जयपुरः प्रदेश के परिवहन विभाग में सामने आए बहुचर्चित “3 डिजिट नंबर घोटाले” की जांच अब स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप से करवाई जाएगी . विभाग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच SOG को सौंपने के लिए उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा को प्रस्ताव भेजा है. उपमुख्यमंत्री की अनुमति मिलने के बाद यह मामला SOG को भेजा जाएगा.
परिवहन विभाग की आंतरिक रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण को करीब 500 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला बताया गया है. रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि वीआईपी या विशेष श्रेणी के तीन अंकों (3 डिजिट) वाले वाहन नंबरों के आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं. आरोप है कि इन विशेष नंबरों को नियमों के विपरीत तरीके से आवंटित किया गया और इसके बदले भारी रकम ली गई.दरअसल, प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस मामले को लेकर अलग-अलग पुलिस थानों में कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. अलग-अलग जगहों पर जांच होने से पूरे नेटवर्क और पैटर्न का खुलासा करने में कठिनाई आ रही है. इसी कारण परिवहन विभाग ने निर्णय लिया कि मामले की जांच किसी एक एजेंसी से कराई जाए. इसी क्रम में SOG को जांच सौंपने का प्रस्ताव तैयार कर डिप्टी सीएम को भेजा गया है.परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि SOG के पास साइबर, वित्तीय लेन-देन और संगठित अपराध की जांच का अनुभव है, जिससे इस घोटाले के पीछे काम कर रहे पूरे गिरोह, दलालों और संभावित अधिकारियों की भूमिका का खुलासा हो सकेगा. साथ ही विभिन्न जिलों में दर्ज मुकदमों को एकीकृत कर एक समग्र जांच की जा सकेगी.प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में वाहन मालिकों को कथित तौर पर विशेष या पसंदीदा तीन अंकों के नंबर दिलाने के नाम पर अवैध वसूली की गई. कुछ मामलों में नियमों के विपरीत तरीके से नंबर आवंटित करने और रिकॉर्ड में हेरफेर की भी आशंका जताई गई है. यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो कई अधिकारी-कर्मचारी और बिचौलिए जांच के दायरे में आ सकते हैं.
परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में फैले इस कथित घोटाले की राशि लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो इसे विभाग के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक बना सकता है. इसी वजह से सरकार भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच कराने के पक्ष में दिखाई दे रही है. अब सबकी निगाहें उपमुख्यमंत्री बैरवा की मंजूरी पर टिकी हैं. उनकी अनुमति मिलते ही मामला औपचारिक रूप से SOG को सौंप दिया जाएगा. इसके बाद एजेंसी पूरे प्रदेश में दर्ज मामलों, दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर घोटाले के असली मास्टरमाइंड और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी.