राजस्थान सरकार ने लागू की नई भूमि आवंटन नीति, नगरीय विकास विभाग ने जारी की अधिसूचना, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः शहरों में निकायों की ओर से विभिन्न उद्देश्यों के लिए भूमि आवंटन को लेकर प्रदेश की भजनलाल सरकार ने नई नीति लागू कर दी है. नगरीय विकास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है. इस नीति के तहत किस उद्देश्य के लिए किस प्रकार किया जा सकेगा भूमि का आवंटन. 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आवंटन नीति को मंजूरी दी गई. इसके बाद नगरीय विकास विभाग ने अधिसूचना जारी कर इस नीति को लागू कर दिया गया है. इससे पहले राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2015 में भूमि आवंटन नीति लागू की गई थी. जिस उपयोग के लिए भूमि आवंटित की जाए, उस उपयोग के अनुसार ही भूमि का उपयोग हो, शहरी आमजन को सुविधाएं उपलब्ध हो और आवंटन प्रक्रिया सरल हो, इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की ओर से नई आवंटन नीति लागू की गई है. आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी हो और समयबद्ध तरीके से भूमि का आवंटन किया जाए, इसको लेकर इस नई नीति में प्रावधान किए गए हैं. निजी संस्थानों को भूमि आवंटन न्यूनतम निवेश की गारंटी पर ही किया जाएगा.

जब भी किसी निकाय को मिलेगा आवंटन का आवेदन
तो उस भूमि आवंटन के आवेदन पर मांगी जाएंगी आपत्ति
इसके लिए निकाय अपनी वेबसाइट पर डालेंगे आवेदन
न्यूनतम 15 दिन के लिए वेबसाइट पर डालेंगे आवेदन
सक्षम स्तर पर भूमि आवंटन का फैसला होने पर किया जाएगा जारी
निकाय को 15 दिन में आवंटन एवं मांग पत्र किया जाएगा जारी
मांग पत्र जारी होने के एक माह में करनी होगी राशि जमा
संबंधित संस्था को करनी होगी राशि जमा
जमा नहीं करने पर 6 माह की अवधि में 15% प्रतिवर्ष की दर से लगेगा ब्याज
निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर किया जाएगा निरस्त
संस्था का भूमि आवंटन किया जाएगा निरस्त
इसके लिए पहले 15 दिन का दिया जाएगा नोटिस
निशुल्क या रियायती दर पर किए गए आवंटन की देनी होगी जानकारी
संबंधित निकायों को ऑनलाइन पोर्टल पर देनी होगी जानकारी
अब तक किए गए सभी आवंटन प्रकरणों की देनी होगी जानकारी
और यह जानकारी नियमित रूप से करनी होगी अपडेट
मौका निरीक्षण कर नियमित रूप से करनी होगी अपडेट
आवंटन की शर्तों का उल्लंघन होने पर किया जाएगा निरस्त
संबंधित संस्था का आवंटन किया जाएगा निरस्त
जिस संस्था को पहले रियायती दर पर किया गया है भूमि आवंटन
लेकिन उसने आवंटित भूमि पर निर्माण कर नहीं किया है उद्देश्य पूरा
आवंटन का उद्देश्य अगर नहीं किया है पूरा
तो ऐसी संस्था को दोबारा भूमि आवंटन पर किया जाएगा फैसला
राज्य मंत्रिमंडल के स्तर पर ही किया जाएगा फैसला
निजी संस्थानों को निवेश की गारंटी पर भूमि की जाएगी आवंटित
गारंटी के तौर पर संस्थान के बैंक खाते में होनी चाहिए अतिरिक्त राशि
आवंटित भूमि पर प्रोजेक्ट के लिए दी गई DPRजो बताया जाएगा निवेश
उस निवेश राशि की न्यूनतम 30%अतिरिक्त राशि होनी चाहिए उपलब्ध
संबंधित संस्थान के बैंक खाते में 30 प्रतिशत राशि होनी चाहिए उपलब्ध
लेकिन अगर संस्थान के खाते में है केवल 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि तो
संस्थान के औसत शुद्ध लाभ की राशि 10% से अधिक होना है जरूरी
पिछले 3 वर्षों के औसत शुद्ध लाभ की राशि 10%से अधिक होना है जरूरी
निवेश की जाने वाली राशि के 10%से अधिक होना है जरूरी

प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. इसे दृष्टिगत रखते हुए होटल व रिसोर्ट के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रावधान इस नई आवंटन नीति में रखे गए हैं. साथ ही राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को किस शहर में अधिकतम कितनी भूमि हो सकेगी आवंटित, इसको लेकर भी प्रावधान किए गए हैं.

