ग्रामीण चटोर: मिथिला की पारंपरिक विरासत से निकला वह ब्रांड, जो स्वाद के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के सहारे सैकड़ों घरों को आत्मनिर्भर बना रहा है

ग्रामीण चटोर: मिथिला की पारंपरिक विरासत से निकला वह ब्रांड, जो स्वाद के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के सहारे सैकड़ों घरों को आत्मनिर्भर बना रहा है

गुरुग्राम (हरियाणा):  किसी भी घर की मजबूती उसकी रसोई से शुरू होती है. आज भारत के कई घरों में जो रसोई सही तरीके से चल रही है, उसके पीछे ग्रामीण चटोर नाम का एक ब्रांड खड़ा है. यह कहानी सिर्फ स्वाद की नहीं, बल्कि उन महिलाओं की है जिनकी मेहनत से आज उनके घर आत्मनिर्भर हो पाए हैं. राजेश गुप्ता द्वारा शुरू किया गया ग्रामीण चटोर मिथिला की पारंपरिक खाद्य विरासत को देशभर तक पहुँचा रहा है. लेकिन इसके साथ-साथ यह ब्रांड ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार देकर उनके जीवन में स्थिरता और आत्मसम्मान भी ला रहा है.

परंपरा से जुड़ा स्वाद, भरोसे से बना रिश्ता
ग्रामीण चटोर के हर उत्पाद में मिथिला की मिट्टी की खुशबू है. पारंपरिक रेसिपी, शुद्ध सामग्री और घरेलू तरीकों से तैयार किए गए ये उत्पाद उपभोक्ताओं को उस दौर की याद दिलाते हैं, जब स्वाद के साथ भरोसा भी परोसा जाता था. यही कारण है कि ग्रामीण चटोर आज केवल एक फूड ब्रांड नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद नाम बन चुका है.

🔗 वेबसाइट: https://grameenchator.com/

महिलाएँ जो सिर्फ काम नहीं करतीं, घर संभालती हैं
आज ग्रामीण चटोर से जुड़ी 25 से अधिक महिलाएँ अपने परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारी उठा रही हैं. पहले जहाँ कई महिलाओं की आमदनी शून्य या अस्थायी थी, आज वही महिलाएँ नियमित कमाई के ज़रिए घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी कर पा रही हैं. इन महिलाओं के लिए ग्रामीण चटोर सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक सहारा है-जिससे उनका घर चलता है.

राजेश गुप्ता की सोच: मुनाफ़े से पहले इंसान
संस्थापक राजेश गुप्ता मानते हैं कि किसी भी व्यवसाय की असली सफलता तब होती है, जब उसका असर लोगों की ज़िंदगी पर दिखे. इसी सोच के साथ उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण, सम्मान और सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान किया. आने वाले समय में कंपनी का लक्ष्य 100 से अधिक महिलाओं को रोज़गार देना है, ताकि यह बदलाव और बड़े स्तर पर पहुँच सके.
🔗 हमारे बारे में: https://grameenchator.com/about-us/

 

🔗 इंस्टाग्राम: https://www.instagram.com/grameenchator

निष्कर्ष
ग्रामीण चटोर यह साबित कर रहा है कि जब स्वाद के साथ संवेदना जुड़ जाए, तो एक ब्रांड समाज को बदलने की ताकत बन सकता है. यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि भरोसे और बदलाव की कहानी है.

DISCLAIMER: The above press release has been provided by the agency. First India will not be responsible in any way for the content of the same. The story has come from an agency and has not been edited by the First India Staff.