जयपुर: अधूरी तैयारी और सवालों के मकड़ जाल में सरकार के तीन मंत्री आज घिर गए. प्रश्न काल के दौरान ऐसा हुआ और हंगामा भी बरपा. जनजाति आश्रम छात्रावास में खाद्य सामग्री की आपूर्ति मामले में जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी, चौमू नगर परिषद में कार्य संविदा कर्मियों के मामले में स्वायत शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा, प्रदेश के विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित स्वयंपाठी विद्यार्थियों के विमर्श शुल्क मामले में उच्च शिक्षा मंत्री और डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा सवालों के संतोषजनक जवाब नही दे पाए. खराड़ी से जुड़े सवाल पर तो स्पीकर देवनानी को जांच के कहने के लिए कहना पड़ा.
कांग्रेस विधायक अर्जुन बामणिया के तीखे सवालों ने जनजाति विकास मंत्री बाबू लाल खराड़ी को सदन में लगभग निरुत्तर ही कर दिया.. बेस्ट विधायक का खिताब ले चुके कैबिनेट मंत्री बाबू लाल खराड़ी जनजाति आश्रम छात्रावास में खाद्य सामग्री की आपूर्ति मामले में घिर गए उनके महकने और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लग गए..प्रश्नकाल में विधायक अर्जुन सिंह बामनियां ने जनजाति क्षेत्र के छात्रावासों में खाद्य सामग्री की दरों में अंतर और संभावित वित्तीय गड़बड़ी का मामला उठाया. उन्होंने मंत्री बाबूलाल खराड़ी से आपूर्ति की दरें पूछीं, लेकिन स्पष्ट उत्तर नहीं मिलने पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया. विधायक अर्जुन बामनिया ने कहा कि जनजाति बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय अत्यंत गंभीर है और अलग-अलग दरों पर खरीद से वित्तीय अनियमितता की आशंका है. उन्होंने पूछा कि दर तय नहीं होने के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है और क्या उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. इस दौरान विपक्ष ने नारेबाजी की. स्पीकर वासुदेव देवनानी ने व्यवधान न डालने की हिदायत देते हुए मंत्री को जवाब देने का अवसर देने को कहा देवनानीने अशोक चांदना को फटकार लगाई. मंत्री खराड़ी ने बताया कि दरें बाजार के अनुसार बदलती रहती हैं और सभी बिल उपलब्ध करा दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि दरों में अंतर की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. मीडिया में समाचार आने के बाद वित्त सलाहकार, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक लेखा अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है. जांच के बाद दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए छात्रावास वार्डनों को अलग-अलग बजट भेजा गया घी की अलग अलग रेट भ्रष्टाचार को दर्शाती है. उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की. स्पीकर देवनानी ने मंत्री को पूरे मामले की गहन जांच कराने के निर्देश दिए.
चौमू नगर परिषद में कार्य संविदा कर्मियों के मामले में स्वायत शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जवाब दिया. विधायक शिखा मील ने चौमू नगर परिषद में कार्यरत संविदा कर्मियों की नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना का प्रश्न उठाया. उन्होंने कहा कि अस्थिर सेवा शर्तों के कारण इन कर्मियों से वसूली कराए जाने की शिकायतें मिलती हैं और सरकार को स्थायी समाधान करना चाहिए. इस पर UDH मंत्री खर्रा ने कहा कि भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है, यह स्वतंत्रता के बाद से चली आ रही समस्या है. उन्होंने कहा कि चाहे नियमित कर्मचारी हों या संविदा कर्मी, जिनकी नीयत खराब होती है वे ही अनियमितताओं में लिप्त रहते हैं. उन्होंने बताया कि जिन मामलों में शिकायतें मिली हैं, उनमें संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है और डेपुटेशन पर आए कर्मचारियों को मूल विभाग में भेजा जाएगा. मंत्री झाबर सिंह ने कहा कि संविदा कर्मियों की भविष्य निधि और ईएसआई जमा करवाना प्लेसमेंट एजेंसी की जिम्मेदारी है, अन्यथा भुगतान रोका जाएगा. समय अनुकूल होने पर संविदा कर्मियों के समायोजन पर भी विचार किया जाएगा.
विधानसभा के प्रश्नकाल में प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा स्वयंपाठी विद्यार्थियों से वसूले जा रहे विमर्श शुल्क को लेकर लगे सवाल पर मंत्री के जवाब नही मिलने पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया. विधायक मनीष यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा से सवाल किया कि अलवर, जयपुर और उदयपुर के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों से विमर्श शुल्क के रूप में लगभग 223 करोड़ रुपये वसूले गए हैं, यह राशि कहां खर्च की गई और कितने विमर्श केंद्र स्थापित किए गए. जवाब के दौरान मंत्री बैरवा तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों की संख्या बताते हुए उलझते नजर आए. इस पर विधायक मनीष यादव ने स्पष्ट जानकारी देने की मांग की. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि मंत्री ने गलत उत्तर दिया है तो यह विशेषाधिकार हनन की श्रेणी में आता है. उन्होंने अतारांकित प्रश्न का उत्तर प्रति भी सदन की मेज पर रखी. मामले को लेकर पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपनी-अपनी सीटों पर खड़े हो गए और जोरदार नारेबाजी हुई. मंत्री के जवाब के दौरान सदन में लगातार शोरगुल होता रहा. स्थिति को संभालते हुए अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि प्रश्नकाल में बहस नहीं होती और सदस्यों को नियमों का पालन करना चाहिए.हंगामे के बीच प्रश्नकाल की अवधि पूरी होते ही कार्यवाही आगे बढ़ी और सदन में शांति बहाल हुई.
प्रश्नकाल में अकलेरा-मनोहर थाना क्षेत्र में बस स्टैंड निर्माण का मुद्दा भी उठा. विधायक गोविंद प्रसाद के प्रश्न पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि सीमित संसाधनों और परिवहन निगम की कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. भूमि उपलब्ध होने पर विचार किया जाएगा. करणपुर क्षेत्र में जल योजनाओं पर विधायक रुपिंदर सिंह कुन्नर ने स्वीकृत पदों में रिक्तियों और दूषित जल आपूर्ति का मुद्दा उठाया. मंत्री कन्हयालाल ने स्वीकार किया कि 41 में से 20 पद रिक्त हैं, जिन्हें पदोन्नति और संविदा से भरा जाएगा. उन्होंने बताया कि 17.2 एमएलडी क्षमता का फिल्टर संयंत्र कार्यरत है तथा हनुमानगढ़ और गंगानगर में भारी धातु जांच प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी.
उधर, निजी औद्योगिक क्षेत्र विकास पर विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी के प्रश्न पर मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि एक जिला एक नीति के तहत सभी जिलों का चयन हो चुका है. वर्ष 2025-26 में 36 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जिनमें से 16 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं. राजसमंद में 13,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्टोन मंडी विकसित की गई है. वहीं बिशन संबंध बांध की नहर निर्माण पर विधायक घनश्याम के प्रश्न पर मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि स्वीकृति अगस्त में दी जा चुकी थी, निविदा प्रक्रिया के बाद शीघ्र कार्य प्रारंभ होगा. सदन में दिनभर विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा.
इसी दौरान महुआ विधानसभा क्षेत्र में लंबित कृषि कनेक्शनों का मुद्दा विधायक राजेन्द्र मीणा ने उठाया. मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि नई कट ऑफ तिथि जारी होने के बाद वरीयता के आधार पर कनेक्शन दिए जाएंगे. महुआ-मंडावर में भूमिगत विद्युत लाइन के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि नगरीय क्षेत्रों में यह कार्य स्थानीय निकायों के माध्यम से होता है. यदि निकाय प्रस्ताव भेजते हैं तो विद्युत निगम विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करता है. पूर्ववर्ती सरकार के समय हुए कार्यों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.