VIDEO: दिल्ली और जयपुर के बीच अलवर बनेगा आधुनिक ई-बस हब, जल्द दौड़ेंगी 50 ई-बसें, देखिए ये खास रिपोर्ट

अलवर: दिल्ली और जयपुर के बीच बसा अलवर भौगोलिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण शहर बनकर उभर रहा है. दोनों राजधानियों से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर बसे अलवर की कनेक्टिविटी लगातार मजबूत हो रही है. लेकिन शहर के के लोगों के लिए अभी बड़ी सौगात मिलने जा रही है. करीब एक माह बाद अलवर को ई-बस सेवा शुरू की जाएगी, जिसमें 50 ई बसें मिलने वाली हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है. केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के विजन से अलवर का स्वरूप बदल रहा है. जल्दी ही बड़े शहरों की तरह अलवर में वातानुकूलित ई बसें चलती दिखेंगी और स्थानीय लोगों के लिए परिवहन का एक सुगम साधन होगा.  

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अलवर से करीब 143 किलोमीटर दूर है, वहीं जयपुर एयरपोर्ट भी 150 किमी दूरी पर स्थित है. परिवहन के क्षेत्र में अलवर तेजी से विकास कर रहा है. दिल्ली से बहरोड़ होते हुए अलवर तक मेट्रो विस्तार होना है जिसने लोगों की उम्मीदें बढ़ाई हैं. शहर में पहले से रेलवे स्टेशन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे दिल्ली, जयपुर सहित कई बड़े शहरों से रेल संपर्क बना हुआ है. सड़क परिवहन की बात करें तो अलवर में दो बस डिपो हैं राजस्थान रोडवेज के मत्स्य आगार और अलवर आगार की बसें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं. इसके साथ ही राजस्थान लोक परिवहन सेवा की बसें भी यात्रियों को सुविधा प्रदान कर रही हैं.

शहर के भीतर आवागमन के लिए ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा बड़ी संख्या में संचालित हैं, जो लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. अलवर जिले में विकसित औद्योगिक क्षेत्रों के कारण यहां बड़ी संख्या में कंपनियों की बसें भी संचालित होती हैं, जो कर्मचारियों को कार्यस्थल तक लाने और ले जाने का कार्य करती हैं. वहीं स्कूली बच्चों के लिए निजी और संस्थागत स्कूल वाहनों की व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित हो रही है. सरकार द्वारा विकसित किये जा रहे एक्सप्रेस वे भी क्षेत्र की सूरत बदल रहे हैं.

इसी क्रम में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू की गई पीएम ई-बस सेवा योजना अलवर जैसे शहरों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है. इस योजना का उद्देश्य शहरों में आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और सुगम सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है. इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि आमजन को सुरक्षित, सस्ती और बेहतर यातायात सुविधा भी मिल सकेगी.

अलवर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए यह योजना शहरी परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है. एनसीआर में अलवर सबसे तेज उभरता क्षेत्र बन रहा है. अलवर शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर ई बसों के लिए डिपो बनकर तैयार हो रहा है जहां अलवर में पहले फेजड में मिलने वाली 50 बसों का चार्जिंग स्टेशन भी होगा. अलवर नगर निगम ने रूट से लेकर किराये तक की तैयारी शुरु कर दी है. आगामी जून माह में अलवर में बसों का आना शुरु होगा.

अलवर रामगढ़ नेशनल हाइवे पर बन रहे इस चार्जिंग स्टेशन का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है देखिये एक नजर में क्या रहेगी योजना-

अलवर को पहले फेज में 50 ई बसें मिलेंगी:
-बहाला में 13000 वर्गमीटर जमीन में चार्जिंग स्टेश डिपो बन रहा है
-यहां बसों के लिए चार्जिंग, वर्कशॉप, पार्किंग, पैनल रुम, एडमिन ब्लॉक बनकर तैयार हो रहा है
-चार्जिंग के लिए स्पेशल जीएसएस बनाया गया है
-दस करोड़ से ज्यादा की लागत से सुविधा मिलेगी
-रुडसिको की ओर से निर्माण कार्य हो रहा है
-निजी कम्पनी रखरखाव और नगर निगम की ओर से बसों का संचालन होगा
-नगर निगम किराया राशि का निर्धारण करेगी

अलवर शहर के नजदीकी शहरों को ई बसों से जोड़ने का प्लान है. जिसमें रामगढ़, चिकानी, मालाखेडा़ और उमरैण , सिलीसेढ़ के क्षेत्र हैं. अलवर शहर के मुख्य मार्गों पर 9 मीटर लम्बी बसें चलेंगी. स्कूली छात्रों और कम्पनी में जाने वाले कामगारों को भी फायदा होगा.