VIDEO: जयपुर के जेएलएन मार्ग की बेशकीमती भूमि के मामले में बड़ी खबर, जेडीए ने हाईकोर्ट में पेश जवाब में जताई असमर्थता, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजधानी के जेएलएन मार्ग पर ग्रीन फायर हॉस्पिटल से जुड़ी बेशकीमती भूमि के मामले में भूमि आवंटन को लेकर जेडीए ने हाईकोर्ट में असमर्थता जताई है. वहीं राज्य सरकार ने भी इस पांच सौ करोड़ बाजार भाव की भूमि के मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है. जेडीए और राज्य सरकार का हाई कोर्ट में क्या है रूख जानने के लिए देखें ये खास खबर. करीब पांच सौ करोड़ रुपए बाजार भाव की यह भूमि जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर वर्ल्ड ट्रेड पार्क के सामने स्थित है. इस 23 हजार 633 वर्गगज भूमि पर वर्तमान में पार्क विकसित किया हुआ है. आपको सबसे पहले इस 23 साल पुराने मामले की पूरी कहानी बताते हैं.

मामले की कहानी 23 साल पुरानी: 
जेडीए और राज्य सरकार का हाईकोर्ट में क्या है रूख: 
- जेडीए ने 9 सितंबर 2003 को ग्रीन फायर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड को 17 हजार 433 वर्गगज भूमि आवंटित की थी
- जेडीए ने 25 सितंबर 2003 को इस फर्म को जेएलएन मार्ग की इसी दो सौ फीट पट्टी की 6200 वर्गगज भूमि भी आवंटित की
- 1 अक्टूबर 2003 को जेडीए ने कुल 23 हजार 633 वर्गगज भूमि का पट्टा भी फर्म को जारी कर दिया
- जय जवान कॉलोनी तृतीय की आवंटी रतन प्रभा जैन व अन्य आवंटियों ने जेडीए अपीलीय ट्रिब्यूनल में याचिका लगाई
- इस याचिका में इन लोगों ने दो सौ फीट पट्टी की आवंटित 6200 वर्गगज भूमि खुद को आवंटित होना बताया
-जय जवान गृह निर्माण सहकारी समिति की ओर से यह भूमि आवंटित होना बताया
- जेडीए अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 24 जनवरी 2006 को फैसला देकर भूमि के आवंटन के आदेश निरस्त कर दिए
- इसके खिलाफ फर्म ने हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका दायर की
-हाईकोर्ट ने 7 फरवरी 2006 को आदेश जारी कर ट्रिब्यूनल के आदेश को स्टे कर दिया
-हाईकोर्ट ने मामले में 30 नवंबर 2016 को फर्म की रिट स्वीकार करते हुए अंतिम आदेश जारी किए
-इसी बीच प्रदेश की तत्कालीन वसुंधरा सरकार के दूसरे कार्यकाल में जब इस भूमि पर गंदगी व कचरा हटाकर जेडीए ने हरियाली विकसित की थी
-तब इस जमीन का मामला अदालत में लंबित चल रहा था
-तब सरकार का स्पष्ट मत था कि यहां स्थाई तौर पर पार्क विकसित नहीं किया है
-पार्क विकसित करने पर ग्रीन फायर हॉस्पिटल ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाई थी
-तब जेडीए हाईकोर्ट में जवाब दिया था कि स्थाई तौर पर पार्क विकसित नहीं किया है
-भूखंड आवंटन की मांग को लेकर रतन प्रभा जैन व अन्य आवंटियों की याचिका हाईकोर्ट की खंडपीठ में लंबित थी
-बाद में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह मामला लोक अदालत को भेजा
-मामले में शामिल जेडीए सहित अन्य पक्षों की सहमति के आधार पर लोक अदालत ने मामले में आदेश दिए
-लोक अदालत ने ग्रीन फायर हॉस्पिटल को 17 हजार 433 वर्गगज भूमि का पट्टा देने के जेडीए को आदेश दिए
-शेष 6 हजार 200 वर्गगज के पट्टे रतन प्रभा जैन व अन्य भूखंडधारियों को देने के आदेश दिए
-इस आदेश की पालना नहीं होने पर ग्रीन फायर हॉस्पिटल की ओर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई गई
-इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश बिपिन गुप्ता की बेंच ने लोक अदालत के फैसले की पालना के आदेश दिए थे
-हाई कोर्ट ने 2 जुलाई से पहले लोक अदालत के फैसले की पालना के आदेश दिए थे

