जयपुर : भजनलाल सरकार ने प्रदेश के नीति निर्माण से जुड़े बड़े विभाग प्लानिंग की री स्ट्रक्चरिंग की है. इसके जरिये प्रदेश के नीति निर्माण और कार्यक्रम क्रियान्वयन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है तो वहीं कर्मचारियों-अधिकारियों के बड़े मानव संसाधन का युक्तिसंगत उपयोग सुनिश्चित भी किया है.
नेपथ्य में रहकर सरकार की तमाम नीति को बनाने के साथ फील्ड में क्रियान्विति और उद्घाटन,शिलान्यास से लेकर सरकार के अन्य कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने में अहम योगदान देने वाले आयोजना विभाग की लंबे समय बाद री स्ट्रक्चरिंग की गई है.
री-स्ट्रक्चरिंग की झलकियां
आयोजना विभाग 7 ग्रुपों में विभाजित था. इनमें पहला ग्रुप संस्थापन,दूसरा समन्वय या कोर्डिनेशन,तीसरा मॉनिटरिंग,चौथा पंचवर्षीय योजना व विजन,पांचवां वार्षिक योजना,छठा स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़े काम और सातवां ग्रुप जनशक्ति था.
अब केन्द्र में जिस तरह नीति का गठन किया गया उसी तर्ज पर सरकार ने पंचवर्षीय योजना,वार्षिक योजना और जनशक्ति के ग्रुप का विलय कर दिया और इसे मॉनिटरिंग वाले ग्रुप से जोड़ दिया.
मॉनिटरिंग का काम हालांकि पहले से ही अहम था लेकिन अन्य तीन ग्रुप्स के विलय के बाद इसका दायित्व और बढ़ गया है.
इनमें एक अहम बदलाव मुख्यमंत्री सेवा प्रदायगी प्रकोष्ठ में बीस अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति है जिनमें आयोजना (आयोजना वित्त) विभाग के संयुक्त सचिव राजेन्द्र तंवर शामिल हैं.
वहीं राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मोशन एंड इनोवेशन-रीति को मजबूत करते हुए कार्यों का नए सिरे से आवंटन किया गया है.
रीति और प्लानिंग के अन्य अनुभागों को किया कार्य आवंटन
रीति के तहत विजम डॉकेयूमेंट बनाना,क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों से समन्वय.
रीति और कार्यसमूहों / कमेटियों की बैठकें आयोजित करना, नीति बनाने के लिए सेमीनार,सिम्पोजियम कराना.
समन्वय अनुभाग नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक कराना,अलग-अलग बैठकें,कॉन्फ्रेंस / वर्कशॉप आयोजित कराना.
समन्वय अनुभाग मुख्य सचिवों की वार्षिक कॉन्फ्रेंस से जुड़े काम देखेगा.
वहीं ग्रुप 4 एस्पिरेशनल जिलों,ब्लॉक से जुड़े काम, बेस्ट प्रेक्टिसेस और स्कीम की कनवर्जेंस से जुड़े काम देखेगा.
वहीं एक ग्रुप वित्तीय मामलों से जुड़े काम देखेगा जिसमें प्रधानमंत्री जन-धन योजना,प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना से जुड़े काम शामिल है.
यही ग्रुप स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी से जुड़े काम देखेगा और राष्ट्रीय बैंकों की ऋण माफी योजना भी इसी के तहत आती है. साथ ही नाबार्ड से जुड़ी बैठकों के निर्णय क्रियान्वयन, ग्रामीण बैंकों से जुड़े काम.
आरबीआई और अन्य बैंकों के बैंकिंग नेटवर्क मजबूत कराने से जुड़े काम भी इसी ग्रुप के तहत आते हैं.
ग्रुप 3 का काम बेहद अहम हो गया है. इसके तहत स्टेट फंड / केन्द्रीय सहायता की मासिक प्रगति रिपोर्ट सीएस को भेजने,स्कीमिटिक बजट की समीक्षा बैठक और मॉनिटरिंग, जन घोषणा पत्र क्रियान्वयन संबंधी कैबिनेट सब कमेटी बैठक, बजट,सीएम घोषणा और सीएम / सीएस समीक्षा बैठकें करना.
फ्लैगशिप स्कीम को लेकर समीक्षा बैठकें करवाना,राज्यपाल अभिभाषण, बजट भाषण की क्रियान्विति संबंधी मामले देखना, सीएमआईएस पोर्टल पर मॉनिटरिंग और प्रगति की अपडेट सुनिश्चित करवाना.
की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स से जुड़े कार्य, सीएमओ से जुड़े इवेंट और कार्यक्रम की पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग, शिलान्यास,लोकार्पण और डीबीटी आधारित योजनाओं की शुरुआत से जुड़े मामले देखना.
बजट की झलकियां बनाना,केन्द्रीय और राज्य वित्त आयोग से जुड़े काम देखेगा ग्रुप 5.
वार्षिक बजट प्लान बनाना,बजट हैड,स्टेट स्कीम की मैपिंग, केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं से जुड़े काम देखेगा ग्रुप 4
इसके साथ ही बीस सूत्रीय कार्यक्रमों से जुड़े काम अलग अनुभाग देखेगा. प्लानिंग ग्रुप 1 ए विभाग विधानसभा और संसद के सवालों से जुड़े काम देखेगा.
कोर्डिनेशन वाले ग्रुप के पास प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली प्रगति पोर्टल से जुड़ी वीसी,राज उन्नति से जुड़े काम, उत्तर क्षेत्रीय काउंसिल और स्थायी समितियों से जुड़े काम, भारत सरकार के ई समीक्षा पोर्टल को लेकर काम, अंतरराज्यीय परिषद, राज्य-केन्द्र संबंधों से जुड़े आयोग को लेकर काम, गवर्नर कॉन्फ्रेंस से जुड़े काम, आयोजना सचिव की अध्यक्षता में होने वाली प्लानिंग की बैठकों, वीआईपी विजिट के दौरान कोर्डिनेशन का काम होगा.
ग्रुप 4 नीति आयोग से जुड़े पत्राचार और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स का काम है.
बाह्य सहायता प्राप्त योजनाओं से जुड़े काम ग्रुप 2 देखेगा.
वहीं मुख्यमंत्री सेवा प्रदायगी सेल के पास मुख्यमंत्री कार्य प्रबंधन सिस्टम से जुड़े काम का दायित्व है.
इस पुनर्गठन से कम अनुभागों में उपलब्ध अधिकारियों और कर्मचारियों में काम का युक्तिसंगत वितरण संभव हो पाया है. यह पुनर्गठन मुख्य सचिव की कार्यालयों में युक्तिसंगत प्रबंधन की सोच के तहत एसीएस मुख्यमंत्री अखिल अरोड़ा के मार्गदर्शन में किया गया है.