VIDEO: पुलिसिंग में गुणवत्ता सुधार और बेहतर परिणाम के लिए बड़ा कदम, अनुसंधान और कानून-व्यवस्था को अलग करने पर विचार, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान पुलिस में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव करने की तैयारी की जा रही है. पुलिस महकमे में अब अनुसंधान और कानून-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) की जिम्मेदारियों को अलग-अलग करने की तैयारी शुरू हो गई है. पुलिस मुख्यालय के इस कदम को पुलिसिंग में गुणवत्ता सुधार, कार्यभार संतुलन और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. 

वर्तमान व्यवस्था में एक ही पुलिस अधिकारी और कार्मिक को अनुसंधान और कानून-व्यवस्था दोनों जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. इससे कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आती रही हैं. खासतौर पर कम अनुभव वाले पुलिसकर्मियों को अनुसंधान के दौरान तकनीकी और कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, जिससे वे तनाव में आ जाते हैं. कई मामलों में अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव के कारण गंभीर घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं. 

दूसरी ओर, जब वहीं अधिकारी कानून-व्यवस्था में व्यस्त रहते हैं तो लंबित मामलों के अनुसंधान पर असर पड़ता है. समय पर जांच पूरी नहीं हो पाती, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और मामलों में देरी बढ़ती है. पुलिस मुख्यालय ने इन चुनौतियों को गंभीरता से लेते हुए कार्यप्रणाली में सुधार का निर्णय लिया है. महानिदेशक पुलिस के निर्देश पर इस विषय का गहन अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. समिति में DIG कार्मिक विकास शर्मा, आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी गौतम, अमृता दुहन, विकास सांगवान, अमित बुढ़ानिया और मनीष कुमार के साथ आरपीएस अधिकारी मनस्वी चौधरी को शामिल किया गया है. 

यह समिति विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के मॉडल का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी. समिति यह भी देखेगी कि किन स्तरों पर और किस तरीके से कार्यों का विभाजन किया जाए, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और पुलिसकर्मियों पर अनावश्यक दबाव कम हो. इसके अलावा प्रशिक्षण, स्टाफिंग और संरचनात्मक बदलावों पर भी सुझाव दिए जाएंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुसंधान और कानून-व्यवस्था को अलग किया जाता है तो जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा, अपराधियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए जा सकेंगे और अदालतों में दोष सिद्धि दर भी बढ़ेगी. 

साथ ही, पुलिसकर्मियों को अपनी भूमिका स्पष्ट रूप से समझने में आसानी होगी, जिससे कार्यक्षमता में वृद्धि होगी. राजस्थान पुलिस का यह प्रस्तावित कदम देश के उन राज्यों की श्रेणी में शामिल होने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जहां पुलिसिंग को आधुनिक और विशेषज्ञता आधारित बनाया जा रहा है. अब समिति की रिपोर्ट के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं.