बेशकीमती भूमि के मामले में हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश, ग्रीन फायर हॉस्पिटल को निर्धारित अवधि में देनी होगी भूमि, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजधानी के जवाहरलाल नेहरू मार्ग की 200 फीट पट्टी में शामिल बेशकीमती भूमि के मामले में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं. इस आदेश के मुताबिक जेडीए को निर्धारित अवधि में भूमि ग्रीन फायर हॉस्पिटल को देनी होगी. उधर यह भूमि अस्पताल के लिए देने  के खिलाफ स्थानीय कॉलोनियों के निवासी लामबंद हैं.

यह मामला जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर वर्ल्ड ट्रेड पार्क के सामने स्थित मौके की 23 हजार 633 वर्गगज भूमि का है. मामले में जेडीए की सहमति के आधार पर लोक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू मार्ग की दो सौ फीट पट्टी में शामिल यह भूमि इस पर दावा करने वाले पक्षकारों को देने का फैसला किया था. लेकिन इस फैसले के बावजूद भूमि नहीं देने पर ग्रीन फायर हॉस्पिटल की ओर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई. इस याचिका पर हाईकोर्ट ने जेडीए को हिदायत दी है लोक अदालत के फैसले की पालना में यह भूमि 2 जुलाई से पहले ग्रीन फायर हॉस्पिटल को दी जाए. ऐसा नहीं करने पर 2 जुलाई को जेडीए आयुक्त को खुद पेश होने का आदेश दिया है.  पिछले भाजपा राज में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निर्देश पर जेडीए ने भूमि पर जमा गंदगी व कचरे के ढेर को हटाते यहां हरियाली विकसित की थी. जेडीए ने भूमि पर हरियाली विकसित करते हुए उस पर जॉगिंग ट्रेक भी बना दिया. आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है?

- जेडीए ने 9 सितंबर 2003 को ग्रीन फायर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड को 17 हजार 433 वर्गगज भूमि आवंटित की थी
- जेडीए ने 25 सितंबर 2003 को इस फर्म को जेएलएन मार्ग की इसी दो सौ फीट पट्टी की 6200 वर्गगज भूमि भी आवंटित की
- 1 अक्टूबर 2003 को जेडीए ने कुल 23 हजार 633 वर्गगज भूमि का पट्टा भी फर्म को जारी कर दिया
- जय जवान कॉलोनी तृतीय की आवंटी रतन प्रभा जैन व अन्य आवंटियों ने जेडीए अपीलीय ट्रिब्यूनल में याचिका लगाई
- इस याचिका में इन लोगों ने दो सौ फीट पट्टी की आवंटित 6200 वर्गगज भूमि खुद को आवंटित होना बताया
-जय जवान गृह निर्माण सहकारी समिति की ओर से यह भूमि आवंटित होना बताया
- जेडीए अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 24 जनवरी 2006 को फैसला देकर भूमि के आवंटन के आदेश निरस्त कर दिए
- इसके खिलाफ फर्म ने हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका दायर की
-हाईकोर्ट ने 7 फरवरी 2006 को आदेश जारी कर ट्रिब्यूनल के आदेश को स्टे कर दिया
-हाईकोर्ट ने मामले में 30 नवंबर 2016 को फर्म की रिट स्वीकार करते हुए अंतिम आदेश जारी किए
-इसी बीच प्रदेश की तत्कालीन वसुंधरा सरकार के दूसरे कार्यकाल में जब इस भूमि पर गंदगी व कचरा हटाकर जेडीए ने हरियाली विकसित की थी
-तब इस जमीन का मामला अदालत में लंबित चल रहा था
-तब सरकार का स्पष्ट मत था कि यहां स्थाई तौर पर पार्क विकसित नहीं किया है
-पार्क विकसित करने पर ग्रीन फायर हॉस्पिटल ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाई थी
-तब जेडीए हाईकोर्ट में जवाब दिया था कि स्थाई तौर पर पार्क विकसित नहीं किया है
-भूखंड आवंटन की मांग को लेकर रतन प्रभा जैन व अन्य आवंटियों की याचिका हाईकोर्ट की खंडपीठ में लंबित थी
-बाद में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह मामला लोक अदालत को भेजा
-मामले में शामिल जेडीए सहित अन्य पक्षों की सहमति के आधार पर लोक अदालत ने मामले में आदेश दिए
-लोक अदालत ने ग्रीन फायर हॉस्पिटल को 17 हजार 433 वर्गगज भूमि का पट्टा देने के जेडीए को आदेश दिए
-शेष 6 हजार 200 वर्गगज के पट्टे रतन प्रभा जैन व अन्य भूखंडधारियों को देने के आदेश दिए
-इस आदेश की पालना नहीं होने पर ग्रीन फायर हॉस्पिटल की ओर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई गई
-इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश बिपिन गुप्ता की बेंच ने लोक अदालत के फैसले की पालना के आदेश दिए
-मामले में ग्रीन फायर हॉस्पिटल की तरफ से अधिवक्ता नितेश बागड़ी ने पैरवी की
-अधिवक्ता नितेश बागड़ी ने बताया कि हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को तय की है
-हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक अगली सुनवाई की तिथि से पहले जेडीए को आदेश की पालना करनी है
-और आदेश की पालना कर पालना रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करनी है
-ऐसा नहीं करने पर जेडीए आयुक्त को हाई कोर्ट में अगली तिथि पर हाजिर होने के आदेश दिए हैं.

इस भूमि पर विकसित किए गए पार्क पर आस-पास की कॉलोनियों के लोग घूमने आते हैं. भूमि पर पार्क यथावत रखने और भूमि हॉस्पिटल के लिए नहीं देने की मांग पर स्थानीय लोग लामबंद हैं.    

-भूमि पर पार्क ही रखने की मांग को लेकर आदिनाथ नगर विकास समिति की ओर से ज्ञापन दिया गया है
-मुख्यमंत्री,नगरीय विकास मंत्री और स्थानीय विधायक को ज्ञापन दिया  गया है
-ज्ञापन में कहा गया है कि आस-पास स्थित 15 कॉलोनियों के लोगों के लिए यही पार्क है
-इस भूमि के पूर्वी छोर में नाला बहता है,इसके दोनों तरफ की बफर स्ट्रिप में यह भूमि मौजूद है
-ज्ञापन में आरोप लगाया कि वास्तविक तथ्यों को छिपाते हुए लोक अदालत से आदेश कराया गया है
-दूसरी तरफ विकास समिति की जनहित याचिका हाई कोर्ट में लंबित है
-ज्ञापन में कहा गया है कि क्षेत्र में पहले से ही ईएचसीसी,फोर्टिस,राजस्थान हॉस्पिटल,
-जयपुरिया हॉस्पिटल जैसे 10 प्रमुख अस्पताल है.
-ऐसे में हरियाली उजाड़कर एक और अस्पताल के लिए भूमि उपलब्ध कराना सही नहीं हैं