कब खत्म होगी क्रिकेट कंट्रोवर्सी ! दो साल से RCA चुनाव का इंतजार, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः प्रदेश के सबसे धनी खेल संघ आरसीए में पिछले दो साल से चुनाव का इंतजार हो रहा है. हर तीन महीने बाद आरसीए में एडहॉक कमेटी बना दी जाती है, लेकिन ये कमेटियां अपने मूल काम चुनाव को नहीं करा पाती. हालात यह है कि पूरे राजस्थान की क्रिकेट पॉवर एडहॉक कमेटी के पांच लोगों तक सीमित हो गई है और दूसरी तरफ खुद कमेटी के सदस्यों में भी विवाद चल रहा है. आरसीए में चुनाव नहीं होने का खमियाजा प्रदेश के क्रिकेटर्स को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि अब आरसीए में जिला संघों की भूमिका नहीं है, बल्कि एडहॉक कमेटी ही सर्व शक्तिमान हो गई है. 

क्रिकेट के मैदान पर जब अंपायर पक्षपात करे और खिलाड़ी अपने-अपने बल्ले छोड़ कुर्सी पकड़ लें, तो समझ लीजिए मैच नहीं — मैनेजमेंट लीग चल रही है. राजस्थान क्रिकेट संघ यानि आरसीए में भी इन दिनों ऐसा ही एक टेस्ट मैच खेला जा रहा है, जिसमें न ओवर पूरे हो रहे हैं, न नतीजा निकल रहा है. करीब दो साल पहले एडहॉक कमेटी को अंपायर बनाया गया था, लेकिन अब यह कमेटी ही खिलाड़ी बनकर पिच पर टिक गई है. 33 जिला क्रिकेट संघ पैवेलियन में बैठे है और मैदान पर एडहॉक कमेटी सदस्य के रूप में 'पांच स्टार प्लेयर्स' ऑल-राउंडर बने हुए हैं—बैट भी वही, बॉल भी वही, और थर्ड अंपायर भी वही. एडहॉक कमेटी के इस पावर-प्ले के चक्कर में असली क्रिकेटर डगआउट में इंतज़ार कर रहे हैं. सवाल बस इतना है—RCA में क्रिकेट कब खेलेगा, या हमेशा राजनीति ही ओपनिंग करती रहेगी ? आखिर कब होगी इस रात की सुबह . सुबह का इंतजार सभी क्रिकेटर्स कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले आपको आरसीए के मौजूदा हालात से रुबरु करा देते हैं.

दो साल पहले प्रदेश में बदली थी सरकार
नई सरकार बनते ही वैभव गहलोत की अध्यक्षता वाली कार्यकारिणी को भंग कर दिया
प्रदेश में क्रिकेट संचालन के लिए एडहॉक कमेटी के रूप में अस्थाई व्यवस्था की गई
पहले भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी के नेतृत्व में एडहॉक कमेटी बनाई गई
कुछ समय बाद ही एडहॉक कमेटी में घमासान शुरू हो गया
कन्वीनर जयदीप बिहाणी व सदस्य धनंजय सिंह आमने-सामने हो गए
सरकार ने एडहॉक कमेटी बदलकर जयदीप बिहाणी को हटा दिया
फिर डीडी कुमावत के नेतृत्व में नई एडहॉक कमेटी का गठन कर दिया
आशीष तिवाड़ी, धनंजय सिंह, पिंकेश जैन व मोहित यादव भी कमेटी में शामिल किए गए
लेकिन इस कमेटी में कुछ समय बाद ही पॉवर गेम शुरू हो गया
डीडी कुमावत एक तरफ रहे, चारों सदस्य उनके खिलाफ लामंबद हो गए
एक पूर्व मंत्री को एडहॉक कमेटी में सुलह कराने की जिम्मेदारी दी, लेकिन सफल नहीं हो सके
सिफारिशी चयन, मनमर्जी के ठेके आरसीए की नियति बन कर रह गई
इस बीच जिला संघों की भूमिका नगण्य कर दी गई आरसीए में
लेकिन अब जिला संघों ने भी चुनाव को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है

