जयपुर: राजस्थान में जनगणना के पहले चरण के रूप में एक से 15 मई तक स्व गणना होगी. इसके एक माह तक प्रगणक भौतिक सत्यापन करेंगे. स्व गणना की जाए या नहीं कि जाए दोनों ही स्थितियों में 16 मई से प्रगणक घर घर जाकर सूचना लेंगे. पहले चरण में मकान सूचीकरण का काम होगा जिसमें सत्यापन के लिए ओटीपी या लिंक नहीं दिया जाएगा. साथ ही तय अवधि के अलावा जनगणना का कोई भी कर्मी डाटा लेने या सत्यापन का काम नहीं करेगा.
राजस्थान में प्रस्तावित जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल मोड में होगी और पहली बार “स्व-गणना” या Self Enumeration का विकल्प भी दिया गया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की भरी गई जानकारी का सत्यापन प्रगणकों द्वारा किया जाएगा.
OTP और फर्जी कॉल से सावधान
जनगणना निदेशालय ने साफ किया है कि सत्यापन के दौरान किसी भी प्रकार का OTP नहीं मांगा जाएगा और न ही कोई लिंक भेजा जाएगा.
केवल “RGICEN” से शुरू होने वाले आधिकारिक मैसेज ही वैध होंगे. अवधि के बाहर जनगणना निदेशालय की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा जाएगा.
इतने प्रगणक करेंगे कार्य
करीब 1.60 लाख प्रगणक और पर्यवेक्षक इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देंगे.
हर प्रगणक को एक “मकान सूचीकरण ब्लॉक” आवंटित किया जाएगा, जिसमें लगभग 150 मकान या 800 की आबादी शामिल हो सकती है.
दो चरणों में होगी जनगणना
जनगणना प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी-
पहला चरण (मकान सूचीकरण): इसमें मकानों का व्यवस्थित सर्वे किया जाएगा.
दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): यह पहले चरण के आधार पर किया जाएगा.
अधिकारियों के अनुसार, प्रगणक दोनों चरणों में घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे और उन्हें मकान में प्रवेश कर नंबर अंकित करने का अधिकार भी होगा.
स्व गणना की सुविधा
डिजिटल रूप से सक्षम लोग se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी भर सकते हैं. हालांकि, मूल गणना का कार्य प्रगणक ही करेंगे.
कब होगी प्रक्रिया ?
स्व गणना: 1 मई से 15 मई 2026
घर-घर गणना: 16 मई से 14 जून 2026
प्रगणकों को सत्यापन के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा.
क्या-क्या जानकारी ली जाएगी ?
मकान सूचीकरण के दौरान-
मकान का प्रकार (आवासीय/वाणिज्यिक)
पेयजल, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं
संपत्ति, उपयोग और मुख्य अनाज से जुड़ी जानकारी
कुल 33 प्रश्न और 34 कॉलम में डाटा दर्ज किया जाएगा. यह जानकारी भविष्य की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में उपयोगी होगी.
प्रशिक्षण
डाटा संग्रहण की प्रक्रिया और गुणवत्ता संबंधी सावधानियों के लिए पहले स्तर पर 103 मास्टर ट्रेनर्स का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण 7 अप्रैल से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया गया. ये मास्टर ट्रेनर्स 41 जिलों और 10 नगर निगमों में 2550 फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण करवा रहे हैं. ये फील्ड ट्रेनर्स 01 मई से 15 मई 2026 तक 1.6 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को तहसील, नगर परिषद और नगर पालिका स्तर पर प्रशिक्षित करेंगे.
क्या है उद्देश्य ?
जनगणना के प्रथम चरण "मकानसूचीकरण और मकानों की गणना-HLO का उद्देश्य आगामी जनसंख्या गणना के लिए एक पूरा और विश्वसनीय मास्टर फ्रेम तैयार करना है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनगणना के द्वितीय चरण- जनसंख्या गणना (PE) चरण में कोई भी व्यक्ति अथवा परिवार गणना से वंचित न रह जाए.
डाटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित
अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि जनगणना का डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा. census.gov.in पोर्टल पर मल्टी-लेवल सुरक्षा (कैप्चा, OTP, पासवर्ड) के जरिए लॉगिन होता है और पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जा रही है.
कैसे है पूरी प्रक्रिया डिजिटाइज ?
जनगणना 2027 को आधुनिक और डिजिटल स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली Census Management & Monitoring System - CMMS पोर्टल, मकान सूचीकरण ब्लॉक निर्माण HLBC वेब पोर्टल और मकान सूचीकरण ऐप HLO app विकसित किए गए हैं. CMMS पोर्टल का उपयोग चार्ज अधिकारियों (तहसीलदार/आयुक्त नगर परिषद/ अधिशासी अधिकारी नगर पालिका/उपायुक्त नगर निगम) करेंगे.
ये अधिकारी सम्पूर्ण जनगणना कार्य की योजना बनाने, फील्ड कार्य की लगभग वास्तविक समय पर निगरानी करने और आंकड़ों की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए इसका उपयोग करेंगे.
HLBC वेब पोर्टल के माध्यम से जनगणना कार्य की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई मकानसूचीकरण ब्लॉक को जियो टैगिंग करने और सैटेलाइट इमेज पर सीमांकन करने के लिए किया जायेगा
जबकि HLO मोबाइल ऐप का उपयोग प्रगणकों/पर्यवेक्षकों की ओर से अपने मोबाइल उपकरण के माध्यम से आंकड़ों के संग्रहण के लिए किया जाएगा.
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
घुमंतू आबादी की गणना मकान सूचीकरण चरण में नहीं होगी क्योंकि उनके पास आवास नहीं होगा.
दो या ज्यादा मकान या संपत्ति होने पर जहां व्यक्ति भौतिक रूप से मौजूद होगा, वहीं गणना के डाटा का काम होगा.
प्रशासनिक सीमाओं के स्थिरीकरण के बाद ही जनगणना का कार्य किया जा रहा है, इसका डीलिमिटेशन से कोई संबंध नहीं है.
अधिकतर प्रगणक दोनों चरणों में कार्य करेंगे और उनके तबादलों पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकारों को लिखा गया है.
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में पहली असमकालिक जनगणना 1872 में हुई थी.
स्वतंत्रता के बाद यह 8वीं जनगणना होगी और 1931 के बाद पहली बार जातिगत जनगणना प्रस्तावित है जो कि जनगणना के दूसरे चरण में प्रस्तावित है.
इस दूसरे चरण में पूछे जाने वाले सवाल अभी जारी नहीं किए गए हैं.
जनगणना के पहले चरण में पूछे जाने वाले कुल 33 प्रश्नों की अधिसूचना जारी की गई है. मकान सूचीकरण कार्य के अंतर्गत राज्य के समस्त भवनों, जनगणना मकानों और परिवारों की पहचान कर उनका व्यवस्थित सूचीकरण किया जाएगा.साथ ही प्रगणक घर-घर जाकर मकान की स्थिति, परिवार को उपलब्ध सुविधाएं और परिवार की परिसंपत्तियों, परिवार के उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाएंगे.