जयपुर: राजधानी जयपुर में आज जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरस गई. दरअसल सरकारी पानी सप्लाई करने वाले टैंकर्स के पहिये थम गए. दरअसल लंबे समय से बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे टैंकर संचालन करने वाले ठेकेदारों का सब्र जवाब दे गया और उन्होंने हड़ताल कर दी. पूरी गर्मी में पानी सप्लाई को लेकर लगभग फेल रहे जलदाय विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है. टैंकर ठेकेदारों ने पहले ही लिखित में चेतावनी दे दी थी, इसके बावजूद अधिकारी सोए रहे और अब खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.
ये तस्वीरें राजधानी जयपुर की हैं. जहां गर्मी के बीच पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है. जिन इलाकों में सरकारी टैंकर ही पानी का सहारा हैं, वहां आज टैंकरों के पहिए थम गए. लोग इंतजार करते रहे, लेकिन पानी नहीं पहुंचा. हैरानी की बात ये है कि यह संकट अचानक नहीं आया. टैंकर ठेकेदारों ने 9 जून को ही साफ चेतावनी दे दी थी कि अगर बकाया भुगतान नहीं हुआ तो सप्लाई बंद कर दी जाएगी. लेकिन जलदाय विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया. ठेकेदार कह रहे हैं कि 14 महीने से भुगतान नहीं हो रहा, जिसके कारण न टैंकर मालिकों को भुगतान कर पा रहे हैं और न ही टैंकर चालकों को. लंबे समय से भुगतान बकाया रहने के कारण फर्म की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई. ठेकेदारों ने चेताया कि 15 जून तक भुगतान नहीं हुआ, तो टैंकर नहीं चलेंगे, लेकिन न तो विभाग के मंत्री ने इस पर ध्यान दिया और न ही अधिकारियों ने. राजधानी में जगह-जगह खड़े खाली टैंकर विभागीय दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखा रहे हैं.
मामला सिर्फ टैंकर संचालक तक ही सीमित रहने वाला नहीं है. विभाग से जुड़े अन्य कामों के ठेकेदारों ने भी 17 जून से पानी बंद करने की चेतावनी दे दी है. ठेकेदारों ने बाकायदा अखबरों में विज्ञापन प्रकाशित करके चेतावनी दी है कि यदि उनका बकाया भुगतान नहीं होगा, तो न तो किसी प्रोजेक्ट पर काम होगा और न ही प्रदेश में सप्लाई से जुड़े काम किए जाएंगे. जलदाय विभाग के इतिहास में पहली बार हुआ है जब ठेकेदारों ने विज्ञापन देकर विभाग की कार्यशैली पर सीधा तमाचा जड़ा है. ठेकेदारों का आरोप है कि 22 अप्रैल को जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की मौजूदगी में विभाग और ठेकेदारों के बीच समझौता हुआ था. उस दौरान बकाया भुगतान जल्द जारी करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दो महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.
ठेकेदारों का कहना है कि वे पिछले 14 महीनों से अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. भुगतान नहीं मिलने से नाराज PHED ठेकेदारों ने विज्ञापन जारी कर 17 जून से पूरे प्रदेश में पेयजल आपूर्ति प्रभावित करने की चेतावनी दी. इसके बाद विभाग में हलचल तेज हुई. मामला तूल पकड़ने के बाद जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने बयान जारी कर ठेकेदारों की मांगों को पूरी तरह जायज बताया. उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदारों से बातचीत कर ली है और जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी करने का प्रयास किया जाएगा. मंत्री ने यह भी दावा किया कि आमजन को पानी की किल्लत नहीं होने दी जाएगी और पेयजल आपूर्ति सुचारू रखी जाएगी.
मंत्री कह रहे हैं कि मांगें जायज हैं. भुगतान भी होगा. सप्लाई भी नहीं रुकेगी. लेकिन सवाल ये है कि अगर मांगें जायज थीं तो 14 महीने तक भुगतान क्यों नहीं हुआ? अगर चेतावनी पहले से थी तो संकट आने का इंतजार क्यों किया गया? और अगर राजधानी की प्यास बुझाने की व्यवस्था इतनी कमजोर है तो फिर प्रदेश के बाकी हिस्सों का क्या हाल होगा? फिलहाल जलदाय विभाग की प्रशासनिक सुस्ती और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि आम जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान है.