जयपुर: अंता विधानसभा उपचुनाव की जंग अब परवान पर है. चुनाव के अंतिम दौर में भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है. चुनावी जंग जीतने के लिए कांग्रेस ने करीब तीन सौ नेताओं की फौज मैदान में उतार दी है. सांसद से लेकर पीसीसी पदाधिकारियों की चुनाव में ड्यूटी लगाई गई है. हर गांव औऱ बूथ तक कांग्रेस ने नेताओं को तैनात कर दिया है.
अंता विधानसभा उपचुनाव का मुकाबला अब अंतिम स्टेज की तरफ जा रहा है. लिहाजा कांग्रेस ने अब पूरी ताकत इस उपचुनाव के रण को फतेह करने में लगा दी है. सीनियर औऱ जूनियर सहित कई नेताओं की ड्यूटी अंता में पार्टी ने लगा दी है. वहीं दिग्गजों ने भी अब प्रचार की कमान संभाल ली है. आखिरी के तीन दिन सात नवंबर से लेकर नौ नवंबर तक दिग्गज नेताओं की सभा यहां पर होगी.
अंता विधानसभा उपचुनाव की जंग
-कांग्रेस ने चुनावी रण फतह करने के लिए लगाई ताकत
-चुनावी रण में उतारी नेताओं की लंबी फौज
-दिग्गज औऱ अन्य नेताओं को किया अंता में तैनात
-करीब 272 नेताओं को अंता उपचुनाव में दी अब तक जिम्मेदारी
-40 बड़े नेताओं को बनाया उपचुनाव में स्टार प्रचारक
-चुनाव प्रभारी औऱ सह प्रभारी सहित 36 नेताओं को लगी ड्यूटी
-हर समाज के वोटों के लिए सांसद औऱ विधायकों सहित 26 नेता लगाए
-फिर ग्राम पंचायत वार करीब 170 नेताओं को बनाया प्रभारी
-हर ग्राम पंचायत में लगाए कांग्रेस ने 3-3 नेता
अंता में कांग्रेस की कोशिश हर मतदाता के घर घर दस्तक देने की है. लिहाजा प्रत्येक गांव में एक-एक नेता को प्रभारी बनाया गया है. ऐसे ही शहरी मतदाताओं को लुभाने के लिए जिम्मेदारियां दी गई है. यानी इतने नेताओं के जरिए कांग्रेस माइक्रो मैनेजमेट पर फोकस कर रही है. वहीं अब दिग्गज नेता भी प्रचार में कूद चुके है. गोविंद डोटासरा,सुखजिंदर रंधावा,सचिन पायलट औऱ टीकाराम जूली ने अंता में प्रचार शुरु कर दिया है. जल्द ही अशोक गहलोत भी अंता में प्रचार करने जाएंगे.
अंता उपचुनाव से वैसे तो कोई खास सियासी फर्क नहीं पड़ने वाला. पर कांग्रेस उपचुनाव जीतकर सरकार के खिलाफ एक नैरेटिव सेट खड़ा करना चाहती है कि अब तक का कार्यकाल असफल रहा है. लिहाजा कांग्रेस ने ह बूथ औऱ हर वोट को मैनेज करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है.