जयपुरः मितव्ययता के प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद राज्य में सर्कुलर इकोनॉमी के तहत आर्थिक सुधारों का नया दौर शुरू होगा. मंत्रियों और गणमान्यों के मितव्ययता के उपायों और विभागों के नवाचारों के बीच वित्त विभाग के स्तर पर उच्चस्तरीय निर्देश अनुसार फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के नए सबक गढ़ने की कोशिश की जा रही है जो मौजूदा दौर में ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है.
राज्य सरकार की माली हालत के मद्देनजर पूर्व में भी सादगी और मितव्ययता अपनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. और अब प्रधानमंत्री की अपील के बाद इन दिशानिर्देशों को नई जरूरत के मुताबिक संशोधित किया जा रहा है.
पीएम की अपील के बाद क्या हुआ अब तक ?
प्रधानमंत्री की अपील के बाद सीएम भजनलाल शर्मा ने ईवी का उपयोग किया.
सीएम भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले की गाड़ियां कम की.
उनके बाद मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने भी अपने काफिले की गाड़ियां कम की.
डिप्टी सीएम डॉक्टर प्रेमचंद बैरवा ने रोडवेज बस की यात्रा की.
डिप्टी सीएम दिया कुमारी रेल से अजमेर दौरे पर गईं.
मंत्री के.के. विश्नोई ई रिक्शा से ऑफिस पहुंचे.
कृषि विभाग के अधिकारियों ने कार पूलिंग करके घर से ऑफिस पहुंचना शुरू किया.
सीएस वी श्रीनिवास ने ये दिए निर्देश
सीएस वी श्रीनिवास ने कलेक्टर्स,संभागीय आयुक्तों और एसपी के साथ वीसी में खर्चे को कम करने के लिए कार पूलिंग की सलाह दी.
ये निर्देश दिए कि एक साथ हो सकने वाले दौरों में कलेक्टर और एसपी और संभागीय आयुक्त और आईजी एक साथ जाएं.
सभी कलेक्टर्स, संभागीय आयुक्तों, आईजी और एसपी को ज्यादा से ज्यादा वीसी के जरिए बैठकें लेने के निर्देश.
शहरी सीमा में 150 किमी और बाहर के लिए 250 किमी की सीमा का ख्याल रखते हुए दौरे करने के निर्देश.
उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग आर्थिक मितव्ययता के उपायों को गंभीरता से अपनाएं और अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसके प्रति संवेदनशील बनाकर अनावश्यक खर्च में कटौती सुनिश्चित करें.
साथ ही सीएस की खुद की और विभागों की बैठकों पहले से ही वीसी के जरिए हो रहीं हैं और पीएम की अपील के बाद इसका चलन बढ़ा है.
पीएम की अपील से पहले 8 अप्रैल को वित्त विभाग ने महत्वपूर्ण परिपत्र जारी करके राज्य सरकार के सभी विभागों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं और पीएसयू को निर्देश दिए हैं कि वे अपने कार्यक्रम, सेमीनार, प्रदर्शनी और समारोह यथासंभव केवल राजकीय भवनों में ही आयोजित करें.
परिपत्र में बताया गया है कि राज्य सरकार के पास पहले से ही आरआईसी, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, आईजीपीआरएस, एचसीएम रीपा और दुर्गापुरा स्थित एसआईएएम जैसे सुविधासंपन्न कॉन्फ्रेंस हॉल उपलब्ध हैं.
इनका उपयोग सुनिश्चित कर न केवल सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा, बल्कि अनावश्यक वित्तीय व्यय पर भी अंकुश लगेगा.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में सभी सरकारी आयोजन इन्हीं राजकीय परिसरों में किए जाएंगे.
हालांकि, विशेष परिस्थितियों में यदि किसी निजी स्थल पर आयोजन आवश्यक हो, तो इसके लिए उच्च स्तरीय समिति से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा.
यह समिति मुख्य सचिव V. Srinivas की अध्यक्षता में गठित की गई है, जिसमें वित्त, सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य के रूप में शामिल होंगे.
