राजस्थान में दवा के लिए मरीज, भुगतान के लिए कैमिस्ट "चक्करघिन्नी", प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के आह्वान पर स्वास्थ्य भवन में जुटे कैमिस्ट

जयपुर: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में भुगतान को लेकर निजी अस्पतालों के बाद अब दवा विक्रेताओं ने भी खुलकर मोर्चा खोल दिया है.प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के आह्वान पर प्रदेशभर के कैमिस्ट आज स्वास्थ्य भवन में एकत्र हुए.इस दौरान उन्होंने सांकेतिक विरोध जताते हुए धरना दिया.इस दौरान समिति के अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय,सचिव रवि गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल ने RSHAA CEO हरजीलाल अटल के साथ वार्ता भी की, लेकिन लम्बित भुगतान ये भी आश्वासन दिया गया कि बजट की उपलब्धता के हिसाब से ही आगे पेमेंट हो पाएगा.

इस दौरान RSHAA CEO हरजीलाल अटल ने  RGHS में व्याप्त गड़बड़ियों को दुरूस्त करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए है.कई प्रस्ताव भी बनाए गए है, जो उच्च स्तर पर विचाराधीन है.यदि भुगतान की बात की जाए तो सभी स्टेक हॉल्डर्स को रेगुलर भुगतान की प्रक्रिया जारी है.बकाया भुगतान के बिल भी जांच पड़ताल के बाद फाइनल करके भेजे जा चुके है.जैसे जैसे बजट की उपलब्धता होगी, कैमिस्ट को बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा.

प्रदेश में दवा के लिए मरीज, भुगतान के लिए कैमिस्ट "चक्करघिन्नी"
-प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के आह्वान पर स्वास्थ्य भवन में जुटे कैमिस्ट
-करीब छह माह से अधिक समय का भुगतान लम्बित होने से कैमिस्ट में आक्रोश
-सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के जरिए RGHS अधिकृत केमिस्ट ने जताया विरोध
-दिनभर के प्रदर्शन के दौरान सभी कैमिस्ट ने RGHS में कामकाज रखा बन्द
-समिति के अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय,सचिव रवि गुप्ता के नेतृत्व में हुई वार्ता
-पुलिस की मौजूदगी में RSHAA CEO हरजीलाल अटल के साथ हुई वार्ता
-हालांकि,वार्ता के दौरान स्पष्ट किया गया कि रेगुलर भुगतान की प्रक्रिया जारी है
-बकाया भुगतान के बिल भी जांच पड़ताल के बाद फाइनल करके भेजे जा चुके है
-जैसे जैसे बजट की उपलब्धता होगी, कैमिस्ट को बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा
-इस दौरान कैमिस्ट ने भी अपनी पीड़ा जताते हुए बताया कि लम्बे समय से अटका है भुगतान
-भुगतान में देरी के चलते प्रदेशभर के कैमिस्ट के सामने खड़ा हुआ बड़ा वित्तीय संकट
-मजबूरन अधिकांश दवा विक्रेताओं ने RGHS में काम करने से बना रखी दूरी
-TPA की मनमानी को लेकर भी वार्ता में दिए गए दस्तावेजों के साथ प्रमाण
-साथ ही बताया गया कि ऐसे हालात में दवाओं के लिए भटकने को मजबूर सैंकड़ों मरीज
-करीब एक घंटे तक चली वार्ता में नहीं बन पाई सहमति, जारी रहेगा आगे भी विरोध