इकोलॉजिकल जोन में काट रहे अवैध कॉलोनियां, स्थानीय लोग जेडीए में दर्ज करा चुके कई बार शिकायतें, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजधानी में भू कारोबारी बेखौफ होकर अवैध कॉलोनियां बसाने में लगे हुए हैं. भू कारोबारी कृषि भूमि का लैंड कंवर्जन करवाए बिना ही अवैध कॉलोनियां बसाने में लगे हैं. ऐसा ही एक मामला दिल्ली हाईवे के पास आमेर के ठाठर गांव में बसाई जा रही अवैध कॉलोनियां का है. 

राजधानी के इकोलॉजिकल जोन में किसी भी तरह की आवासीय या कॉमर्शियल कॉलोनी बसाई पर सख्त पाबंदी है, बावजूद इसके भू कारोबारी धडल्ले से अवैध बसावट करने में लगे हुए हैं. ऐसी ही दो अवैध कॉलोनियां जेडीए जोन 2 में जयपुर दिल्ली हाईवे के पास आमेर के ठाठर गांव में नाहरगढ़ सेंचुरी से जुड़ी अरावली पहाड़ी की तलहटी में बसाई जा रही है. यहां पर प्राइम सिटी और मोहम्मद नगर के नाम से कॉलोनी काटी गई है. प्राइम सिटी चालीस बीघा कृषि भूमि पर है. इसके पास ही दस बीघा कृषि भूमि पर अवैध तरीके से मोहम्मद नगर बसाया जा रहा है. ये पूरा क्षेत्र ईको-सेंसेटिव जोन में है. यहां पर किसी भी तरह की कॉलोनी, होटल-मोटल या कमर्शियल निर्माण पर पूर्णतया पाबंदी है. लेकिन भू कारोबारियों में किसी भी तरह का भय नहीं है.

-जेडीए के मास्टर प्लान और गुलाब कोठारी प्रकरण में हाई कोर्ट के आदेश अनुसार यहां अवैध बसावट नहीं की जा सकती है
-लेकिन भू कारोबारियों को ना तो राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की परवाह है और ना ही जेडीए की कार्रवाई का डर है
-कीर्ति स्तम्भ आमेर निवासी शंकर लाल सैनी, नियाज उददीन खान समेत अन्य लोगों ने बताया कि
-जेडीए के आईजी राहुल कोटोकी,एडिशनल एसपी शिल्पा चौधरी समेत अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायतें दे चुके हैं
-और रोज कंट्रोल रुम पर शिकायतें भी दे रहे हैं, लेकिन जेडीए कार्रवाई नहीं कर रहा है
-यहां दिन रात भूखंडों की चारदीवारी बनाई जा रही है. मकान भी बनने लगे हैं.
-ईको सेंसेटिव जोन में नाहरगढ़ सेंचुरी से सटी पहाड़ी के नीचे चालीस बीघा जमीन पर प्राइम सिटी के नाम से अवैध कॉलोनी बसाई जा रही है
-शर्मा कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स यह कॉलोनी बसा रहा है
-इस कंपनी से जुड़े बद्री विशाल शर्मा, सुनील अग्रवाल व अन्य भागीदार लोगों को गुमराह करके भूखण्ड बेचने में लगे हुए हैं
-ये लोग प्राइम सिटी के नाम से पजेशन लेटर दे रहे हैं, जिसमें रेरा की तर्ज पर नम्बर की मुहर लगी हुई.
-भू-माफिया यह कहकर लोगों को भूखण्ड बेच रहे हैं कि यह स्कीम रेरा से पंजीकृत है और जेडीए से भी अप्रूव्ड हो चुकी है, जेडीए कार्यवाही नहीं करेगा
-जबकि हकीकत यह है कि यह स्कीम पूर्णतया अवैध है रेरा और जेडीए से मंजूरी नहीं है

यह इलाका नाहरगढ़ वन अभ्यारण्य के इको सेंसेटिव जोन में शामिल है. इसके चलते यहां नई कॉलोनी बसाई नहीं जा सकती. बावजूद इसके भू-माफिया और कंपनी के दलाल लोगों को गुमराह करके भूखंड बेचने में लगे हुए हैं. प्राइम सिटी से लगती दस बीघा जमीन पर काटी जा रही अवैध कॉलोनी मोहम्मद नगर में भी धड़ल्ले से भूखण्ड बेचे जा रहे हैं. 

-प्राइम सिटी में 1027 भूखण्ड है,इसमें से 984 भूखण्ड तो आवासीय है और 43 भूखण्ड कॉमर्शियल हैं
-मुख्य सडक़ चालीस फीट है और अंदर की पच्चीस फीट है
-चालीस फीट पर 20 हजार प्रति वर्गगज के हिसाब से भूखण्ड बेचे जा रहे हैं तो पच्चीस फीट पर 25 हजार प्रति वर्गगज के भाव हैं
-कमर्शियल भूखण्ड 30 हजार रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से बेच रहे हैं
-इसी तरह मोहम्मद नगर में भी 124 भूखण्ड हैं,वहां भी दस से पन्द्रह हजार रुपये के भाव से भूखण्ड बेचे जा रहे हैं
-मोहम्मद नगर तो पूरी तरह से पहाड़ी की तलहटी के नीचे नाहरगढ़ सेंचुरी की जमीन से सटा हुआ है
-दोनों ही कॉलोनियों में चारदीवारी बनाने का काम चल रहा है, कुछ ने तो घर भी बना लिए ,लेकिन बिजली के कनेक्शन नहीं होने से कोई रहता नहीं है.
-इको सेंसिटिव जोन में शामिल जमीनों में किसी भी तरह की आवासीय, कमर्शियल और अन्य गतिविधियों पर पूर्णतया रोक है
-सुप्रीम कोर्ट ने जमवारामगढ़ सेंचुरी, नाहरगढ़ सेंचुरी के कई गांवों में जमीनों के बेचान और रजिस्ट्री पर रोक लगा रखी है
-नाहरगढ़ व जमवारामगढ़ सेंचुरी और उससे जुड़ी पहाडिय़ां अरावली पर्वतमाला में आती है
-सेंचुरी से जुड़ी बहुत सी कॉलोनियों के मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित है
-सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर मास्टर प्लान और ईको सेंसेटिव जोन में आवासीय कॉलोनी बसाने पर रोक के आदेश के बावजूद कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स अवैध कॉलोनी बसाने में लगे हुए हैं
-जेडीए, वन विभाग और तहसील कार्यालय आमेर भी लिखित शिकायतों के बावजूद भू-माफियाओं को संरक्षण देने में लगे हुए हैं
 -शर्मा कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स के निदेशक बद्री विशाल शर्मा, सुनील अग्रवाल का कहना है कि
-यह जमीन हमारी नहीं है बल्कि जमीन और कंपनी गज सिंह की है. हम तो कर्मचारी हैं. इसलिए पजेशन लेटर पर साइन हैं.