गुजरात: भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाई जा रही है. एकता दिवस पर लौह पुरुष को प्रधानमंत्री मोदी ने नमन किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राष्ट्रीय एकता दिवस और पटेल की 150वीं जयंती के मुख्य समारोह में शामिल हुए. सुबह 8 बजे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि भी अर्पित की. पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद देशवासियों को संबोधित किया. राष्ट्रीय एकता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल अमर रहें.आज हम सब एक महान क्षण के साक्षी बन रहे हैं.
देशभर में हो रही एकता दौड़ कोटि-कोटि भारतीयों का उत्साह, हम नए भारत की संकल्प शक्ति को साक्षात महसूस कर रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल मानते थे कि इतिहास लिखने में समय नहीं गंवाना चाहिए, हमें तो इतिहास बनाने के लिए मेहनत करनी चाहिए. उनकी ये भावना हमें उनकी जीवनगाथा में दिखाई देती है. सरदार साहब ने जो नीतियां बनाई, जो निर्णय लिए, उन्होंने नया इतिहास रचा.आजादी के बाद 550 से ज्यादा रियासतों को साथ जोड़ने के असंभव कार्य को उन्होंने संभव करके दिखा दिया. एक भारत-श्रेष्ठ भारत का विचार उनके लिए सर्वोपरि था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एकता दिवस का महत्व हमारे लिए प्रेरणा का पल है. आज करोड़ों लोगों ने एकता की शपथ ली है. हमने संकल्प लिया है कि हम ऐसे कार्यों को बढ़ावा देंगे जो देश की एकता को मजबूती दें.हर ऐसी बात जो देश की एकता को कमजोर करती है, हर देशवासी को उससे दूर रहना है, यह राष्ट्रीय कर्तव्य है, यह सरदार साहब को सच्ची श्रद्धांजलि है.यही आज एकता दिवस का हर भारतीय के लिए संदेश भी है, संकल्प भी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार साहब ने देश की संप्रभुता को सबसे ऊपर रखा लेकिन दुर्भाग्य से सरदार साहब के निधन के बाद के वर्षों में देश की संप्रभुता को लेकर तब की सरकारों में उतनी गंभीरता नहीं रही. एक ओर कश्मीर में हुई गलतियां, दूसरी ओर पूर्वोत्तर में पैदा हुई समस्याएं और देश में जगह-जगह पनपा नक्सलवाद-माओवादी आतंक, ये देश की संप्रभुता को सीधी चुनौतियां थी लेकिन उस समय की सरकारों ने सरदार साहब की नीतियों पर चलने की जगह रीढ़विहीन रवैये को चुना. इसका परिणाम देश ने हिंसा और रक्तपात के रूप में झेला.