन हुआ तो थर्ड फ्रंट के रूप वह अपनी ताल ठोक सकते हैं.
भाजपा ने राज्यसभा की खाली हुई एक मात्र सीट पर बड़ा दांव लगाया है. कुमायूं मंडल के नैनीताल से आने वाले दलित फेस दिनेश आर्य को टिकट देकर चौकाया है. दिनेश आर्य के जरिए भाजपा ने कुमायूं मंडल को भाजपा ने मजबूत किया है. हालांकि सीएम पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा भी कुमायूं मंडल से इसके जरिए भाजपा ने कांग्रेस के खड़गे के मंच शुद्धिकरण के मुद्दे की हवा निकाली है.
साथ ही आर्य को टिकट देकर कांग्रेस की दलित राजनीति में सेंध लगाने की कवायद है. हालांकि उत्तराखंड की 70 में से 40 सीटों वाला गढ़वाल आज भी उपेक्षित है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जरूर गढ़वाल से, लेकिन बहुत प्रभावशाली नहीं हैं. ढ़वाल से बड़े चेहरे के रूप में एक मात्र सांसद अनिल बलूनी के पास संगठन में अहम पद है. ग्रेस आलाकमान नवंबर में कोई फैसला नहीं करेगा तो भगदड़ मचना तय है. से में राहुल गांधी के न मिलने वाली रणनीति से असम वाली सी स्थिति दिख रही है.