जयपुर : प्रदेश में 3200 मेगावाट बिजली खरीद के बहुचर्चिंत प्रकरण में आखिरकार राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग से हरी झण्डी मिल गई है. आयोग ने अपने पूर्व के आदेश पर “यू-टर्न” लेते हुए याचिकाकर्ता राजस्थान ऊर्जा विकास एवं आईटी सेवाएं लिमिटेड यानी RUVITL को बिजली खरीद के लिए सशर्त मंजूरी दी है. हालांकि,विनियामक आयोग ने आदेश में जिस तरह के राइडर लगाए है, उसको देखते हुए बिजली कम्पनियों को अपने पावर परर्चेज के पूर्व के ज्वाइंट वेंचर और अन्य एग्रीमेंट की फिर से समीक्षा करनी होगी.
3200 मेगावाट बिजली खरीद के प्रकरण में फैसला सुनाते हुए राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने प्रदेश में वर्ष 2035-36 तक 4440 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पर मुहर लगाई है. हालांकि,फैसले में आयोग ने कहा है कि यदि पहले से तय बिजली खरीद क्षमताओं को आंशिक या पूर्ण रूप से निरस्त किया जाता है, तो डिस्कॉम भविष्य की जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त लॉंगटर्म बिजली खरीद पर निर्णय ले सकेंगे. हालांकि, इसके लिए विस्तृत आंकलन और उपभोक्ता हित को प्राथमिकता देना जरूरी होगा. आयोग ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के 27 नवंबर 2025 के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए किस स्रोत से बिजली खरीदेंगे, इसका अंतिम निर्णय डिस्कॉम का होगा. वे चाहे तो अनुबंध कर बिजली खरीदें या फिर टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाएं, लेकिन निर्णय लेते समय लागत और उपभोक्ता हित का ध्यान रखना होगा.
आखिर क्या है पूरा प्रकरण
- बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए राजस्थान ऊर्जा विकास निगम ने याचिका दायर की थी
- 3200 मेगावाट बिजली खरीद के लिए टैरिफ बेस्ड कॉम्पटेटिव बिडिंग प्रक्रिया की अनुमति के लिए दायर की थी याचिका
- आयोग ने याचिका को नवम्बर 2025 में कहते हुए खारिज किया कि निगम और केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के डेटा अलग है
- याचिका में निगम ने 2031-32 तक 3200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की दिखाई थी जरूरत
- जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान 2025 की रिपोर्ट में है दूसरे तथ्य
- रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान को 2035-36 तक 1905 मेगावाट की जताई गई है आश्यकता
- ऐसे में आयोग ने फैसले में प्रस्तावित बिजली डिमाण्ड के फिर से आंकलन की जताई थी जरूरत
- याचिका में निगम ने निजी क्षेत्र से लॉग टर्म में 25 साल के लिए पावर परर्चेज करने की मांगी थी अनुमति
- जिसे इस तर्क के आधार पर खारिज किया गया कि सोलर-बेटरी प्लांट की दरों में लगाातार आ रही कमी
- मौजूदा आंकलन देखे तो इन प्लांटस से औसत रेंट 4.5 रुपए प्रति यूनिट तक आने की है उम्मीद
- जबकि महंगे कोयले के चलते थर्मल पावर प्लांट से उत्पन्न बिजली के लगातार बढ़ रहे दाम
- ऐसे में निगम के प्रस्ताव को अनुमति देने से जनता पर महंगी बिजली के भार की जताई गई थी आशंका
आदेश में कहा गया कि यदि वर्तमान में प्रस्तावित या तय बिजली खरीद क्षमताओं को पूरी तरह या आंशिक रूप से समाप्त किया जाता है, तो अतिरिक्त दीर्घकालिक बिजली जरूरत का दोबारा आकलन किया जाएगा. उस समय यह देखा जाएगा कि राजस्थान को वास्तव में कितनी अतिरिक्त बिजली चाहिए. इसके लिए परमाणु बिजली परियोजनाओं की स्थिति, पुराने थर्मल पावर प्लांट की हालत, वे पीक समय में कितनी बिजली दे सकते हैं और अन्य तकनीकी पहलुओं का भी अध्ययन किया जाएगा. आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी आकलन को पहले संबंधित निगम के निदेशक मंडल और उसके बाद राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी.
आयोग के ताजा फैसले के मायने
3200 मेगावाट के लिए पूर्व के फैसले होंगे 'RE-EXAMINE?
प्रदेश में बिजली खरीद के बहुचर्चित प्रकरण में RERC का फैसला
RUVITL की पुर्नयाचिक पर आयोग ने CEA के पत्र का हवाला देते हुए दी मंजूरी
प्रदेश में वर्ष 2035-36 तक 4440 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पर लगाई मुहर
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2035-36 तक राजस्थान को होगी जरूरत
करीब 4440 मेगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित बिजली की जरूरत का है आंकलन
इसमें से 2535 मेगावाट क्षमता पहले से प्रस्तावित है,जिसमें 1320 मेगावाट छबड़ा,
800 मेगावाट कालीसिंध,140 मेगावाट खुर्जा,125 मेगावाट गुढा और 150 मेगावाट सिंगरौली शामिल है
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निगम की पूर्व के प्रस्तावित प्लांट को लेकर है जो प्लानिंग
'उनसे मिलने वाली बिजली को ध्यान में रखते हुए ही शेष जरूरत पर की जाए प्लानिंग
ऐसे में अब बिजली कम्पनियों के सामने एक नया फैसला करने की भी रहेगी दरकार
फैसला ये कि यदि 25 साल के लिए 3200 मेगावाट की बिजली खरीद को दी जाती है मंजूरी
तो उसकी एवज में पूर्व की प्लानिंग में से किन-किन प्रोजेक्टस को किया जाएगा ड्रॉप