जयपुरः संगठन सृजन के जरिए बनाए गए जिला अध्यक्षों की कार्यशैली की लगातार निगरानी हो रही है. जिला कप्तानों की ऐप के जरिए ऑनलाइन हर हफ्ते और हर माह समीक्षा हो रही है. वर्किंग परफॉर्मेंस के आधार पर बाकायदा रेटिंग भी दी जा रही है. जिसके तहत 50 में से केवल 4 जिला अध्यक्षों की ही फाइव स्टार रेटिंग मिली है. वहीं 5 अध्यक्षों को तीन से नीचे रेटिंग मिली है.
संगठन सृजन अभियान के जरिए राजस्थान में पिछले दिनों तमाम 50 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है. जिनमें से 45 जिला अध्यक्षों की तो करीब 4 माह पहले नियुक्ति हो गई थी और शेष पांच जिला अध्यक्षों की घोषणा कुछ माह पहले हुई है. लेकिन अब हाईकमान ने जिम्मेदारी के साथ जिला अध्यक्षों की जवाबदेही भी तय कर दी है. हर हफ्ते औऱ हर माह जिला अध्यक्षों की तमाम गतिविधियों की ऑनलाइन समीक्षा हो रही है. जैसे ही जिला अध्यक्ष प्रदर्शन या फिर अन्य किसी गतिविधि की डिटेल फोटो और तथ्यों सहित अपलोड करते है तो ऑटोमेटिक उनकी रेटिंग निर्धारित हो जाती है. सोशल मीडिया संचालन औऱ ट्रेनिंग प्रोग्राम जैसी गतिविधियां भी इसमें शामिल है. बेहतर काम कर रहे है तो अधिकतम फाइव स्टार रेटिंग अगर औसत या कमजोर प्रदर्शन है तो फिर उसके हिसाब से दो ढाई,तीन औऱ चार ऐसे रेटिंग दी जा रही है.
राजस्थान कांग्रेस जिला अध्यक्षों की कार्यशैली पर हाईकमान की नजर
जिला अध्यक्षों की हर गतिविधि की हो रही है पैनी निगरानी
वन स्टार से लेकर अधिकतर 5 स्टार रेटिंग से हो रही है परफॉर्मेंस तय
केवल 4 जिला अध्यक्षों को अब तक मिली फाइव स्टार रेटिंग
प्रकाश गंगावत, लक्ष्मण गोदारा, दिनेश सूपा और परमानंद मेहता टॉप पर
5 जिला अध्यक्षों को कमजोर प्रदर्शन के चलते थ्री स्टार से नीचे मिली रेटिंग
ओमकार वर्मा का मिली केवल 2 स्टार रेटिंग
अर्जुन बामनिया,इंदिरा मीणा,विद्याधर चौधरी और गोविंद नारायण को मिली ढाई-ढाई स्टार रेटिंग
22 जिला अध्यक्षों को मिली 4 स्टार रेटिंग
10 जिला अध्यक्षों को दी थ्री स्टार रेटिंग
शेष जिला अध्यक्षों को मिली साढे तीन स्टार रेटिंग
हर 6 माह बाद होगी फिर पॉलिटिकल रेटिंग भी तय
दरअसल काम की लगातार समीक्षा और रेटिंग के जरिए निगरानी करने के पीछे हाईकमान की मंशा है जिला अध्यक्षों को सक्रिय रखा जाए. आपको बता दे कि जिला अध्यक्षों को सियासी रूप से पावरफुल बनाने के लिए ही संगठन सृजन मॉडल लाया गया था. दरअसल राहुल गांधी चाहते है कि पहले की तरह जिला अध्यक्ष पद लेकर बैठे नहीं और सीनियर नेताओं के इशारे पर बिल्कुल काम नहीं करें. लिहाजा वॉर रूम के जरिए राहुल गांधी अध्यक्षों की हर गतिविधि को ऐसे में सीधे खुद वॉच कर रहे हैं. अगर फिर भी कोई जिला अध्यक्ष एक्टिव नहीं रहता है तो फिर परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर उसे हटाने का भी विकल्प है. गुजरात में हटाने का बाकायदा प्रयोग भी किया जा चुका है.
निगरानी और रेटिंग तंत्र सिस्टम का यकीनन असर भी देखा जा रहा है. जिला अध्यक्ष हाईकमान के बैठक और निर्देशों को गंभीरता से भी ले रहे हैं. फोटो और मीडिया न्यूज जैसी जानकारी अनिवार्य रूप से अपलोड करने के चलते अब पहले की तरह औपचारिकता वाले रास्ते के भी इससे ब्रेक लग चुके हैं. हालांकि कईं जिला अध्यक्ष इस निगरानी वाली प्रक्रिया से बेहद टेंशन में भी है. लेकिन आलाकमान का साफ स्टैंड है जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही भी होगी. अगर टिकट बांटने की ताकत मिलेगी तो काम करके खुद को साबित भी करना होगा. कुल मिलाकर अब जिला अध्यक्षों के वो दिन गए जब पद लेकर लेटरहेड से काम चल जाता था.
कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के कामकाज की निगरानी
हाईकमान एप के जरिए ऑनलाइन कर रहा है समीक्षा
वर्किंग परफॉर्मेंस के आधार अध्यक्षों की हो रही है रेटिंग तय
केवल चार जिला अध्यक्षों को मिली अब तक फाइव स्टार रेटिंग
5 जिला अध्यक्षों को मिली थ्री स्टार रेटिंग
प्रकाश गंगावत, लक्ष्मण गोदारा, दिनेश सूपा और परमानंद मेहता टॉप पर
अर्जुन बामनिया,इंदिरा मीणा,विद्याधर चौधरी और गोविंद नारायण की परफॉर्मेंस कमजोर