जयपुर : प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में MRI/CT स्कैन की फ्री सेवा में बड़ा "खेल" सामने आया है. कई जगहों से मिली शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने बरसों से चले आ रहे जांच के पर्चे को बदलकर मॉनिटरिंग शुरू की तो एक माह में ही 20 से 40 फीसदी तक जांचों का ग्राफ गिर गया है. इस तरह की गड़बड़ियों से राजस्व को करोड़ों रुपए का चुना लगने की आंशका के चलते अब प्रशासन अलर्ट मोड पर है. अस्पताल प्रशासन ने "गड़बड़ी" करने वालों को चिन्हित करने के साथ ही बतौर नोडल एजेंसी RMRS को मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए है.
दरअसल, प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में थर्ड पार्टी सेवा प्रदाता के जरिए कई सालों से MRI/CT स्कैन की सेवा ली जा रही है. पूर्व में MRI/CT स्कैन जांच की रियायती दर तय थी, जिसे जमा कराकर मरीज जांच करवाते थे. लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने अंतिम बजट में राजस्थान के निवासियों के लिए MRI/CT स्कैन समेत सभी तरह की अन्य जांचें फ्री की गई. इसके पीछे की मंशा ये थी कि जरूरतमंद और गरीब श्रेणी के मरीजों को आर्थिक भार से मुक्त किया जा सके. लेकिन पिछले दिनों में कई ऐसे प्रकरण सामने आए, जिनमें इस फ्री सेवा का दुरूपयोग और लपकों की सक्रियता की पुष्टि हुई. ऐसे में अस्पताल अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी ने पड़ताल करवाई तो पता चला कि कई सालों से MRI/CT स्कैन का सफेद रंग का एक ही पर्चा चल रहा है, जो सभी जगहों पर आसानी से उपलब्ध है. डॉ जोशी ने अलग-अलग जगहों से मिले फीडबैक के बाद फरवरी माह में इन सफेद पर्चों को बन्द कर दिया.
साथ ही नई व्यवस्था के तहत सीरियल नम्बर के साथ OPD के लिए लाइट ब्लू,IPD के लिए लाइट ग्रीन , इमरजेंसी के लिए लाइट यलो और ट्रोमा के लिए लाइट पिंक रंग के पर्चे जारी किए. ताकि, पता रहे कि किसी विभाग से किस चिकित्सक ने कितनी सीटी स्कैन और MRI लिखी. खुद अधीक्षक डॉ जोशी ने एक माह के पायलट प्रोजेक्ट के आंकड़ों के बाद स्वीकारा है कि नई व्यवस्था के बाद जांचों में बड़े स्तर पर कमी आई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी मंशा ये नहीं है कि जांचे कम की जाए, बल्कि हम चाहते है कि जरूरतमंद और योग्य मरीज को फ्री सेवा का लाभ दिया जाए.
यूं गिरा SMS अस्पताल में जांच का आंकड़ा
माह :::::::::::::::::::::प्रतिदिन औसतन MRI ::::::::::::::::::::::प्रतिदिन औसतन सीटी स्कैन
जनवरी 2026 :::::::::::::::::::::: 609 :::::::::::::::::::::: 179
फरवरी 2026 :::::::::::::::::::::: 562 :::::::::::::::::::::: 177
मार्च 2026 :::::::::::::::::::::::::::452 :::::::::::::::::::::: 111
अस्पताल अधीक्षक डॉ जोशी की माने तो नई व्यवस्था से काफी हद तक राजस्व के दुरूपयोग को रोका जा सकेगा. साथ ही ये भी प्राथमिकता पर्चें को देखकर तय हो सकेगी कि किस मरीज को जांच की तत्काल यानी इमरजेंसी है. जैसे लाइट पिंक रंग का पर्चा देखते ही सेवा प्रदाता के कार्मिंकों को पता चल जाएगा कि मरीज ट्रोमा सेन्टर से इमरजेंसी में आया है. तो उसे जांच में प्राथमिता दी जा सकेगी. उधर, प्रशासन ने गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने के साथ ही मौजूदा व्यवस्था में खुद की खामियों को भी दुरूस्त करना शुरू कर दिया है. इसके तहत अब प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर्स की लिखी जांच पर काउंटर साइन का नियम हटाने की तैयारी है. ताकि मरीज काउंटर साइन कराने के लिए इधर, उधर नहीं भटके.
MRI/CT स्कैन जैसी महंगी जांच में खत्म होगा "काउंटर" साइन का झंझट !
-SMS अस्पताल में मरीजों की दिक्कतों को देखते हुए नई व्यवस्था की तैयारी
-प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर अब सीधे करवा सकेंगे जांचें
-लेकिन उन्हें खुद की SSO आईडी से भेजना होगा MRI/CT स्कैन का पर्चा
-फर्स्ट इंडिया ने प्रमुखता से उठाया था मरीजों की दिक्कतों का यह मुख्य मुद्दा
-दरअसल, प्रदेश में जब से शुरू की गई थी फ्री MRI/CT स्कैन की सुविधा
-तब इसके दुरूपयोग को रोकने के लिए लागू की गई थी "काउंटर" साइन की व्यवस्था
-यानी यदि किसी प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर ने लिखी जांच
-तो यूनिट हेड या एचओडी के "काउंटर" साइन के बाद ही मान्य होता था वो पर्चा
-इस व्यवस्था में मरीज-उसके परिजन काउंटर साइन के लिए घंटों भटकने को थे मजबूर
-खुद अस्पताल अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी ने स्वीकारा कि मौजूदा व्यवस्था में है खामी
-डॉ जोशी ने कहा कि हमारे सभी सीनियर-जूनियर फैकल्टी मैम्बर है योग्य और जिम्मेदार
-डॉ जोशी के मुताबिक सभी फैकल्टी मैम्बर्स की चरणबद्ध रूप से शुरू की गई है ट्रेनिंग
-इसमें उन्हें बताया जा रहा है कि एसएसओ आईडी से वे कैसे भेज सकेंगे ऑनलाइन पर्चा
-जल्द ही नई व्यवस्था को उच्च स्तरीय अनुमति के बाद लागू करने का किया जाएगा प्रयास