जयपुरः सरकारी नौकरी में दिव्यांगता प्रमाण पत्रों में फर्जीवाड़े के केसेस के चलते भजनलाल सरकार ने सख्त कदम उठाया है.सरकार ने राज्य के कई विभागों में कार्यरत दिव्यांगजन कर्मचारियों के प्रमाण-पत्रों की पुनः जांच अब राजकीय मेडिकल कॉलेज/हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड से की जाएगी.
भजनलाल सरकार ने दिव्यांगजन श्रेणी के तहत सरकारी सेवाओं में नियुक्ति और पदोन्नति के मामलों में पारदर्शिता और सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए नई प्रक्रिया लागू की है. इसे लेकर कार्मिक सचिव के के पाठक ने सीएस के अनुमोदन के बाद यह आदेश जारी किया है-
आदेश के अनुसार, राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत दिव्यांगजन कर्मचारियों के प्रमाण-पत्रों की पुनः जांच अब राजकीय मेडिकल कॉलेज/हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड से की जाएगी.
यह कदम प्रमाण-पत्रों में पाई जाने वाली अनियमितताओं और गलत पहचान (Impersonation) की आशंकाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिव्यांगजन को आरक्षण और छूट का लाभ तभी दिया जाएगा, जब वे न्यूनतम 40 प्रतिशत या उससे अधिक स्थायी दिव्यांगता के मानकों पर खरे उतरें.
कई मामलों में गलत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने या निर्धारित मानकों की कमी पाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं.
ऐसे मामलों में असली दिव्यांगजनों के अधिकारों का हनन होता है और यह आपराधिक कृत्य भी है.
इसलिए, सरकार ने अब कठोर सत्यापन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है.
नई व्यवस्था के तहत, सभी नवनियुक्त और पूर्व में नियुक्त दिव्यांगजन कर्मचारियों का मेडिकल बोर्ड द्वारा परीक्षण कराया जाएगा.
प्राथमिकता उन कर्मचारियों को दी जाएगी, जिन्हें पिछले पांच वर्षों में नियुक्ति मिली है.
मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थी/कार्मिक के हस्ताक्षर, दोनों अंगूठों के फिंगरप्रिंट और उच्च गुणवत्ता वाला फोटोग्राफ सुरक्षित किया जाएगा.
साथ ही, पुनः सत्यापन के समय संबंधित विभाग का एक अधिकारी भी मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित रहेगा. इसके अतिरिक्त, दिव्यांगता से संबंधित प्रमाण-पत्र अब भारत सरकार के "स्वावलंबन पोर्टल" से यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) के आधार पर जारी किए जाएंगे.
पुराने प्रमाण-पत्र धारकों को भी पुनः सत्यापन कर नए प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा. वहीं, सेवा संबंधी अन्य मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्रों को भी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराने की दिशा में चिकित्सा विभाग की ओर से व्यवस्था विकसित की जाएगी.
सरकार ने निर्देश दिया है कि मेडिकल जांच प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए.
कार्मिक विभाग पोर्टल पर अतिरिक्त सुविधा विकसित करेगा, जो चिकित्सा विभाग की ए.पी.आई. से इंटीग्रेटेड होगी.
इसके जरिए विभागीय अधिकारी डिजिटल सिग्नेचर से ऑनलाइन रिक्वेस्ट भेजेंगे और मेडिकल बोर्ड परीक्षण की तिथि व समय पोर्टल पर अंकित करेगा.
हाल ही में जाँच एजेंसियों ने फ़र्री दिव्यांगता प्रमाण पत्रों से नियुक्ति के मामले पकड़े थे. ऐसे में
राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल गलत प्रमाण-पत्रों पर रोक लगेगी, बल्कि वास्तविक दिव्यांगजन कर्मचारियों को उनके अधिकार और अवसर भी सुनिश्चित होंगे.