जून से दिसंबर तक परिवहन विभाग खरीदेगा 2100 ईवी बसें
जबकि एल एस जी बनाएगा ईवी बस टर्मिनल्स
सीएम भजनलाल शर्मा के राज उन्नति की बैठक में किए निर्णयों की पालना में दिए सीएस ने निर्देश.
इन उपायों से सरकारी खजाने पर एक चौथाई से ज्यादा खर्च बचने का अनुमान लगाया जा रहा है.
अब क्या होना चाहिए ?
विभागों के स्तर पर कार पूलिंग की नीति बनाकर अमल में लाई जाए.
पहले जयपुर शहर के मुख्य स्थानों से सचिवालय और आसपास के सरकारी कार्यालयों के लिए बसें संचालित थीं.
आम कर्मचारियों को इसकी आदत डालने के लिए इसे बढ़ावा दिया जाए ताकि ऑफिस समय पर आने और जाने वालों के लिए किफायती शहरी परिवहन उपलब्ध हो सके और डीजल - पेट्रोल की भी बचत हो सके.
सरकारी आयोजनों को सरकारी संस्थानों पर ही खर्च करने की नीति पर सख्ती से अमल किया जाए ताकि फाइव स्टार, सेवन स्टार होटलों में आयोजनों में होनेवाले खर्च पर अंकुश लग सके.
सरकारी संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो.
यथासंभव ई व्हीकल्स के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाए और इस पर ज्यादा से ज्यादा सब्सिडी की राह तलाशी जाए.
सभी सरकारी भवनों में योजना के जरिए क्रमबद्ध तरीके से सोलर पैनल लगाए जाएं और उसे उत्पादित ऊर्जा का संग्रहण किया जाए.
वाहनों के भी उपयोग की खर्च की सीमा नए सिरे से तय हो.
विदेशी दौरों पर अघोषित रोक लगे और इसके लिए ऐसा वातावरण बने कि स्व अनुशासन के जरिए अंकुश लग सके.
दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए ओड - इवन सिस्टम लागू करने को लेकर गंभीरता से विचार हो.
यथासंभव शहरों में अच्छे साइकिल ट्रैक बनाए जाएं और यथासंभव साइकिल चलाने को प्रोत्साहित किया जाए. इसके लिए ट्रैफिक व्यवस्था में भी जरूरी सुधार हो और लेन सिस्टम का सख्ती से पालन किया जाए.
शादी - ब्याहों में अनावश्यक फिजूलखर्ची पर रोक लगे. इसके लिए नीति बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाए. सोने - चांदी की यथा आवश्यकता और सीमित खरीद को प्रोत्साहित किया जाए.
पूर्व में ही सरकारी विभागों में काम होने पर बिजली उपकरण बंद करने का आदेश हो चुके हैं जिसे सख्ती से लागू करना जरूरी है.
वहीं खाली कमरों में एसी और पंखे लाइट चलने पर भी रोक लगाई जाएं
अभी लागू नहीं होगा वर्क फ्रॉम होम
पीएम की अपील के बाद कोरोना की तरह वर्क फ्रॉम होम लागू करने की मांग कर्मचारी संघों ने करनी शुरू कर दी है.
इस पर सरकार में उच्च स्तर पर यह माना गया है कि हालात अभी ऐसे नहीं है कि इसे लागू किया जाए, इसलिए फिलहाल इसे लेकर फिलहाल आदेश जारी नहीं होगा.
सरकार में उच्च स्तर पर यह भी माना गया है कि लगातार विकास की रफ्तार बनाए जाना जरूरी है और ऐसे में कुछ विभागों में या अन्य तरह से वर्क फ्रॉम होम लागू करने से काम रफ्तार नहीं पकड़ पाएगा.
हालांकि सरकारी कर्मियों को फिजूलखर्ची रोकने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया जाए.
प्रदेश में सादगी और मितव्ययता के लिए सुधांश पंत के मुख्य सचिव के कार्यकाल के दौरान भी आदेश जारी हो चुका है और अब आज की जरूरत के मुताबिक़ सीएस के निर्देश पर वित्त विभाग जल्द सर्कुलर जारी करेगा.