नई दिल्ली : राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुए 3 हफ़्ते से ज़्यादा हो गए हैं. इस युद्ध की वजह से दुनिया में एक गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है. इस युद्ध ने हमारे व्यापार मार्गों पर असर डाला है. इसके चलते पेट्रोल, डीज़ल, गैस और उर्वरकों की नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई है.
मौजूदा दौर में कई चुनौतियां सामने आयी है. दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर हो रहा है. बड़ी संख्या में भारतीय खाड़ी देशों रहते हैं और काम करते हैं. उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है. होर्मुज जलडमरूमध्य में कई जहाज़ फंसे हुए हैं. उन जहाज़ों पर बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य फंसे हुए हैं.
भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है:
यह भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का कारण है. ऐसी कठिन स्थिति में, यह ज़रूरी है कि भारत का उच्च सदन शांति और बातचीत की एक एकजुट आवाज़ उठाए. 'भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. हमारी एकजुटता दुनिया को दिखे. तीन लाख से ज्यादा भारतीय सुरक्षित लौट चुके हैं. कुछ भारतीयों की जानें भी गई हैं.
होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का निकलना मुश्किल हो गया:
पश्चिमी एशिया के राष्ट्राध्यक्षों से हमने बात की है. भारत अमेरिका, इजराइल और ईरान तीनों ही देशों के संपर्क में है होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का निकलना मुश्किल हो गया है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे बड़े रूट्स में से एक है. हम कोशिश कर रहे हैं कि भारत आने वाली तेल,गैस और उर्वरक की सप्लाई बनी रहे. हमारा लक्ष्य बातचीत और कूटनीति के ज़रिए इस क्षेत्र में शांति बहाल करना है. हमने उनसे तनाव कम करने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने के बारे में भी बात की है.
व्यापारिक जहाज़ों पर हमले और होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में रुकावट डालना मंज़ूर नहीं है. भारत ने आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे, और ऊर्जा व परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमलों का विरोध किया है. भारत युद्ध के इन समयों में भी भारतीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. इस संकट के समाधान के लिए भारत ने बातचीत का सुझाव दिया है.