VIDEO: सरकारी अस्पतालों में गोल्डन ऑवर में मिलेगा तत्काल उपचार ! भजनलाल सरकार के "जनहितैषी कदम" पर चिकित्सा विभाग के आदेश

जयपुर: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में अब किसी भी इमरजेंसी के दौरान देशभर के मरीज को तत्काल इलाज मिलेगा.मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर चिकित्सा विभाग ने सभी अस्पतालों में दुर्घटना या आपात स्थिति में भुगतान समेत किसी भी तरह की औपचारिकता के बजाय तत्काल इलाज करने के लिए एसओपी जारी की है.इस एसओपी के तहत ऐसे मरीजों के इलाज में होने वाले खर्च को अस्पताल मा योजना एवं अन्य बीमा योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि में से समायोजित कर सकेंगे.आखिर क्या है

दरअसल, प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में राजस्थान के निवासियों को मा योजना एवं अन्य बीमा योजनाओं के तहत फ्री इलाज की सुविधा है.जबकि दूसरे राज्य का कोई व्यक्ति राजस्थान में इमरजेंसी के दौरान अस्पताल पहुंचे, तो उसे इलाज के लिए तय शुल्क देने का प्रावधान है.कई बार ऐसी स्थित बन जाती है, जब दूसरे राज्यों के मरीज और उनके परिजन इमरजेंसी के दौरान भुगतान करने जैसी स्थित में नहीं होते है.ऐसे में मरीज और उनके परिजन अस्पतालों में इलाज के लिए इधर से उधर भटकने को मजबूर होते है.

पिछले दिनों एसएमएस अस्पताल में कुछ प्रकरण सामने आए, जिसके बाद सूबे के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि मानवीयता के आधार पर ऐसे प्रकरणों को देखा जाए.ऐसे में अब चिकित्सा विभाग ने दुर्घटना, ट्रोमा/पोलीट्रोमा बर्न केसेज, हार्ट अटैक, स्नैक बाइट, एनिमल बाईट, ऑबस्टेट्रिक इमरजेंसी, जहर के सेवन समेत "लाइफ थ्रेटनिंग" जैसे प्रकरणों को लेकर नई व्यवस्था लागू की है.इस व्यवस्था के तहत यदि दूसरे राज्यों के मरीज भी अस्पताल में आते है तो पेमेंट, रजिस्ट्रेशन, पुलिस रिपोर्ट या कोई अन्य औपचारिकता के बजाय सीधे इलाज करने के निर्देश दिए गए है.

"राहत" की एसओपी:
-सभी अस्पतालों में 24X7 इमरजेंसी, ट्राइएज सिस्टम और तुरंत इलाज की होनी चाहिए सुविधा
-सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए SOP में कहा गया है कि किसी मरीज का पेमेंट,
-रजिस्ट्रेशन, पुलिस रिपोर्ट, या कोई अन्य औपचारिकता के अभाव में इलाज से इनकार नहीं किया जाए
-फिर चाहे वो राजस्थान के बाहर का निवासी ही हो, उसका तत्काल शुरू किया जाए उपचार
-"लाइफ थ्रेटनिंग" के प्रकरणों को रेड जोन में रखा जाए, जिसमें इलाज में कोई भी देरी न हो
-मेडिको लीगर केस में पुलिस को सूचना दी जाए, लेकिन इस दरमियान इलाज न रोका जाए
-गंभीर श्रेणी के ऐसे प्रकरणों में यदि जरूरी हो तो एमएलसी बाद में दर्ज की जा सकती है
-अस्पताल में सभी जगहों पर सिटीजन चार्जर या पोस्टर लगाए, जिसमें इमरजेंसी की पूर्ण जानकारी हो

चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड ने इन व्यवस्था को लेकर सभी राजकीय, राजमेश के मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, अधीक्षक, आरयूएचएस के कुलसचिव, सभी सीएचएचओ और पीएमओ के लिए विस्तृत एसओपी जारी की है.इस एसओपी में ये भी सुझाव दिया गया कि किसी भी तरह में व्यवस्था का दुरूपयोग नहीं हो, इसके लिए संस्थान प्रधान अपने लेवल पर मैकेनिज्म तैयार करें.