VIDEO: लापरवाही के हादसों से ग्रस्त राजस्थान का सबसे बड़े ट्रोमा सेन्टर, SMS अस्पताल के ट्रोमा सेन्टर के आईसीयू में पानी-पानी, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर : एसएमएस ट्रोमा सेन्टर के पॉलीट्रोमा आईसीयू में पानी भरने की घटना ने एकबार फिर प्रशासन को सवालों के घेरे में ला दिया. कल देर रात करीब 11 बजे आईसीयू से गुजर रही पुरानी पाइप लाइन में लिकेज हुआ और देखते ही देखते पूरी आईसीयू पानी-पानी हो गया. हालांकि, चिकित्सकों की मुस्तैदी के चलते आनन-फानन में गंभीर श्रेणी के 14 मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट तो कर दिया गया. लेकिन इस दौरान मरीज और उनके परिजनों को कड़ाके की सर्दी में बड़ी दिक्कतों का सामने करना पड़ा. सूचना मिलने पर प्रमुख चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड भी अस्पताल पहुंची और व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के निर्देश दिए.

एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रोमा सेंटर में मरीजों की आफत कम होने का नाम नहीं ले रही है. करीब साढ़े 3 माह पहले लगी न्यूरो आईसीयू की आग का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि कल देर रात पॉलिट्रोमा सेन्टर में अचानक "अफरा-तफरी" की स्थिति पैदा हो गई. अबकी बार आग के बजाय पानी से हालात बिगड़े, जिसके बाद 14 गंभीर मरीजों को आनन-फानन में आईसीयू से शिफ्ट करना पड़ा. इसमें 4 मरीजों को तो ट्रोमा सेंटर से दूर मैन बिल्डिंग के बांगड़ परिसर में शिफ्ट किया गया, जो वेंटिलेटर पर थे. गनीमत ये रही कि इस दौरान किसी मरीज की मौत नहीं हुई. हालांकि, घटना के बाद प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई और पानी के बहाव को रोकते हुए तत्काल प्रभाव से आईसीयू की सफाई शुरू करवाई. खुद एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ दीपक माहेश्वरी, अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी और ट्रोमा प्रभारी डॉ बीएल यादव ने मोर्चा संभाला, जिसके चलते संभवतया कल तक आईसीयू फिर से शुरू करने का दावा किया गया.

ICU जैसी संवेदनशील जगह से कनेक्ट "पाइप लाइन" !
-SMS ट्रोमा सेन्टर के आईसीयू में एकबार फिर व्यवस्थाएं पानी-पानी
-देर रात आईसीयू में पानी भरने से 14 गंभीर मरीजों को करना पड़ा दूसरी जगह शिफ्ट
-प्रमुख चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़ ने आईसीयू में पहुंचकर किया मौका मुआयना
-तो पता चला कि जहां बना हुआ है आईसीयू, वहां पहले थे ट्रोमा सेन्टर के कोटेज
-आश्चर्य की बात ये कि आईसीयू बनाते वक्त जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान
-और पानी की मुख्य लाइन को हटाने के बजाय ICU में ही कर दिया वाल्व लगाकर "डेड एण्ड"
-इसके साथ ही पानी की लाइन को छिपाने के लिए दीवार पर लगा दी गई पीवीसी शीट
-इसी "वाल्व" के गलने से हुआ बड़ा लिकेज, आईसीयू में प्रेशर के साथ आने लगा पानी
-देखते ही देखते पूरे आईसीयू में भरा पानी तो आनन-फानन में शिफ्ट करने पड़े मरीज
-लेकिन इस घटना  ने एकबार फिर पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल
-सवाल ये कि आखिर आईसीयू बनाते वक्त ऐसे स्थिति के बारे में क्यों नहीं किया जाता विचार
-क्या मरीजों की इस तरह की दिक्कतों के बाद ही जागने को मजबूत होगा प्रशासन ?

आईसीयू जैसी संवेदनशील जगह पर पानी भरने की घटना की जानकारी मिलते ही प्रमुख चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड भी आज एसएमएस अस्पताल पहुंची. राठौड़ ने आईसीयू, इमरजेंसी समेत अन्य जगहों का दौरा किया और अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को लेकर जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने मेंटीनेंस और कबाड़ को लेकर नाराजगी भी जाहिर की, साथ ही पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को निर्देश दिए कि इस तरह के गंभीर प्रकरणों में संवेदनशीलता बरते. पेयजल, बिजली समेत अन्य लाइनों की जगहों को चिन्हित करते हुए ब्लू प्रिंट तैयार किया जाए. इन जगहों की समय-समय जांच हो, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके.