VIDEO: जयपुर में जहरीली गैस से 2 की मौत,सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: झोटवाड़ा जोन क्षेत्र में शेखावत मार्ग पर एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला हादसा सामने आया. सीवरेज टैंक की सफाई के लिए उतारे गए दो कर्मचारियों की जहरीली गैस के रिसाव से दम घुटने के कारण मौके पर ही मौत हो गई. यह हादसा न सिर्फ मानवीय लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों और नगर निगम की प्रक्रियाओं की खुलेआम अनदेखी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. 

झोटवाडा जोन का ये हादसा जैसी ही चर्चाओं में आया हर कोई स्तब्ध रह गया सूत्रों के अनुसार, सीवरेज टैंक की सफाई का कार्य शेखावत कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा था. इसी दौरान दो कर्मचारी एक-एक कर टैंक के अंदर उतरे, लेकिन कुछ ही मिनटों में उनकी हालत बिगड़ गई. टैंक के भीतर जहरीली गैस के कारण दोनों का दम घुटने लगा और वे बेहोश हो गए. घटना की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई. सूचना पाकर पुलिस प्रशासन, नगर निगम के अधिकारी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे. स्थानीय सहायता और पुलिस की मदद से दोनों कर्मचारियों को सीवरेज टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल एम्बुलेंस से कांवटिया अस्पताल भिजवाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. हादसे की खबर फैलते ही शेखावत मार्ग पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस जाब्ता बुलाना पड़ा. पूरे मामले पर नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए जांच कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार किसी भी व्यक्ति को सीवरेज टैंक में उतारना प्रतिबंधित है, तो फिर यह हादसा कैसे हुआ.

नगर निगम द्वारा सीवरेज जैसे कार्य सौंपने से पहले संबंधित ठेकेदार से यह शपथ पत्र लिया जाता है कि किसी भी कर्मचारी को सीवरेज टैंक में नहीं उतारा जाएगा और आधुनिक मशीनों के माध्यम से ही कार्य किया जाएगा. इसके बावजूद कर्मचारियों को टैंक में उतारना सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन और मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन दो कर्मचारियों की मौत का जिम्मेदार कौन है? ठेकेदार, निगरानी करने वाले अधिकारी या फिर पूरी व्यवस्था? क्या यह सिर्फ एक हादसा है या लापरवाही की एक और दुखद कड़ी? जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल दो परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं और सिस्टम की संवेदनहीनता एक बार फिर उजागर हो गई है.

यह हादसा प्रशासन और नगर निगम के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि नियम सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी लागू होने चाहिए, वरना ऐसे हादसे यूं ही लोगों की जान लेते रहेंगे.