जयपुर में आईपीएल मैच होने जा रहे हैं, लेकिन आरसीए को इस आयोजन से पूरी तरह दूर कर दिया है. ऐसे में जिला संघ चाहते हैं कि आरसीए के चुनाव जल्दी हो ताकि पांच लोगों तक पॉवर सीमित न रहे. मौजूदा एडहॉक कमेटी का कार्यकाल अगले सप्ताह पूरा होने वाला है. ऐसे में लग रहा है कि फिलहाल अगले तीन महीने तक फिर से एडहॉक कमेटी ही बनेगी. मौजूदा कमेटी यथावत भी रह सकती है या कुछ बदलाव भी हो सकता. इसके बाद आरसीए चुनाव की कवायद शुरू हो सकती है. सूत्रों के अनुसार अब सरकार ने भी मन बना लिया है कि इस विवाद को खत्म करना जरूरी है, ऐसे में जयपुर में आईपीएल मैच खत्म होते ही चुनाव कराने की प्लानिंग चल रही है. आरसीए से जुड़े सूत्र बताते हैं कि सरकार चुनाव की घोषणा तो एडहॉक कमेटी से करा सकती है, लेकिन यह राह भी आसान नहीं है. कारण क्या है यह जान लेते हैं.

आरसीए व जिला संघों में विवाद है अपने चरम पर
कई जिला संघों में विवाद की स्थिति बनी हुई है
आरसीए की वोटर लिस्ट फाइनल करना आसान काम नहीं
जयपुर व चित्तौड़गढ जिला क्रिकेट संघ में एडहॉक कमेटी बनी हुई है
करौली में एडहॉक कमेटी बनी थी, फिर कोर्ट में चल रहा मामला
पाली, जोधपुर, बीकानेर व बाड़मेर में आरसीए व जिला संघों के अलग-अलग दावे
हनुमानगढ़ जिला संघ में हाल ही कोर्ट के फैसले ने बदली स्थिति
कुछ जिला संघों के चुनाव में आरसीए या खेल परिषद ने पर्यवेक्षक नहीं भेजे
आरसीए की वोटर लिस्ट फाइनल करने पर होगा बड़ा घमासान
वोटर लिस्ट फाइनल के बाद उम्मीदवारी को लेकर राह आसान नहीं
मंत्री, मंत्री-पुत्र, नेता-पुत्र, विधायक बने हुए हैं आरसीए में प्रबल दावेदार 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि क्रिकेट राजनीति प्रदेश की दलगत राजनीति से कहीं ज्यादा पेचीदा है. एडहॉक कमेटी के गठन के बाद भी हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. RCA में लोकतांत्रिक प्रक्रिया लगभग ठप पड़ चुकी है. यही कारण है कि पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और क्रिकेट प्रशासन पर भरोसा डगमगा रहा है. इस सियासी खींचतान का सबसे बड़ा खतरा राजस्थान क्रिकेट को उठाना पड़ सकता है. खिलाड़ियों का चयन मनमर्जी से होता है, कहीं कोई सुनवाई करने वाला नहीं है. जिला संघों में क्रिकेट लगभग ठप्प हो चुकी है, क्योंकि आरसीए के प्रति फिलहाल उनकी कोई जवाबदेही नहीं. कार्यकारिणी चुनी हुई होती, तो अलग अलग काम के लिए अलग अलग कमेटी बनती और पारदर्शिता से संचालन होता. विडंबना यह है कि अभी जो पांच लोग एडहॉक कमेटी में है, वे पांचों ही भाजपा के नेता है, लेकिन उनकी आपस में ही नहीं बनती. ऐसे में सरकार को अब जल्दी चुनाव कराने का फैसला करना चाहिए.