जयपुरः राजधानी जयपुर के बी-टू बायपास चौराहे स्थित श्रीराम कॉलोनी से जुड़े बहुचर्चित और लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान आवासन मंडल (हाउसिंग बोर्ड) के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. इस निर्णय के साथ ही करीब 36 बीघा बेशकीमती भूमि, जिसकी बाजार कीमत ₹2200 करोड़ से अधिक आंकी गई है, पर हाउसिंग बोर्ड का कब्जा होने का रास्ता साफ हो गया है.
यह मामला पिछले तीन दशकों से न्यायिक प्रक्रिया में उलझा हुआ था. जानकारी के अनुसार, राजस्थान आवासन मंडल ने वर्ष 1989 में इस भूमि को अपनी आवासीय योजना के तहत अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की थी. इसके तहत 4 जनवरी 1991 को अधिसूचना जारी कर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को विधिवत पूरा किया गया. इसके बाद 3 जनवरी 1993 को अवार्ड पारित करते हुए संबंधित भू-स्वामियों के लिए मुआवजा भी निर्धारित कर दिया गया था. हालांकि, अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद इस भूमि को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया. कुछ भूखण्डधारकों और एक सोसायटी ने इस पर अपना दावा जताते हुए न्यायालय की शरण ली. इसके बाद यह मामला निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय तक विभिन्न स्तरों पर लंबी सुनवाई का विषय बना रहा. करीब 32 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अब उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद अपना अंतिम निर्णय सुनाया.न्यायालय में सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए. इनमें यह भी उजागर हुआ कि कब्जे का दावा करने वाली सोसायटी ने संबंधित भूमि का विधिवत क्रय ही नहीं किया था. आरोप यह भी सामने आए कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश की गई. इतना ही नहीं, सोसायटी द्वारा कई प्रभावशाली लोगों, जिनमें कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी शामिल बताए जाते हैं, को पट्टे जारी किए गए, ताकि उनके प्रभाव का उपयोग कर कब्जे को बरकरार रखा जा सके.
वर्ष 2019 में इस कॉलोनी के नियमितीकरण को लेकर एक अहम मोड़ भी आया था. उस समय जयपुर विकास प्राधिकरण को एनओसी देने की तैयारी की जा रही थी, जिससे कॉलोनी को वैध बनाने का रास्ता खुल सकता था. लेकिन तत्कालीन हाउसिंग बोर्ड आयुक्त ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए एनओसी देने से इनकार कर दिया और कानूनी लड़ाई जारी रखने का निर्णय लिया. यह फैसला अब निर्णायक साबित हुआ और अंततः न्यायालय ने हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में निर्णय दिया.मामले का एक अहम पहलू यह भी रहा कि विवादित भूमि पर बड़े स्तर पर स्थायी निर्माण नहीं हो सका था. केवल कुछ स्थानों पर बाउंड्री वॉल और सीमित निर्माण जैसे एक-दो कमरे ही बनाए गए थे. यही कारण है कि अब हाउसिंग बोर्ड के लिए इस जमीन पर वास्तविक कब्जा लेना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है.हाउसिंग बोर्ड के सचिव गोपाल सिंह ने कहा कि बोर्ड कोर्ट के फैसले की कॉपी अभी तक नहीं मिली है फैसले की कॉपी मिलने के बाद कॉलोनी की ज़मीन पर कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी , इस जमीन पर भविष्य में वाणिज्यिक और आवासीय योजनाएं विकसित किए जाने की संभावना है, जिससे शहर के विस्तार और सुव्यवस्थित विकास को गति मिलेगी, हाउसिंग बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने भी कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे हाउसिंग बोर्ड की बड़ी जीत बताया है , यूनियन के महामंत्री रमेश शर्मा ने कहा कि जो ज़मीन बोर्ड के पाले से निकलने वाली थी उस ज़मीन को तत्कालीन कमिश्नर के विशेष प्रयासों से बचाया जा सका है यह ज़मीन बोर्ड के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण साबित होगी.
अब हाउसिंग बोर्ड को क्या करना चाइए
1- जल्द से जल्द हाउसिंग बोर्ड की डबल बेंच में कैवियेट लगानी चाइए
2- कॉलोनी की ज़मीन पर पुनः कब्जा लेते हुए व्यापक स्तर पर हाउसिंग बोर्ड संपत्ति के बोर्ड लगाने चाइए
3- कब्जे के बाद ज़मीन की सुरक्षा के लिए तारबंदी और बाउंड्रीवाल बनानी चाइए
4- पुलिस के सहयोग से बाउंड्रीवाल और टीन शेड के अतिक्रमण को हटाना चाइए
5- पूर्व में हुई इस ज़मीन की प्लानिंग को जल्द अमलीजामा पहना कर कुछ भूखंडों की नीलामी करनी चाइए जिससे यहाँ जल्द विकास हो सके