हाई कोर्ट में पिछले दिनों मामले में लंबित अवमानना याचिका में सुनवाई हुई थी अब मामले में अगली तारीख 20 जुलाई है. जेडीए की ओर से भूमि आवंटन जारी करने में असमर्थता जताते हुए जवाब पेश कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार ने याचिका दायर कर लोक अदालत के फैसले को रद्द करने की मांग की है. जेडीए में पूरे मामले में की गई पड़ताल में महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हुआ है.

जयपुर के जेएलएन मार्ग की बेशकीमती भूमि के मामले में बड़ी खबर: 
-ग्रीन फायर हॉस्पिटल से जुड़े चर्चित मामले में बड़ी खबर
-जानकार सूत्रों के अनुसार बड़ी खबर
-जेडीए ने हाई कोर्ट में पेश जवाब में जताई असमर्थता
-ग्रीन फायर हॉस्पिटल व अन्य को भूमि आवंटन में जताई असमर्थता
-जेडीए ने अपने जवाब में कहा है
-लोक अदालत में समझौते के लिए जेडीए ने जो दी थी सहमति
-भूमि आवंटन के लिए जो थी सहमति,उस पर नहीं ली गई स्वीकृति
-राज्य सरकार की बिना स्वीकृति के ही तब दे दी गई थी सहमति
-जबकि इतनी बड़ी भूमि के आवंटन के लिए सक्षम स्वीकृति है जरूरी
-राज्य सरकार की ओर से स्वीकृति लिया जाना है जरूरी
-बिना सक्षम स्वीकृति जेडीए की दी सहमति के आधार पर नही हैं संभव
-जेडीए की ओर से भूमि का आवंटन किया जाना नहीं है संभव
-हाई कोर्ट में लंबित अवमानना याचिका में जेडीए ने पेश किया ये जवाब

राज्य सरकार की ओर से मामले में हाई कोर्ट में दायर की है याचिका:
-जानकार सूत्रों  के अनुसार
-याचिका में लोक अदालत के आदेश को निरस्त करने की की मांग
-राज्य  सरकार की ओर से याचिका में कहा गया है कि
-बिना राज्य सरकार की स्वीकृति जेडीए ने दे दी थी सहमति
-हॉस्पिटल व अन्य को भूमि आवंटन की दे दी थी सहमति
-बिना सक्षम स्वीकृति के दी गई सहमति पर लोक अदालत ने दिया है आदेश
-ऐसे में लोक अदालत के आदेश को किया जाए निरस्त
-राज्य सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा कि
-जेडीए की सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी को कर दिया निलंबित
-तत्कालीन जोन उपायुक्त बलवंत सिंह लिग्री को कर दिया है निलंबित

जानकार सूत्रों के अनुसार जेडीए की पड़ताल में हुए अहम खुलासे:
-जब तत्कालीन जोन उपायुक्त बलवंत सिंह लिग्री ने किए थे हस्ताक्षर
-लोक अदालत में समझौते के लिए जेडीए की सहमति पत्र पर हस्ताक्षर
-तब उससे पहले ही लिग्री का जेडीए से हो चुका था तबादला
-तबादले के बावजूद वे जेडीए से नहीं हुए थे रिलीव
-सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के बाद ही वे जेडीए से हुए रिलीव
-यह भी बात सामने आ रही है कि मामले की फाइल पर नहीं है उपलब्ध
-तत्कालीन जेडीए आयुक्त की प्रकरण में स्वीकृति फाइल पर नहीं हैं उपलब्ध
-हालांकि लिग्री की ओर से प्रकरण के एक दस्तावेज में किया गया है जिक्र
-जेडीए आयुक्त की स्वीकृति लेने का किया गया है जिक्र
-ऐसे में मामले के विशेषज्ञ कर रहे है सवाल
-क्या जेडीए आयुक्त की स्वीकृति की नोटशीट हो गई है "गायब"?
-उधर बलवंत सिंह लिग्री का कहना है कि मामले में ली गई थी स्वीकृति
-मामले में उच्च अधिकारियों की ली गई थी स्वीकृति