जयपुर: जन-जन के आराध्य देव गोविंददेवजी में धूमधाम से बसंत पंचमी महोत्सव मनाया जा रहा है. ठाकुर श्रीजी का पाटोत्सव (प्राकट्य दिवस) श्रद्धा,विधि-विधान के साथ आयोजित हो रहा है. ठाकुर श्रीजी को विशेष बसंती पीत (पीले) वस्त्र एवं अलौकिक श्रृंगार धारण करवाया गया. धूप झांकी के दर्शन प्रातः 8:30 बजे से 9:45 बजे तक होंगे. श्रृंगार झांकी के दर्शन प्रातः 10:15 बजे से 10:45 बजे तक होंगे. श्रृंगार आरती के बाद मां सरस्वती का पूजन होगा. राजभोग झांकी के दर्शन प्रातः 11:15 बजे से प्रारंभ होंगे. राजभोग झांकी में बसंतोत्सव परंपरा अनुसार ठाकुर श्रीजी को पंच पुष्प अर्पित किए जाएंगे,विशेष बसंती भोग लगाया जाएगा.
श्रीपंचमी भी कहा जाता है बसंत पंचमी को:
बसंत पंचमी को श्रीपंचमी भी कहा जाता है. बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक बसंत पंचमी है. माघ माह की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती हैं. ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को बसंत पंचमी समर्पित है. मान्यता है इस दिन मां सरस्वती की पूजा से अज्ञान दूर होता है. मां सरस्वती की अर्चना से शिक्षा व रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता मिलती है. छात्रों,कलाकारों,संगीतकारों और विद्वानों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है.
बसंत पंचमी पर धारण किए जाते हैं पीले वस्त्र:
विद्या,बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को बसंत पंचमी पर्व समर्पित होता है. इस दिन विशेष रूप से विद्या,संगीत और कला से जुड़े लोग पूजा-अर्चना करते हैं. बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं. मां सरस्वती को पीले फूल,बूंदी के लड्डू,मालपुआ, खीर और पीले चावल का भोग लगाया जाता है. बसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक इस पर्व पर वैष्णव मंदिरों में फाग महोत्सव की भी शुरुआत होती है. इस दौरान भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है.