कांग्रेस जिलाध्यक्षों की हुई घोषणा, नाराजगी के डर से अटका कार्यकारिणी गठन, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान में लंबे मंथन के बाद कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों की घोषणा तो कर दी, लेकिन अब संगठन की स्थिति नौ दिन चले अढाई कोस जैसी हो गई है. करीब चार महीने पहले अधिकांश जिलाध्यक्षों की घोषणा हो चुकी थी, लेकिन आज तक उनकी कार्यकारिणी गठित नहीं हो पाई. 

राहुल गांधी के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले संगठन सृजन अभियान के जरिए कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों का तो चयन कर लिया है, लेकिन अब ये जिलाध्यक्ष अपनी ही कार्यकारिणी के गठन का इंतजार कर रहे है. कांग्रेस आलाकमान ने 22 नवंबर 2025 को 50 में से 45 जिलाध्यक्षों के नाम तय कर दिए थे. इनको 15 दिन में कार्यकारिणी गठन का निर्देश दिया गया था. अब लगभग चार महीने बीतने को है, लेकिन एक भी जिले में कार्यकारिणी नहीं बन पाई. यानी जिले का संगठन अकेले जिलाध्यक्ष के भरोसे चल रहा है. न जिले की मीटिंग हो पा रही है और न ही संगठन के काम प्रभावी तरीके से जमीन पर उतर पा रहे. चर्चा है कि कुछ को छोड़कर अधिकांश जिलाध्यक्षों ने प्रस्तावित कार्यकारिणी प्रदेश स्तर पर सौंप दी है, लेकिन अभी तक वहां से हरी झंडी नहीं मिली. दरअसल कार्यकारिणी की सीमित संख्या होने के चलते भी बड़ी परेशानी चल रही है.

51 पदाधिकारी की बाध्यता बनी बड़ी परेशानी
बड़े जिलों में 51 व छोटे जिलों में 31 पदाधिकारी ही न सकते

जिलाध्यक्ष पशोपेश में कि आखिर किनको कार्यकारिणी में लिया जाए

जिनको शामिल नहीं किया जाएगा, उन नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है

सांसद, विधायक व प्रत्याशियों के नाम भी एडजस्ट करने होंगे कार्यकारिणी में

कुछ विधायकों ने अभी तक अपने नाम कार्यकारिणी के लिए नहीं सौंपे

गैस सिलेंडर जैसे बड़े मुद्दे पर कांग्रेस ने की है आंदोलन की तैयारी

लेकिन अकेला जिलाध्यक्ष किसके दम पर जिले में खड़ा करे आंदोलन

अब विधायकों व ब्लॉक अध्यक्षों पर पूरी तरह निर्भर हो गया जिलाध्यक्ष 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी समय पर प्रदेश में पंचायती राज व निकाय चुनाव होने है. हो सकता है कि इस कारण भी कार्यकारिणी घोषणा में देरी की जा रही है. जिनको चुनाव लड़ाना है उनको पदाधिकारी न बनाया जाए. दूसरी तरफ नुकसान यह भी है कि यदि संगठन मजबूती से खड़ा नहीं होगा तो फिर मजबूती से चुनाव कैस लड़ा जाएगा. निचले स्तर पर जब संगठन ही नहीं होगा तो चुनाव में कैसे जाएंगे. इसलिए पार्टी को सर्वमान्य हल निकालना चाहिए. वहीं पीसीसी के करीबियों की माने तो कार्यकारिणी गठन का काम चल रहा है. कुछ जिलों से कार्यकारिणी के प्रस्ताव भी प्रदेश नेतृत्व को मिल चुके हैं और उनका परीक्षण किया जा रहा है कि कार्यकारिणी में जातिगत संतुलन रखा गया है. या नहीं क्योंकि पार्टी हाईकमान की ओर से एससी- एसटी ओबीसी और माइनॉरिटी को प्रतिनिधित्व देने के आदेश दिए गए हैं. उसे लिहाज कार्यकारिणी का परीक्षण किया जा रहा है और उसके बाद जल्द ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा कार्यकारिणी का अनुमोदन करके इसकी घोषणा कर देंगे.