न्यूनतम 50 करोड़ के निवेश पर की जा सकेगी भूमि आवंटित
होटल के लिए 3000 वर्ग मीटर भूमि की जा सकेगी आवंटित
इसके बाद प्रत्येक 100 करोड रुपए पर की जा सकेगी भूमि आवंटित
होटल के लिए 3000 वर्ग मीटर भूमि की जा सकेगी आवंटित  
रिसोर्ट के लिए न्यूनतम 50 करोड रुपए पर किया जा सकेगा आवंटन
10 हजार वर्ग मीटर भूमि का किया जा सकेगा आवंटन
इसके बाद प्रत्येक 100 करोड़ के निवेश पर किया जा सकेगा आवंटन
10 हजार वर्ग मीटर भूमि का किया जा सकेगा आवंटन
इन मामलों में विकसित भूमि का किया जाएगा आवंटन
व्यावसायिक आरक्षित दर और
अविकसित भूमि का आवंटन किया जाएगा आवंटन
डीएलसी दर के 150% पर किया जाएगा आवंटन
नीति के तहत राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को किया जा सकेगा भूमि आवंटन
जयपुर में अधिकतम 6 हजार वमी. भूमि का किया जा सकेगा आवंटन
संभागीय मुख्यालय में 3 हजार वमी. तक भूमि का हो सकेगा आवंटन
जिला मुख्यालय में 2 हजार वर्गमीटर तक हो सकेगा भूमि आवंटन
विकसित भूमि होने पर आरक्षित दर+15%पर किया जा सकेगा आवंटन
अविकसित भूमि होने पर कृषि भूमि की दर+20%पर हो सकेगा आवंटन

शहरों में लोगों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य व चिकित्सा और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो, इसके लिए नई आवंटन नीति में अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के लिए भूमि आवंटित की जा सकेगी. किस स्तर के अस्पताल या स्कूल के लिए कितनी भूमि दी जाए, इसको लेकर नीति में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. 

स्वास्थ्य व चिकित्सा संस्थाओं को दी जा सकेगी भूमि
100 बेड्स तक के अस्पताल को मिलेगी भूमि
संभागीय मुख्यालय पर 2 हजार वर्गमीटर तक
और अन्य शहरों में 2.5 हजार वर्गमीटर तक मिलेगी भूमि
200 बेड्स तक के अस्पताल को मिलेगी भूमि
संभागीय मुख्यालय पर 3 हजार वर्ग मीटर तक
और अन्य शहरों में 4 हजार वर्गमीटर तक मिलेगी भूमि
प्रत्येक 100 बेड्स पर 50 करोड़ रुपए के निवेश पर मिलेगी भूमि
बड़े अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के लिए भी दी जा सकेगी भूमि
न्यूनतम 300 बेड्स के लिए दी जा सकेगी भूमि
न्यूनतम 500 करोड़ के निवेश पर दी जा सकेगी भूमि
50 हजार वर्गमीटर तक आवंटित की जा सकेगी भूमि
200 से अधिक बेड्स वाले अस्पताल को दी जा सकेगी भूमि
प्रति 50 बेड्स के लिए अतिरिक्त 1 हजार वर्ग मीटर दी जा सकेगी भूमि
प्राथमिक,उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए दी जा सकेगी भूमि
संभागीय मुख्यालय पर 2 हजार वर्गमीटर तक और
अन्य शहरों में 3 हजार वर्गमीटर तक दी जा सकेगी भूमि
माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए दी जा सकेगी भूमि
संभागीय मुख्यालय पर 4 हजार वर्गमीटर तक और
अन्य शहरों में 6 हजार वर्गमीटर तक दी जा सकेगी भूमि
कॉलेज के लिए संभागीय मुख्यालय पर 6 हजार वर्गमीटर तक
और अन्य शहरों में 10 हजार वर्गमीटर तक दी जा सकेगी भूमि
रिसर्च व ट्रेनिंग संस्थान के लिए संभागीय मुख्यालय पर 4 हजार वमी.
और अन्य शहरों में 3 हजार वर्गमीटर तक दी जा सकेगी भूमि
विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय विस्तार के लिए मिल सकेगी भूमि
न्यूनतम 300 करोड़ के निवेश पर मिल सकेगी भूमि
संभागीय मुख्यालय में अधिकतम 20 एकड़ और
अन्य शहरों में 20 एकड़ तक आवंटित की जा सकेगी भूमि