पुष्कर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुष्कर के कड़ेल गांव में रात्रि चौपाल में ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि ग्रामीण चौपाल का उद्देश्य गांव में आकर ग्रामीणों से रू-ब-रू होना नहीं है. आमजन तक सरकार की योजनाओं को पहुंचना है. माताओं-बहनों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनना है. आज मैं यहां भाषण देने नहीं आया हूं. मैं धन्य हूं कि एक साथ आप सभी के दर्शन हुए. यह तीर्थराज पुष्कर की पावन धरती है. मैं खुद एक छोटे से गांव से जुड़ा हुआ हूं. गांव के विकास की चिंता हमेशा रहती है.
योजनाओं का लाभ आपको कैसे मिल रहा,ये जानने आया हूं. माता-बहनों का जीवन समाज के लिए समर्पित रहा है. महिलाओं का जीवन स्तर सुधरेगा तो गांव आगे बढ़ेगा. पीएम मोदी के 4 जातियां युवा, किसान, महिला और मजदूर संदेश का जिक्र किया. इन वर्गों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. तो गांव, तहसील, जिला और प्रदेश आगे बढ़ेगा. सरकार की योजनाएं इन्हीं वर्गों को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है. मैं भाषण देने नहीं, आपकी समस्याएं सुनने आया हूं. ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर समाधान का भरोसा दिया.
इस दौरान लखपती दीदी प्रियंका गोस्वामी से सीएम ने संवाद किया. कहा कि वास्तविकता बताना पहले जीवन में क्या था. और अब क्या परिवर्तन आया' ? प्रियंका गोस्वामी ने संघर्ष से सफलता तक का सफर साझा करते हुए कहा कि पहले समूह में जुड़ने से पहले गृहणी थी. मेरे दो संतान है. मेरे पति होटल में काम करते थे. और हमारी आर्थिक स्थिति खराब थी. प्रियंका के समूह का नाम "सिद्धि समूह" है. ग्राम संगठन का नाम "रामधन लक्ष्मी ग्राम संगठन" बताया.
पति होटल में मैनेजमेंट का कार्य करते हैं. पहले परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी. वर्ष 2018 में समूह से जुड़ने के बाद छोटी-छोटी बचत शुरू की. समूह से जुड़ने के बाद मुझे आत्मविश्वास और हिम्मत मिली. ग्राम संगठन बनने के 6 महीने बाद पुस्तक संचालन का कार्य मिला. पुस्तक संचालन के लिए 500 रुपए प्रतिमाह मिलने लगे. लखपति दीदी योजना के तहत 40 हजार रुपए का लोन मिला. लोन मिलने के बाद पशुपालन का काम शुरू किया. पशुपालन से अच्छा मुनाफा होने लगा. बाद में "डाटा सखी" के रूप में भी कार्य करने लगी. अब हर महीने 10 से 15 हजार रुपए की आय हो रही है. अब परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है. प्रियंका गोस्वामी ने सीएम और राजीविका योजना का आभार जताया.
वहीं रात्रि चौपाल में दूसरी लखपति दीदी लक्ष्मी कंवर ने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए कहा कि मैं पहले एक साधारण महिला थी, फिर समूह से जुड़ी. राजपूत समाज में पहले महिलाओं को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी. समाज की परंपराओं के चलते कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. मेरे पति ने हर कदम पर मेरा सहयोग किया. सोचा कि इससे बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. एक गाय और दो बकरी लेकर काम शुरू किया. पशुपालन से धीरे-धीरे आमदनी बढ़ने लगी. अब परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है. लखपति दीदी योजना और समूह से जुड़ने के बाद आत्मविश्वास बढ़ा है. लक्ष्मी कंवर महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल बनी.