जयपुरः अब जयपुर में ड्राइविंग लाइसेंस योग्य लोगों को ही मिलेगा, जयपुर RTO प्रथम कार्यालय में ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक फिर से शुरू हो गया है , अब ट्रायल में पारदर्शी तरीके से सफल होने वाले आवेदकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल पाएगा
अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा. आरटीओ जयपुर प्रथम कार्यालय में कल से ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक की औपचारिक शुरुआत हो गई है. इस अत्याधुनिक व्यवस्था के लागू होने के साथ ही ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीक आधारित हो गई है, जिससे अब केवल वास्तविक रूप से दक्ष वाहन चालकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा.यह ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक मारुति सुज़ुकी कंपनी के सहयोग से तैयार किए गए विशेष सॉफ्टवेयर पर आधारित है. इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पूरा टेस्ट सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से संचालित होगा. ट्रैक पर लगाए गए सेंसर, कैमरे और सॉफ्टवेयर वाहन चालक की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे और उसी के आधार पर पास या फेल का निर्णय होगा. इसमें किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं रखी गई है.
फिलहाल इस ट्रैक को शुरुआती तीन से चार दिनों के लिए ट्रायल मोड में चलाया जा रहा है. इस दौरान तकनीकी खामियों, सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और आवेदकों की प्रतिक्रिया को परखा जा रहा है. ट्रायल अवधि पूरी होने के बाद ड्राइविंग टेस्ट से लेकर परिणाम तक की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी जाएगी. इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होगी.ट्रायल के पहले ही दिन ऑटोमेटेड सिस्टम की सख्ती साफ तौर पर देखने को मिली. शुरुआती दस आवेदकों में से केवल एक ही आवेदक टेस्ट में सफल हो पाया, जबकि शेष आवेदक निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर सके. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि अब ड्राइविंग लाइसेंस पाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक ड्राइविंग कौशल पर आधारित होगा.आरटीओ जयपुर प्रथम के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी राजेंद्र सिंह स्वयं ट्रैक पर उपस्थित रहे और उन्होंने पूरी प्रक्रिया को बारीकी से समझा. उन्होंने अधिकारियों और तकनीकी टीम से सिस्टम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा मानकों और भविष्य की योजना को लेकर विस्तार से जानकारी ली. आरटीओ राजेंद्र सिंह ने कहा कि इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है.उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक से लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और किसी भी प्रकार की अनुचित सिफारिश या ढिलाई की संभावना समाप्त होगी. अब वही चालक लाइसेंस प्राप्त कर पाएंगे, जो वास्तव में ट्रैफिक नियमों और वाहन संचालन में दक्ष होंगे.