जयपुरः राजस्थान विधानसभा का "LOGO" लॉन्च हुआ. विधानसभा के विभिन्न द्वारों का नामकरण कार्यक्रम हुआ. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने संबोधित करते हुए कहा कि 1952 का वोटिंग बैलेट पेपर से नहीं हुआ. बल्कि डब्बों के जरिए वोटिंग हुई. राजस्थान विधानसभा से पहले 1913 में यहां विधानसभा थी. जिसे प्रतिनिधि सभा कहा गया. बीकानेर रियासत में आजाद भारत से पहले विधानसभा थी. महाराजा गंगा सिंह के समय प्रतिनिधि सभा थी. उस समय वोटिंग भी हुई बैलेट पेपर से प्रतिनिधि चुने गए. स्वतंत्र के बाद स्वतंत्र के पहले भी विधानसभा थी. पंडित नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखा है. सम्राट अशोक के कालखंड में निगम समितियां थी सदस्य चुन कर आते थे. इसका अर्थ है आजाद भारत से वर्षों पहले यहां लोकशाही थी.
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने प्रेस से रूबरू होते हुए कहा कि आज विधानसभा के LOGO का अनावरण हुआ. काफी दिनों से हम LOGO के मूल भाव सोच रहे थे. अशोक स्तंभ-न्याय और सबको साथ चलने की भावना. खेजड़ी राज्य वृक्ष, ऊंट राज्य पशु और राज्य पक्षी गोडावण का उल्लेख. राजस्थान विधानसभा केबल एक विधायिका नहीं रहेगी. बल्कि जन साधारण की भावनाओं के अनुरूप है.
इसी तरह विधानसभा के 13 द्वारों का नामकरण किया गया. नामों का नामकरण भौगोलिक संस्कृतियों के अनुसार किया. कर्तव्य द्वार उस द्वार का नाम जहां से महामहिम,स्पीकर और मुख्यमंत्री आते हैं. विधानसभा के म्यूजियम को 45हजार से अधिक लोग देख चुके. अब ये म्यूजियम आम जन के लिए समर्पित है. जल्द ही UP विधानसभा की तर्ज पर ऑडोटोरियम बनेगा.