VIDEO : राजस्थान विधानसभा का LOGO आएगा सामने, 1952 से लेकर आज तक विधानसभा का गौरवशाली इतिहास, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान की विधानसभा का गौरवशाली इतिहास है.इस इतिहास को चित्रों के साथ विधानसभा की नई डायरी या दैनंदिनी में प्रस्तुत किया गया है साथ ही बताया गया है राजपुताना का इतिहास.खास बात डायरी को स्पीकर देवनानी ने नव वर्ष से नहीं बल्कि नव संवत्सर से शुरू किया है.आइए सुनाते है डायरी के पन्नों के जरिए राजस्थान के राजनीतिक इतिहास की गाथा.कल राजस्थान विधानसभा के LOGO का आगाज होगा.  ये तथ्य कम ही लोगों को पता होगा कि साल 1961 के 23 फरवरी के दिन राजस्थान के राज्यपाल एक परम्परा नहीं निभा पाए.तत्कालीन राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह ने अपना अभिभाषण विधानसभा के सदन में पढ़ने के बजाए राजभवन में पढ़ा.इसके पीछे कारण था सरदार गुरुमुख निहाल सिंह का स्वास्थ्य.

इतना ही नहीं 1956 का वो चित्रभीअंकित जब सरदार गुरुमुख निहाल सिंह ने विधानसभा में अभिभाषण भी पढ़ा था. बहरहाल स्पीकर वासुदेव देवनानी के नवाचारों के कारण आप जान सकेंगे राजस्थान विधानसभा से जुड़े अनसुने तथ्य. विधानसभा की नई डायरी दुर्लभ ऐतिहासिक चित्रों से सजी है.जो कि अंग्रेजी नववर्ष को फॉलो नहीं करती बल्कि भारतीय नव संवत्सर  को समर्पित है.यही कारण है कि 19मार्च गुरुवार से विधानसभा की डायरी का पहला पेज शुरू हुआ है ना कि एक जनवरी से.खास बात है भजन लाल सरकार ने चैत्र शुक्ल एकम को ही राजस्थान दिवस मनाने की नई शुरुआत की पहले 30मार्च को मनाया जाता था.डायरी का पहला चित्र सरदार पटेल से जुड़ा है जब 1952 में उन्होंने जयपुर नरेश सवाई मानसिंह द्वितीय को राजप्रमुख की शपथ दिलाई.

राजस्थान विधानसभा उस गौरव की साक्षी भी बनी जब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में पुरानी विधानसभा में यहां के विधायकों को संबोधित किया था. अगस्त - सितंबर माह की शुरुआत में ये चित्र अंकित पहले पंडित नेहरू और उसके पीछे वाले पेज पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू.ये 2023 में आई थी अपना संबोधन राजस्थान विधानसभा में. जयपुर का परकोटा साक्षी रहा है पुरानी विधानसभा का.1952 से लेकर 2000 तक विधानसभा की कार्यवाहीं गुलाबी शहर के टाउन हॉल में चलती.अप्रैल माह की शुरुआत में ये चित्र लगाया गया है.

पुरानी विधानसभा साक्षी रही है सुखाड़िया और शेखावत युग की.नई और मौजूदा विधानसभा भवन की नींव रखने की तस्वीर भी डायरी में अंकित.यहां दोनों दलों की सरकार नवंबर - दिसंबर के पेज़ पर अंकित.नवंबर के पेज़ पर
10अगस्त 1994 का स्वर्णिम दिन जब विधानसभा के मौजूदा भवन का शिलान्यास किया तात्कालीन सीएम भैरों सिंह शेखावत और तत्कालीन स्पीकर हरिशंकर भाभडा ने.कहा जाता है कि हरिशंकर भाभडा की नए भवन के पीछे महत्वपूर्ण पहल रही. दिसम्बर के पेज़ पर विधानसभा के वर्तमान भवन के लोकार्पण की तस्वीर साल 2001 का 6 नवंबर जब देश के राष्ट्रपति के आर नारायणन आए थे तब मुख्यमत्री थे अशोक गहलोत और स्पीकर थे परसराम मदेरणा.

आज नारी शक्ति वंदन अधिनियम की चर्चा...राजस्थान की विधानसभा तो नारी सशक्तिकरण की साक्षी रही है.एक ऐसा ऐतिहासिक चित्र चित्र जब राज्यपाल थी प्रतिमा पाटिल ,विधानसभा अध्यक्ष थी सुमित्रा सिंह और राज्य की मुख्यमंत्री थी वसुंधरा राजे...सितंबर - अक्टूबर के पेज पर इस चित्र को प्रमुखता दी गई.

Vo बीजेपी शासनकाल के दो मुख्यमंत्रियों को एक साथ अक्टूबर - नवंबर के पेज़ पर दिखाया गया.विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका "विधान बोधिनी "का विमोचन करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और स्पीकर हरिशंकर भाभडा..इसके पीछे वाले पेज पर चित्र अंकित है मौजूदा सीएम भजन लाल शर्मा और स्पीकर देवनानी का.संस्कृति संस्कृति का उत्कर्ष नवाचारों के दो वर्ष पुस्तक का विमोचन करते हुए. कम लोग जानते है कि राजस्थान विधानसभा देश दुनिया के सबसे चर्चित वक्ता अटल बिहारी वाजपेयी के भाषणों से सराबोर हो चुकी.

साल 1991 के अगस्त में विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों के प्रबोधन कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अटल बिहारी वाजपेयी थे.स्वर्णिम इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण वो भी है जब राजस्थान विधानसभा के रजत जयंती वर्ष पर राज्यसभा के तत्कालीन उपसभापति रामनिवास मिर्धा ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया.स्पीकर देवनानी के नवाचारों को दिखाया गया है डायरी में कैसे सदन के कारपेट का रंग ग्रीन से पिंक हो गया.. मौजूदा भजन लाल सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम की तस्वीर को भी डायरी में जगह मिली.

इतिहास को जानने की बात करें तो राजस्थान के राज्यपाल महाराजा सवाई राजा मानसिंह से लेकर हरिभाऊ बागडे,राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी से लेकर वासुदेव देवनानी, राजस्थान के मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री से लेकर भजन लाल शर्मा तक ,राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष जसवंत सिंह से लेकर टीकाराम जूली तक.इन सभी के चित्र डायरी में सुसज्जित है.