VIDEO: भील प्रदेश की मांग... बीजेपी ने सिरे से नकारा, मदन राठौड़ बोले- सपने देखने का सबको हक, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: भील प्रदेश की मांग ने फिर जोर पकड़ा है. इसके पीछे कारण है भारतीय आदिवासी पार्टी, राजनीतिक ताकत बनते ही BAP ने भील प्रदेश की मुहिम छेड़ दी है. डूंगरपुर बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत की मांग को बीजेपी ने सिरे से नकार दिया और इसे सियासी स्टंट करार दिया.

जब महाराणा प्रताप ने मुगलों के खिलाफ राजस्थान में स्वराज की अलख जगाई और मेवाड़ की रक्षा के लिए जंग लड़ी उस ऐतिहासिक हल्दी घाटी की लड़ाई में राणा पूंजा की अगुवाई में भील सेना ने मुगल सेना के छक्के छुड़ा दिए थे. इस युद्ध के बाद ही भील सरदार पूंजा को महाराणा प्रताप ने राणा की उपाधि दी. बांसिया भील ने बांसवाडा की स्थापना की थी. 1515 में मकर संक्रांति के दिन अमरथून से निकल कर अपने भाई बहनों के साथ जंगल में पेड़ों को काटकर बांसवाड़ा बसाया था. वनवासी अंचल में रहने वालों ने इस गौरवशाली इतिहास के सालों बाद एक और लड़ाई लड़ी और ये थी भारत की आजादी के लिए. क्रांतिकारी और समाज सुधारक गोविंद गुरु के नेतृत्व में 17नवम्बर 1913 को मानगढ़ पर हजारों आदिवासियों ने अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लिया था. मानगढ़ से ही सबसे पहले भील राज्य की मांग बुलंद हुई थी ..भील समाज सुधारक गोविंद गुरु ने साल 1913 में मानगढ़ नरसंहार के बाद सबसे पहले आदिवासियों के लिये अलग राज्य की मांग उठाई थी. इसके बाद  भारतीय आदिवासी पार्टी ने भी मानगढ़ की धरती से भील प्रदेश की मांग को उठाया था. अब भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने भील प्रदेश का नक्शा जारी करके मांग को फिर चर्चा में ला दिया.

-- भील प्रदेश की मांग के पीछे तथ्य --
-चार राज्यों के करीब 49 जिलों को मिलाकर भील प्रदेश को मान्यता दी जाए
-इन भील आदिवासी बहुल ज़िलों में गुजरात के 16, राजस्थान के 10, मध्य प्रदेश के 7 और महाराष्ट्र के 6 ज़िलों को शामिल किया जाए
-राजस्थान के जिले -
-बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बाड़मेर, जालोर, सिरोही, उदयपुर, झालावाड़, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, कोटा, बारां, पाली
 -मध्यप्रदेश के जिले -इंदौर, गुना, शिवपुरी, मंदसौर, नीमच, रतलाम, धार, देवास, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, बड़वानी, अलीराजपुर।
-गुजरात के जिले -- अरवल्ली, महीसागर, दाहोद, पंचमहल, सूरत, बड़ोदरा, तापी, नवसारी, छोटा उदेपुर, नर्मदा, साबरकांठा, बनासकांठा, भरूच, वलसाड़
-महाराष्ट्र के जिले -- नासिक, ठाणे, जलगांव, धुले, पालघर, नंदुरबार
- राजकुमार रोत ने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया
-जीत के बाद उन्होंने इसे संसद में भी उठाया
-प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान भी आदिवासी क्षेत्र की समस्याओ को उठाया
-राजस्थान विधानसभा में BAP विधायकों उमेश मीणा और थावरचंद डामोर ने भील प्रदेश की मांग को टी-शर्ट पहनकर समर्थन दिया
शपथ लेते वक्त भी BAP विधायकों ने भील प्रदेश की जयकारे लगाए थे
- राजकुमार रोत ने लोकसभा में नियम 377 के तहत सदन में भील प्रदेश को लेकर चर्चा की मांग की

भारतीय आदिवासी पार्टी और राजकुमार रोत के तर्क है कि भील प्रदेश बनने से ही आदिवासियों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, और पेयजल-सिंचाई जैसी समस्याओं का समाधान होगा. साथ ही पांचवीं और छठी अनुसूची लागू करने की मांग भी इसमें शामिल है अलबत्ता राजस्थान की बीजेपी नेता और मंत्री भी साफ कह चुके  जातिगत आधार पर राज्य गठन संभव नहीं है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मांग को सिरे से नकार दिया और कहा कि सपने देखने का हक सबको लेकिन जाति के आधार राज्य के निर्माण के हम पक्ष में नहीं.

चार राज्यों में करीब तीन करोड़ भील निवास करते है. मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के करीब 49 जिलों में निवास करते हैं. इनकी संख्या मध्यप्रदेश में करीब 21 प्रतिशत, गुजरात में 14.8 प्रतिशत, राजस्थान में 13.48 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 9.35 प्रतिशत हैं. आदिवासी वोटो के दम पर भारतीय आदिवासी पार्टी ने वागड़ में ताकत दिखा दी है. डूंगरपुर बांसवाड़ा लोकसभा सीट से राजकुमार रोत ने महेंद्र जीत मालवीय को हराकर सनसनी पैदा की और सांसद बन गए. विधानसभा में आसपुर सीट से उमेश मीणा, धरियावाद से थावर चंद मीना, चौरासी से अमित कटारा, और बागीदौरा से जयकृष्ण पटेल ने कदम रखा. हालांकि भ्रष्ट्राचार मामले में जयकृष्ण पटेल आरोपों से घिरे है..बीजेपी के आदिवासी नेता और राज्यसभा सांसद चुन्नी लाल गरासिया ने कहा कि राजकुमार रोत राजनीतिक स्टंट कर रहे आदिवासियों की भावनाओं से खेल रहे वे अगला चुनाव तक नहीं जीतेंगे.

राजस्थान की राजनीति के मिजाज में मेवाड़-वागड़ की अलग पहचान है. ऐसा कहा जाता है यहां से जिस पार्टी की चुनावी आंधी चलती है उसी को राजस्थान पर राज करने का अवसर मिलता है. फिलहाल भारतीय आदिवासी पार्टी यहां सियासी ताकत बन चुकी.