अब सूना हुआ जैसलमेर का एयरपोर्ट, 6 माह के लिए उड़ानों पर विराम, पर्यटन और व्यापार पर असर

अब सूना हुआ जैसलमेर का एयरपोर्ट, 6 माह के लिए उड़ानों पर विराम, पर्यटन और व्यापार पर असर

जैसलमेर : “स्वर्णनगरी जैसलमेर… जहां कुछ दिन पहले तक हवाई यात्रियों की चहल-पहल थी, आज वहां सन्नाटा है. विंटर शेड्यूल खत्म होते ही जैसलमेर एयरपोर्ट पर सिविल उड़ानों पर छह महीनों के लिए विराम लग गया है. आखिरी फ्लाइट शनिवार शाम बेंगलुरु के लिए रवाना हुई. और उसके बाद सिविल टर्मिनल सूना हो गया. इस बंदी का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन, होटल उद्योग और स्थानीय व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है. 

स्वर्णनगरी का जैसलमेर एयरपोर्ट आज रविवार से पूरी तरह सूना हो गया है. विंटर शेड्यूल की आखिरी फ्लाइट शनिवार शाम 4:30 बजे बेंगलुरु के लिए रवाना हुई और इसके साथ ही अगले छह महीनों के लिए सिविल उड़ानों पर अस्थायी विराम लग गया. जिसके बाद से एयरपोर्ट के सिविल टर्मिनल पर सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है, जहां कुछ समय पहले तक यात्रियों की चहल-पहल और अनाउंसमेंट की आवाजें गूंजती थीं.अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक चले विंटर सीजन में पहली बार 2.40 लाख यात्रियों ने जैसलमेर से हवाई यात्रा की. यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक रहा और इससे यह संकेत मिला कि जैसलमेर की हवाई कनेक्टिविटी तेजी से मजबूत हो रही है. लगातार बढ़ती यात्री संख्या ने एयरलाइंस कंपनियों को भी अतिरिक्त उड़ानें बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.सीजन की शुरुआत में केवल दिल्ली के लिए एक फ्लाइट संचालित हो रही थी, लेकिन मांग बढ़ने के साथ उड़ानों की संख्या बढ़ाकर रोजाना 6 तक कर दी गई. दिल्ली, मुंबई, जयपुर, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध रहीं, जिससे पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों को बड़ी राहत मिली. इस बार पहली बार शुरू हुई बेंगलुरु-जैसलमेर सीधी उड़ान को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला. यह फ्लाइट पूरे सीजन लगभग फुल रही और एयरलाइंस के लिए फायदे का सौदा साबित हुई. वहीं जयपुर रूट पर अपेक्षाकृत कम यात्री संख्या दर्ज की गई.

उड़ानें बंद होते ही पर्यटन उद्योग पर इसका सीधा असर दिखने लगा है. होटल व्यवसायियों, टूर ऑपरेटरों, टैक्सी चालकों और गाइड्स के अनुसार अचानक बुकिंग में गिरावट आई है. कई होटलों में पहले से तय बुकिंग्स भी रद्द होने लगी हैं. पर्यटन व्यवसायी अविनाश बिस्सा का ने बताया कि हवाई कनेक्टिविटी के दौरान जहां शहर में रौनक रहती है, वहीं उड़ानें बंद होते ही पर्यटकों की संख्या तेजी से घट जाती है.स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि एयरपोर्ट बंद होने से व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है. जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिले में हवाई सेवा तेज और सुविधाजनक परिवहन का प्रमुख साधन है. इसके बंद होने से व्यापारिक यात्राएं प्रभावित होती हैं और लोगों को अधिक समय और खर्च उठाना पड़ता है. सिविल उड़ानें बंद होने के बाद यात्रियों को अब जोधपुर या जयपुर जैसे शहरों का रुख करना पड़ेगा. इससे यात्रा का समय बढ़ेगा और अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ेगा. आम लोगों ने इसे असुविधाजनक बताते हुए सालभर हवाई सेवाएं शुरू रखने की मांग की है.

पर्यटन विशेषज्ञ का कहना है कि जैसलमेर जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के लिए सालभर हवाई सेवाएं जरूरी हैं. उनका सुझाव है कि ऑफ-सीजन में किफायती किराए और प्रमोशनल ऑफर्स के जरिए भी यात्रियों को आकर्षित किया जा सकता है, जिससे एयरलाइंस और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ होगा. जैसलमेर जैसे विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के लिए हवाई कनेक्टिविटी कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है. पिछले विंटर सीजन के आंकड़े बताते हैं कि जब जैसलमेर एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें संचालित होती हैं, तो पर्यटकों की संख्या, होटल ऑक्यूपेंसी, स्थानीय रोजगार और व्यापार—सभी में सीधा उछाल आता है. यही वजह है कि विशेषज्ञ मानते हैं, साल में केवल छह महीने नहीं, बल्कि पूरे साल सीमित लेकिन नियमित उड़ानें जारी रहनी चाहिए.ऑफ-सीजन में कम किराए, प्रमोशनल पैकेज, और टूरिज्म-एयरलाइंस के संयुक्त अभियान के जरिए यात्रियों को आकर्षित किया जा सकता है. इसके साथ ही, सरकार और एयरलाइंस के बीच समन्वय से ‘वायबिलिटी सपोर्ट’ जैसे मॉडल अपनाए जाएं, ताकि कम यात्री संख्या के बावजूद उड़ानें आर्थिक रूप से संभव रहें.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सालभर कनेक्टिविटी बनी रहे, तो जैसलमेर केवल विंटर डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि 12 महीने सक्रिय पर्यटन और व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर सकता है.

एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार यह बंदी अस्थायी है और आगामी विंटर सीजन, यानी अक्टूबर 2026 से फिर से उड़ानों का संचालन शुरू किया जाएगा. तब तक एयरपोर्ट पर केवल सीमित गतिविधियां ही जारी रहेंगी.फिलहाल जैसलमेर एयरपोर्ट पर सन्नाटा पसरा हुआ है. जहां कुछ दिन पहले तक विमानों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ नजर आती थी, वहां अब खाली रनवे और गर्म हवाएं ही दिखाई दे रही हैं. अब पूरे शहर की नजरें अगले पर्यटन सीजन पर टिकी हैं, जब एक बार फिर उड़ानों के साथ जैसलमेर की रौनक लौटेगी.