अर्धांगिनी" ने आधा लीवर डोनेट कर पति को दिया नया जीवन ! SMS अस्पताल में सफल लाइव लीवर ट्रांसप्लांट से जुड़ी खबर

जयपुर: पति-पत्नि के टूटते रिश्तों की खबर भले ही आम हो गई हो, लेकिन आज भी समाज में रिश्तों की अहमियत जिंदा है.कुछ ऐसी ही बानगी एसएमएस अस्पताल में देखने को मिली, जहां एक "अर्धांगिनी" ने अपना आधा लीवर डोनेट कर पति को नया जीवन दिया.अस्पताल में चले करीब 20 घंटे के ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने कई चुनौतियां झेली,लेकिन आखिरकार देर रात सफल ऑपरेशन करके उन्होंने पत्नी के त्याग को मजबूत रिश्ते के अंजाम तक पहुंचाया.लीवर सिरोसिस के चलते जिन्दगी और मौत से जूझ रहे 37 वर्षीय मरीज के लिए उसकी "अर्धांगिनी" जीवन जोत बनकर सामने आई.दरअसल, मरीज पिछले सात-आठ महीनों से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था.

स्थिति ये थी कि धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी.चिकित्सकों ने जांच के बाद जैसे ही ट्रांसप्लांट का ही ऑप्शन बनाया तो उसकी पत्नी ने बिना देर किए अपने पति के लिए खुद को दाता के रूप में आगे कर दिया. हालांकि शुरुआती जांचों में कुछ चिकित्सकीय बाधाएं सामने आईं, जिससे एक पल को उम्मीदें डगमगाईं, लेकिन पत्नी का हौसला नहीं टूटा. जैसे ही रिपोर्ट अनुकूल आई, डॉक्टरों ने सर्जरी की तैयारी शुरू कर दी. आखिर कल सुबह 6.30 बजे वो घडी आई, जब महिला और उसके पति को ओटी ने ले जाया गया.यहां करीब दो दर्जन से अधिक चिकित्सक व अन्य मेडिकॉज की अथक प्रयास से सफल सर्जरी की गई.इस उपलब्धि को लेकर एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ दीपक माहेश्वरी और अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी ने पूरी टीम को बधाई दी है.साथ ही इस तरह के त्याग को समाज के लिए एक प्रेरणा बताया है.

तीन घंटे तक बगैर लीवर के रहा मरीज....!:
-SMS अस्पताल में सफल लाइव लीवर ट्रांसप्लांट से जुड़ी खबर
-सफल ट्रांसप्लांट से जुडे़ चिकित्सकों ने साझा किए अपने अनुभव
-हेपेटो-पैन्क्रियाटो-बिलियरी विभाग के एचओडी डॉ. दिनेश भारती और
-एनेस्थिसिया HOD डॉ पूनम कालरा ने फर्स्ट इंडिया से की खास बातचीत
-उन्होंने बताया कि 20 घंटे से अधिक समय तक चली सर्जरी में कई पल थे चुनौतीपूर्ण
-इस दौरान तीन बार सर्जरी हुई,जिसमें पहली बार में डोनर से लिया गया लीवर का पार्ट
-इसके बाद मरीज के खराब लीवर को निकाला गया और फिर ट्रांसप्लांट किया गया
-इस प्रक्रिया में करीब तीन घंटे ऐसे रहे, जब मरीज को बगैर लीवर के मैनेज रखा था
-इसमें एनेस्थिसिया की टीम ने बेहतर मैनेजमेंट किया, जिससे सफल ट्रांसप्लांट हो पाया

एसएमएस अस्पताल में ये तीसरा लाइव लीवर ट्रांसप्लांट है.इससे पहले के दो प्रकरणों में भी एक पत्नी और एक भाई ने रिश्तों की बड़ी मिसाल पेश कर चुके है.चिकित्सकों के मुताबिक फिलहाल, मरीज को वेटीलेटर सपोर्ट से हटा दिया गया है, डोनर भी पूरी तरह स्वस्थ्य है.