VIDEO: जहर का अब फास्ट ट्रीटमेंट ! SMS अस्पताल में तैयार हुई राजस्थान की पहली अत्याधुनिक टॉक्सिकोलॉजी लैब, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में "जहर" से पीडित होकर आने वाले मरीजों का अब लक्षण नहीं, बल्कि साइंटिफिक जांच के आधार पर इलाज होगा.इसके लिए अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक टॉक्सिकोलॉजी लैब बनकर तैयार हो गई है, जिसका जल्द ही शुभारम्भ होगा.करीब एक करोड़ रुपए से अधिक लागत से तैयार इस आधुनिक लैब में त्वरित जांच के जरिए ये पता लगाया जा सकेगा कि मरीज के शरीर में कैसा जहर है और कितनी मात्रा में है. इस रिपोर्ट से चिकित्सकों को उस मरीज के सटीक इलाज में मदद मिलेगी. आखिर इस अत्याधुनिक लैब की क्यों थी जरूरत और मरीजों को कैसे फायदा मिलेगा. 

दरअसल, अभी तक किसी भी तरह के जहर खाने, ड्रग्स के सेवन या सर्पदंश के मामलों में चिकित्सकों को मरीज के लक्षण और परिजनों की जानकारी के आधार पर इलाज शुरू करना पड़ता था, लेकिन कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है, जब मरीज बेहोश हालत में ही अस्पताल लाया जाता है.इस दौरान ना तो मरीज कुछ बताने की स्थिति में होता है और न ही परिजन कोई जानकारी दे पाते है.ऐसे में कई बार अनुमान लगाने के चक्कर में इलाज में देरी हो जाती है, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ जाती है.इस तरह के बढ़ते मामलों को देखते हुए एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अत्याधुनिक टॉक्सिकोलॉजी लैब की मंजूरी दी थी, जो अब बनकर तैयार हो गई है.चिकित्सकों की माने तो लैब के जरिए मरीज के ब्लड और यूरिन सैंपल से तुरंत पता चल सकेगा कि शरीर में किस तरह का जहर कितनी मात्रा में फैला है.इसके साथ ही सर्पदंश के मामलों में ये भी पता लग सकेगा कि किस प्रजाति के सांप ने मरीज को काटा है. इससे चिकित्सक बिना समय गंवाए सही दवा और एंटीवेनम दे सकेंगे.

बरसात के सीजन में सर्पदंश के हर माह आते 500 मरीज:
-प्रदेश की पहली अत्याधुनिक टॉक्सिकोलॉजी लैब से जुड़ी खबर
-चिकित्सकों के मुताबिक दवाओं के ओवरडोज, ड्रग्स के सेवन के अलावा
-सर्पदंश से पीड़ित मरीजों के त्वरित ट्रीटमेंट के लिए लैब होगी कारगर
-आमदिनों में अकेले सर्पदंश के तीन-चार केस आते है एसएमएस अस्पताल
-जबकि मानसून की बात की जाए तो ये आंकड़ा रोजाना 25 से 30 तक पहुंचता है
-यानी एक माह में 500 से 600 मरीज अकेले सर्पदंश से पीड़ित होकर पहुंचते है अस्पताल
-लैब के शुरू होने से एक तरफ जहां ऐसे मरीजों का तत्काल शुरू हो सकेगा सटिक इलाज
-साथ ही इलाज के बाद मरीज की स्थिति और जहर के असर की भी डे-टू-डे मिल सकेगी जानकारी

एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन की माने तो लैब के लिए सभी जरूरी मशीनें खरीदी जा चुकी है.इन मशीनों का इंट्रालेशन काम युद्ध स्तर पर जारी है.संभवतया एक सप्ताह में ये काम पूरा हो जाएगा, जिसके बाद प्रदेश की पहली टॉक्सिकोलॉजी लैब मरीजों की सेवा के लिए शुरू होगी.लैब को शुरू करने में एचओडी डॉ. एन.एल. डिसानिया के अलावा अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व एचओडी डॉ. डीके शर्मा, डॉ. दीपाली पाठक और डॉ. प्रियंका शर्मा की माने तो टॉक्सिकोलॉजी लैब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होगी। अब जहर से पीड़ित मरीजों का इलाज अंदाजे पर नहीं, बल्कि साइंटिफिक जांच और फास्ट रिपोर्ट पर आधारित होगा. इस लैब के शुरू होने से सर्पदंश समेत अन्य प्रकरणों में मौतों में कमी आने की भी उम्मीद है.