जयपुरः नगर निगम की वित्तीय स्थिति को लेकर 27 मार्च तक के राजस्व वसूली के जोनवार आंकड़े सामने आ गए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक नगर निगम ने शहरी विकास कर (यूडी टैक्स) और विज्ञापन शुल्क के जरिए कुल 146.78 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है. वसूली के इस आंकड़े में यूडी टैक्स से 122.75 करोड़ रुपये, जबकि विज्ञापन शुल्क से 24.03 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है. जोनवार करने पर यह साफ हो जाता है कि कुछ जोन नगर निगम की आय का मजबूत आधार बने हुए हैं, जबकि कुछ जोनों में अपेक्षाकृत कम वसूली दर्ज की गई है.
राजस्व वसूली के जोनवार आंकडे
जोन यूडी टैक्स विज्ञापन शुल्क कुल
आदर्श नगर जोन 6.15 1.17 7.32
आमेर हवामहल जोन 4.44 0.61 5.05
सिविल लाइन जोन 18.57 4.50 23.07
जगतपुरा जोन 9.82 1.22 11.04
झोटवाड़ा जोन 10.60 2.82 13.48
किशनपोल जोन 10.91 0.76 11.67
मालवीय नगर जोन 29.30 6.41 35.71
मानसरोवर जोन 11.64 2.54 14.17
मुरलीपुरा जोन 8.11 1.50 9.61
सांगानेर जोन 8.35 1.34 9.69
विद्याधर नगर जोन 4.86 1.10 5.96
सभी जोन मिलाकर 122.75 24.03 146.78
ये आकंडे 27 तारीख तक के है
पूरे नगर निगम क्षेत्र में सबसे अधिक राजस्व वसूली मालवीय नगर जोन से हुई है. इस जोन ने कुल 35.71 करोड़ रुपये की वसूली कर सभी जोनों को पीछे छोड़ दिया है. इसमें 29.30 करोड़ रुपये यूडी टैक्स और 6.41 करोड़ रुपये विज्ञापन शुल्क के रूप में शामिल हैं. आंकड़े बताते हैं कि नगरीय कर संग्रह के साथ‑साथ विज्ञापन होर्डिंग्स और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण मालवीय नगर जोन निगम के लिए सबसे ज्यादा कमाई वाला इलाका साबित हुआ है.राजस्व अधिकारियों के मुताबिक मालवीय नगर जोन में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की संख्या अधिक होने के साथ ही नियमित वसूली अभियान चलाया गया, जिससे यह जोन टॉप पर पहुंचा. राजस्व वसूली की सूची में दूसरा स्थान सिविल लाइन जोन ने हासिल किया है. सिविल लाइन जोन से कुल 23.07 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जिसमें 18.57 करोड़ रुपये यूडी टैक्स और 4.50 करोड़ रुपये विज्ञापन शुल्क शामिल हैं. प्रशासनिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक गतिविधियों की अधिकता के कारण सिविल लाइन जोन की हिस्सेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है.वहीं, मानसरोवर जोन ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 14.17 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली की है. इस जोन से 11.64 करोड़ रुपये यूडी टैक्स और 2.54 करोड़ रुपये विज्ञापन शुल्क के माध्यम से निगम को आय प्राप्त हुई है.
राजस्व वसूली में रिकॉर्ड वसूली की ओर निगम
राजस्व वसूली में मालवीय नगर जोन का दबदबा
मालवीय नगर जोन से 35.71 करोड़ की वसूली
यूडी टैक्स में 29.30 करोड़ की सबसे ज्यादा राशि
विज्ञापन शुल्क से भी 6.41 करोड़
सिविल लाइन जोन दूसरे स्थान पर
सिविल लाइन से 23.07 करोड़ की वसूली
यूडी टैक्स में 18.57 करोड़ का योगदान
विज्ञापन शुल्क से 4.50 करोड़
मध्यम श्रेणी के जोनों में झोटवाड़ा और किशनपोल जोन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला. झोटवाड़ा जोन से कुल 13.48 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई, जिसमें यूडी टैक्स से 10.60 करोड़ और विज्ञापन शुल्क से 2.88 करोड़ रुपये शामिल हैं.वहीं, किशनपोल जोन ने 11.67 करोड़ रुपये की आय निगम को दी, जिसमें 10.91 करोड़ रुपये यूडी टैक्स से प्राप्त हुए. दोनों ही जोनों में घनी आबादी और मिश्रित व्यावसायिक गतिविधियां राजस्व संग्रह का बड़ा आधार बनीं.तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में शामिल जगतपुरा जोन से 11.04 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई है. इसमें 9.82 करोड़ यूडी टैक्स और 1.22 करोड़ विज्ञापन शुल्क शामिल हैं.मुरलीपुरा जोन से कुल 9.61 करोड़ रुपये (8.11 करोड़ यूडी टैक्स और 1.50 करोड़ विज्ञापन शुल्क) की वसूली हुई.वहीं, सांगानेर जोन ने 9.69 करोड़ रुपये की आय दी, जिसमें 8.35 करोड़ यूडी टैक्स और 1.34 करोड़ रुपये विज्ञापन शुल्क का योगदान रहा.
आंकड़ों के अनुसार आदर्श नगर जोन से कुल 7.32 करोड़ रुपये की वसूली हुई है. इसमें 6.15 करोड़ यूडी टैक्स और 1.17 करोड़ विज्ञापन शुल्क शामिल हैं.वहीं, आमेर‑हवामहल जोन से निगम को 5.05 करोड़ रुपये ही मिल सके, जिसमें 4.44 करोड़ यूडी टैक्स और 0.61 करोड़ रुपये विज्ञापन शुल्क का योगदान रहा. इन जोनों में वसूली अपेक्षा से कम रहने को लेकर अधिकारियों द्वारा समीक्षा की बात कही जा रही है.नगर निगम के आंकड़ों में सबसे कम राजस्व वसूली विद्याधर नगर जोन से सामने आई है. इस जोन से कुल 5.96 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जिसमें 4.86 करोड़ यूडी टैक्स और 1.10 करोड़ रुपये विज्ञापन शुल्क शामिल हैं. कम वाणिज्यिक गतिविधि और सीमित विज्ञापन संसाधनों को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है.कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो विज्ञापन शुल्क के रूप में प्राप्त 24.03 करोड़ रुपये नगर निगम के लिए एक मजबूत वैकल्पिक आय स्रोत बनकर उभरे हैं. खासकर मालवीय नगर, सिविल लाइन और मानसरोवर जैसे जोनों में विज्ञापन से होने वाली आय उल्लेखनीय रही है.
27 मार्च तक के यह आंकड़े वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण की तस्वीर पेश करते हैं. आने वाले दिनों में विशेष वसूली अभियान चलाकर यूडी टैक्स और लंबित विज्ञापन शुल्क की वसूली पर जोर दिया जाएगा. जिससे निगम की आय को और मजबूत किया जा सके.