UCC पर देश में बहस तेज... सियासत गरमाई, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का UCC पर जोरदार समर्थन, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः देश में समान नागरिक संहिता एक बड़ा मुद्दा है. भारत का संविधान article 44 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है. अलग अलग नागरिक कानूनों के चलते केंद्र की मोदी सरकार समान नागरिक संहिता यूं कहे UCC लाना चाह रही. संसद में इस मुद्दे पर लंबी बहस देखने को मिली. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पुरजोर तरीके से समान नागरिक संहिता के पक्ष में अपनी बात कही. मदन राठौड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय की आवश्यकता पर बल दिया है, वर्ष 1985 में Mohd. Ahmed Khan v. Shah Bano Begum के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि समान नागरिक संहिता राष्ट्रीय एकता और सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक है, इसके अतिरिक्त 1995 में Sarla Mudgal v. Union of India में भी न्यायालय ने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया था, हाल ही में भी सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम महिलाओं के उत्तराधिकार से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की. कि सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए समान नागरिक संहिता एक प्रभावी उपाय हो सकता है. समान नागरिक संहिता के तहत सभी धार्मिक समुदायों पर उनके व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने के मामले में समान रूप से लागू है. 

गोवा में भारत का एकमात्र राज्य है जहाँ स्वतंत्रता के पहले से ही पुर्तगाली शासन के समय से ही समान नागरिक संहिता' लागू है
 उत्तराखंड में फरवरी 2024 में उत्तराखंड विधानसभा ने 'समान नागरिक संहिता विधेयक' पारित किया गया
जिससे वह आजादी के बाद UCC लागू करने वाला पहला भारतीय राज्य बनने की राह पर है   

बीजेपी नेताओं का UCC को लेकर तर्क है कि  अलग-अलग कानूनों के बजाय एक कानून होने से देश में एकता की भावना प्रबल होगी कई व्यक्तिगत कानूनों में महिलाओं के अधिकार जैसे संपत्ति या तलाक में पुरुषों की तुलना में कम हैं UCC महिलाओं को समान अधिकार दिलाने में मदद करेगा. हालांकि विरोधियों का तर्क है भारत एक विविधताओं वाला देश है, एक समान कानून उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मिटा सकता है.