VIDEO: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवा के नाम पर बिकता मिला "धोखा" ! सेंट्रल ड्रग अथॉरिटी की टीम की भंडारी हॉस्पिटल में हुई जांच में कई खुलासा, देखिए ये रिपोर्ट

जयपुर: अगर आप पार्टनर के साथ "सुखद अनुभव" पाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म से दवाईयां खरीद रहे है तो सावधान हो जाए.क्योंकि इन दवाओं के नाम पर आपके साथ बड़ा धोखा हो सकता है.राजधानी जयपुर के भण्डारी हॉस्पिटल में जांच के लिए पहुंची सेंटल ड्रग अथॉरिटी की टीम ने कुछ ऐसा ही बड़ा चौंकाने वाला खुलासा किया है.जांच में पता चला कि वहां की फार्मेंसी के नाम का उपयोग करते हुए एक ऑनलाइन प्लेटफार्म चल रहा है, जहां यौनशक्ति बढ़ाने की दवाओं का ऐसा कॉम्बिनेशन बेचा जा रहा है, जो DCGI की अप्रूव लिस्ट में शामिल नहीं है.हालांकि, इस मामले को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने अपने ही एक कार्मिक पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पुलिस में आपराधिक मुकदमा भी दर्ज करवाया है.

गोपालपुरा स्थित भण्डारी हॉस्पिटल में इंस्टीट्यूट ऑफ एंड्रोलॉजी एंड सेक्सुअल हेल्थ (IASH) का संचालन किया जा रहा है.इस इंस्टीट्यूट यौन क्रियाकलापों को लेकर आत्मविश्वास पैदा करने का दावा करते हुए मरीजों का ट्रीटमेंट किया जाता है.एक शिकायत के आधार पर सेंटल ड्रग अथॉरिटी की टीम ने ड्रग आयुक्तालय के अधिकारियों के साथ कल देर रात हॉस्पिटल पर जांच की.तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.जांच के दौरान बताया गया कि मरीजों की सेक्सुअल दिक्कत के आधार पर पैपावेरिन, एल्प्रोस्टैडिल और क्लोरप्रोमाजिन दवाओं के कॉम्बिनेशन से ट्रीटमेंट किया जाता है.

मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को ये अधिकार है कि वो किसी दवा को कॉम्बिनेशन के रूप में डोज बनाकर मरीज को दे सकता है.लेकिन जब गहनता से पड़ताल की गई तो पता चला कि अस्पताल के एड्रेस पर चल रही जयभवानी फार्मेसी के नाम का जिक्र करते हुए "ओह-मेन" ऑनलाइन प्लेटफॉर्म  चलता रहा है. इस प्लेटफॉर्म पर इन तीनों दवाओं का कॉम्बिनेशन "ट्राइमेक्स" के नाम पर बिकता मिला.जबकि इस तरह का कोई भी दवा का कॉम्बिनेशन DCGI की अप्रूव लिस्ट में नहीं है.ऐसे में टीम ने दवाओं के सैम्पल उठाने के साथ ही पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट दिल्ली भेजने की तैयारी शुरू कर दी है.

कार्रवाई से ठीक पहले अपने की कार्मिक पर FIR !: 
-सेंट्रल ड्रग अथॉरिटी की टीम की भंडारी हॉस्पिटल में हुई जांच से जुड़ी खबर
-यहां मौजूद चिकित्सक ने बताया वे "इरेक्टाइल डिस्फंक्शन" का करते ट्रीटमेंट
-मरीजों की सेक्सुअल दिक्कत के आधार पर पैपावेरिन, एल्प्रोस्टैडिल और
-क्लोरप्रोमाजिन दवाओं का कॉम्बिनेशन बनाकर किया जाता ट्रीटमेंट
-मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को किसी दवा को कॉम्बिनेशन के रूप में देना कानूनन सही
-लेकिन जांच में पता चला कि अस्पताल के एड्रेस पर चल रही जयभवानी फार्मेसी
-इस फार्मेसी के नाम का जिक्र करते हुए चलता मिला "ओह-मेन" ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
-इस प्लेटफॉर्म पर इन तीनों दवाओं का कॉम्बिनेशन "ट्राइमेक्स" के नाम पर बिकता मिला
-जबकि इस तरह का कोई भी दवा का कॉम्बिनेशन DCGI की अप्रूव लिस्ट में नहीं शामिल
-ओह-मेन फार्मेसी के नाम से ही काटे गए बिल, जबकि इस नाम से नहीं कोई ड्रग लाइसेंस
-हालांकि इस बारे में अस्पताल प्रशासन ने ड्रग अधिकारियों की टीम को दी जानकारी
-उन्होंने बताया-"अस्पताल में कार्यरत मनीष कुमार सोनी इस कृत्य में लिप्त था
-जिसके खिलाफ 2 अप्रैल को ही पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है

ड्रग अधिकारियों की टीम ने जांच के दौरा हॉस्पिटल से कई जरूरी दस्तावेज जब्त किए है.ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया- सेंट्रल टीम को सूचना मिली थी कि गुजरात में सेक्सुअल इलाज के लिए ‘ट्राइमेक्स’ के नाम से ऑनलाइन इंजेक्शन बेचे जा रहे है. जबकि इस नाम से ड्रग डिपार्टमेंट में ऐसा कोई इंजेक्शन रजिस्टर्ड ही नहीं है. वर्तमान में इन तीनों इंजेक्शन के कॉम्बिनेशन का तैयार एक सिंगल इंजेक्शन हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों के इलाज में उपयोग किया जाता है, जो डॉक्टर कर सकते है, लेकिन बाजार में ‘ट्राइमेक्स’ के नाम से ब्रांड बनाकर बेचान गैरकानूनी है.

जांच में ये भी बात सामने आई है कि दवा बेचने के लिए OHMAN नाम से फार्मेसी भी बना रखी थी, लेकिन उस फार्मोसी का भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करवा रखा था. आरोपी इसी बोगस फार्मेसी से ऑनलाइन इंजेक्शन का बेचान करते थे. इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन ने जिस कार्मिक मनीष कुमार सोनी पर FIR दर्ज करवाई है, वह पिछले 5 साल से यहां काम कर रहा था और डॉक्टर का असिस्टेंट था. ऐसे में सवाल यह है कि इतने समय तक कार्मिक खेल करता रहा और प्रबंधन को सूचना तक नहीं लगी.हालांकि,अब इस पूरे मामले में ड्रग आयुक्तालय की तरफ से फेक्चुअल रिपोर्ट केंद्र को भेजने की तैयारी है.अब देखना ये होगा कि जांच रिपोर्ट पर आगे क्या कार्रवाई होती है.