जनसंख्या नियंत्रण पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, कहा- नीति बनाने से पहले जनजागरण जरूरी

जनसंख्या नियंत्रण पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, कहा- नीति बनाने से पहले जनजागरण जरूरी

जयपुर : कर्नाटक में जनसंख्या नियंत्रण पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नीति बनाने से पहले जनजागरण जरूरी है. जनता के सहयोग से ही कानून सफल होंगे. UCC पर भी दी दीर्घकालिक सोच की सलाह देते हुए कहा कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है. लोगों को पहले शिक्षित करना जरूरी है. समाज की भागीदारी सबसे अहम है. संवाद और समझ से माहौल बनेगा.  सामाजिक सहमति के बिना नीति अधूरी है.

जातिवाद खत्म करने की जिम्मेदारी समाज पर:
जाति आधारित राजनीति पर मोहन भागवत ने कहा कि समाज खुद जाति नहीं छोड़ेगा तो राजनीति भी नहीं बदलेगी. नेता वोट के लिए जाति का इस्तेमाल करते हैं. काम पर वोट नहीं मिले तो जाति पर वोट मांगते हैं. समाज को जातिगत पहचान से ऊपर उठना होगा. सामाजिक समरसता पर जोर दिया.  नारेबाजी नहीं, व्यवहार में समानता जरूरी है. हर समुदाय के बीच सौहार्द की अपील करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि  समाज बदलेगा तो राजनीति भी बदलेगी. जातिवाद खत्म करने की जिम्मेदारी समाज पर है.

हर नीति में जनभागीदारी जरूरी:
UCC और जनसंख्या नियंत्रण मोहन भागवत ने कहा कि RSS सरकार नहीं, सामाजिक संगठन है. कानून लागू करने से पहले सामाजिक समर्थन जरूरी है. जनता तैयार होगी तभी सफल नीति होगी. भागवत बोले कि शिक्षा और जागरूकता सबसे जरूरी है. सिर्फ सख्ती से समाधान संभव नहीं है. दीर्घकालिक सोच के साथ काम करने की सलाह देते हुए समाज की सहमति को अहम बताया.  हर नीति में जनभागीदारी जरूरी है. संतुलित और संवेदनशील तरीके की वकालत.

नीतियां जनता पर थोपने से बचना चाहिए:
आपातकाल के जनसंख्या नियंत्रण अभियान जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आक्रामक नीतियों से असंतोष पैदा हुआ था. जबरदस्ती के कदमों का विरोध हुआ था. राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली थी. इतिहास से सीख लेने की जरूरत है. नीतियां जनता पर थोपने से बचना चाहिए. सहमति और समझ से बेहतर परिणाम बनें है. सरकार और समाज दोनों की भूमिका अहम है. जनहित में संतुलित नीति जरूरी है. विश्वास जीतकर ही बदलाव संभव है.

समरस समाज से होगा राष्ट्रीय विकास:
सामाजिक समरसता विषय पर मोहन भागवत ने कहा कि समाज में समानता व्यवहार से दिखनी चाहिए. सिर्फ नारे लगाने से बदलाव नहीं आएगा. सामाजिक जीवन में अपनापन जरूरी है. हर वर्ग को साथ लेकर चलने की अपील करते हुए मोहन भागवत ने देशहित में सामाजिक एकता को जरूरी बताया.  समरस समाज से राष्ट्रीय विकास होगा. 

जनता का समर्थन सबसे बड़ी ताकत:
जाति, जनसंख्या और UCC पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए मोहन भागवत ने समाज को बदलाव का केंद्र बताया. उन्होंने कहा कि जनता का समर्थन सबसे बड़ी ताकत है. नीतियों में संवेदनशीलता जरूरी है. शिक्षा और जागरूकता को समाधान बताते हुए राजनीति में जाति के असर पर चिंता जताई. सामाजिक समरसता को विकास की कुंजी बताया.