नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कोई आम बात नहीं है. करीब 4 दशक बाद लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है. यह पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स और इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.
स्पीकर किसी दल के नहीं होते. विपक्ष ने स्पीकर पर सवाल खड़े किए हैं. संसदीय राजनीति के लिए अफसोसजनक पल है. स्पीकर की नियुक्ति में दोनों दल के नेता साथ थे. स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाए गए हैं. स्पीकर के निर्णय को लोकसभा में अंतिम माना जाता है.
स्पीकर का पद पार्टी से ऊपर है. स्पीकर किसी दल के नहीं होते, सदन के होते हैं. संविधान में स्पीकर का पद मध्यस्थ के तौर पर होता है. संविधान ने स्पीकर को मीडिएटर की भूमिका दी है. आप मीडिएटर पर शक करते हैं. 75 सालों में दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को 'पाताल' से भी गहरा बना दिया है. विपक्ष ने उस गहरी नींव की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाया है.
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का जवाब
-स्पीकर किसी दल के नहीं होतेः अमित शाह
-विपक्ष ने स्पीकर पर सवाल खड़े किएः अमित शाह
-संसदीय राजनीति के लिए अफसोसजनक पलः अमित शाह
-स्पीकर की नियुक्ति में दोनों दल के नेता साथ थेः अमित शाह
-स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाए गएः अमित शाह
-स्पीकर के निर्णय को लोकसभा में अंतिम माना जाता हैः अमित शाह
-स्पीकर का पद पार्टी से ऊपर हैः अमित शाह
-स्पीकर किसी दल के नहीं होते, सदन के होते हैंः अमित शाह
-संविधान में स्पीकर का पद मध्यस्थ के तौर पर होता हैः अमित शाह