जयपुर: राजस्थान विधानसभा में बजट बहस के दौरान आज कांग्रेस की तरफ से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा व पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने सरकार पर हमले बोले. दोनों ही नेताओं ने बजट की खामियां गिनाते हुए सरकार को घेरने का प्रयास किया. हालांकि इस दौरान काफी हंगामा भी हुआ.
सरकार में रहते हुए मोर्चा संभालने वाले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा व शांति धारीवाल ने आज विपक्ष की भूमिका निभाते हुए बजट बहस में हिस्सा लिया. जब ये दोनों नेता सदन में बोले, तो सदन भी भरा हुआ सा था. अपने अलग अंदाज के लिए मशहूर गोविंद सिंह डोटासरा ने जहां 'पर्ची सरकार' शब्द का बार बार उपयोग करके हमला किया, तो वहीं धारीवाल की धार भी कम नहीं थी. धारीवाल ने आरएसएस को लेकर गंभीर आरोप लगाए. डोटासरा का आज भी अलग अंदाज दिखा. उन्होंने सरकार को यह सरकार डबल इंजन की नहीं बल्कि चार इंजन की है. चारों इंजन एक-दूसरे को खींचने और फेल करने में लगे हैं. डोटासरा ने आरोप लगाया कि बजट में ना तो गरीब, दलित व पिछड़ो की बात की है और ना ही कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य व सुशासन का जिक्र है.
बजट पर बहस के दौरान गोविंद सिंह डोटासरा व शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई. इस दौरान दिलावर ने यहां तक कह दिया कि डोटासरा जी आप जेल की तैयारी कर लो, हालांकि बाद में स्पीकर ने इसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया. दिलावर के बयान पर पूरे विपक्ष ने वेल में आकर विरोध किया. लेकिन डोटासरा भी कहां रुकने वाले थे, उन्होंने कवि के अंदाज में 'पर्ची सरकार' के नाम से पूरी कविता पढ़ दी और भाजपा सरकार को सर्कस की संज्ञा दे डाली.
डोटासरा के बाद बारी थी पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की. धारीवाल ने वित्त मंत्री दिया कुमारी के बजट भाषण को आधार बनाकर ही अपनी बात रखी. बजट में दिया कुमारी ने 10 संकल्प बताए थे, जिसमें से आखिरी था - परफॉर्म, रिफॉर्म व ट्रांसफोर्म शब्दों का उपयोग किया था. धारीवाल ने इन शब्दों के आधार पर ही अपने हमले किए और लोकसभा चुनाव परिणाम, ब्यूरोक्रेसी व लेखानुदान बजट सरकार को घेरा.
अपने अंदाज के मुताबित धारीवाल आज भी आर एस एस को घेरने से नहीं चूके. धारीवाल ने कहा कि आर एस एस के लोग मनुस्मृति को पाठ्यक्रम में लागू करना चाहते थे, जबकि मनु स्मृति में महिलाओं के बारे में गलत चित्रण किया गया है और खुद बाबा साहब ने मनु स्मृति को आग लगाई थी. धारीवाल के इस बयान पर एक बार सदन में हंगामे जैसी स्थिति भी हुई.
समय की पाबंदी के चलते डोटासरा व धारीवाल कुछ विशेष बिंदुओं तक सीमित रहे, लेकिन सदन में उन्होंने अपनी उपस्थिति मजबूत तरीके से दिखा दी. दोनों के भाषण के समय संसदीय कार्यमंत्री बार-बार इनको टोकने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन फिर भी दोनों सरकार पर हमला करने से नहीं चूके. हालांकि इस दौरान कई बार सदन ऑर्डर में नहीं दिखा और विधायक आसन के निर्देशों की अवहेलना भी करते नजर आए.