वर्ष 2025 के लिए टॉप 25 ब्यूरोक्रेट्स की सूची जारी, राजस्थान के CS वी. श्रीनिवास को मिला दूसरा स्थान, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः CS V श्रीनिवास को देश के टॉप 25 ब्यूरोक्रेट्स में दूसरा स्थान मिला है. वेबसाइट ब्यूरोक्रेट्स इंडिया ने देश भर के चेंजमेकर्स को अपनी विशेषज्ञ संपादकीय टीम के जरिए चयनित किया है. ब्यूरोक्रेसी जगत में इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. 

ब्यूरोक्रेट्स इंडिया ने देश के उन 25 ब्यूरोक्रेट्स की सूची बनाई है जिन्होंने अपने नेतृत्व और प्रतिबद्धता के जरिए 2025 में देश के विकास में अहम भूमिका निभाई है.

प्रतिष्ठित वेबसाइट ब्यूरोक्रेट्स इंडिया के अनुसार देश के 25 चयनित वे ब्यूरोक्रेट्स हैं जिन्होंने संस्थाओं को मजबूती देने,सर्विस डिलीवरी में सुधार और धरातल में सार्थक बदलाव किया है.

यह चयन प्रज्ञा लाल, विज्ञा द्विवेदी, पूजा राय, नैना झा, अपर्णा वत्स और वृद्धि भाटिया की संपादकीय टीम ने किया है. यह चयन ब्यूरोक्रेट्स के प्रदर्शन, अखंडता, नीतिगत प्रभाव और नवाचार के प्रति समर्पण के आधार पर किया गया है.

विक्रम मिस्री
जनवरी 2022 से जून 2024 तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्यरत रहे विक्रम मिस्त्री इस सूची में पहले स्थान पर आते हैं. अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद संचालित ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विक्रम मिस्री आधिकारिक संचार का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे. उन्होंने नियमित रूप से मीडिया को जानकारी दी और राष्ट्र को आश्वस्त किया. संवेदनशील कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों को उन्होंने स्पष्टता, संतुलन और परिपक्वता के साथ प्रस्तुत किया.

वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव, राजस्थान
सूची में दूसरे स्थान पर आने वाले राजस्थान कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी वी. श्रीनिवास ने नवंबर 2025 में राजस्थान के मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण किया. तीन दशकों से अधिक के प्रशासनिक अनुभव के साथ वे सुशासन सुधारों, डिजिटल परिवर्तन और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के लिए जाने जाते हैं. भारत सरकार में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के सचिव के रूप में उन्होंने CPGRAMS शिकायत निवारण प्रणाली को सुदृढ़ किया और मंत्रालयों में सेवा वितरण का आधुनिकीकरण किया.
वर्ष 2019 से 2025 के बीच 1.15 करोड़ से अधिक जनशिकायतों का निस्तारण किया गया. शिकायत निवारण की औसत समय-सीमा 2022 में 28 दिनों से घटकर जुलाई 2025 में 16 दिन रह गई.
मुख्य सचिव, राजस्थान के रूप में उन्होंने डेटा-आधारित शासन, पीएम-कुसुम के तहत ऊर्जा सुधारों तथा “विकसित राजस्थान 2047” रोडमैप पर विशेष जोर दिया है. उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (2025–2028) का अध्यक्ष चुना गया, जो उनके प्रशासनिक नेतृत्व की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है.

हरमीत सिंह, पुलिस महानिदेशक, असम
असम–मेघालय कैडर के 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हरमीत सिंह मई 2025 में डीजीपी असम का कार्यभार संभालने के बाद से तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को आगे बढ़ा रहे हैं. वे इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं. आतंकवाद-रोधी कार्य, साइबर सुरक्षा और डी-रेडिकलाइजेशन में उनकी गहरी विशेषज्ञता ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है.
असम की अपराध दर 2020 में 349.5 से घटकर 2025 में 121.5 और जनवरी 2026 में 101.9 रह गई.
नवाचारों के लिए पहचाने जाने वाले सिंह ने असम पुलिस सोशल मीडिया सेंटर और ‘शिशु मित्र कार्यक्रम’ जैसी पहलें शुरू कीं. असम पुलिस का न्यू ईयर पार्टी सोशल मीडिया अभियान व्यापक रूप से सराहा गया. वे पूर्व में गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं और उन्हें अनेक वीरता और सेवा पुरस्कार प्राप्त हुए हैं.

एन. मुरुगानंदम, मुख्य सचिव, तमिलनाडु
1991 बैच के आईएएस अधिकारी एन. मुरुगानंदम तमिलनाडु के 50 वें मुख्य सचिव हैं और इस सूची में 5 वें स्थान पर हैं. उन्होंने कोयंबटूर, करूर और चेन्नई जैसे प्रमुख जिलों में जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया और उद्योग और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया.
वित्त सचिव के रूप में उन्होंने महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं और उच्च शिक्षा कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई. सहयोगात्मक शासन और रणनीतिक दृष्टि के लिए वे विशेष रूप से जाने जाते हैं.

टीसीए कल्याणी, नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CGA)
1991 बैच की भारतीय सिविल लेखा सेवा अधिकारी टीसीए कल्याणी ने भारत की 29वीं नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CGA) के रूप में कार्यभार संभाला. वे इस सूची में 7 वें स्थान पर हैं.
उन्होंने उर्वरक सब्सिडी हेतु प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे किसानों तक पारदर्शी लाभ पहुंचा और लीकेज में कमी आई.
CGA के रूप में वे भारत सरकार के लेखा-जोखा, केंद्रीय खातों की तैयारी और भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ समन्वय कर सार्वजनिक वित्त प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही हैं. 

यह सूची इसलिए भी अहम है कि शासन व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी नौकरशाही नीतियों को कार्य रूप में बदलती तो है लेकिन लाइमलाइट से दूर नेपथ्य में रहती है. इसके उलट ये अधिकारी आम आदमी की जिंदगी से लेकर देश में हो रहे अहम बदलाव करते हैं.