अब बिना पूरी जांच नहीं मिलेगी फिटनेस, ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर सख्ती, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः परिवहन विभाग ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के माध्यम से वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब किसी भी वाहन को बिना भौतिक एवं मैकेनिकल जांच के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा. ऐसा करने पर अब FIR दर्ज करवाई जाएगी 

नए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक वाहन की पूरी मैकेनिकल और भौतिक जांच अनिवार्य होगी. ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, लाइटिंग सिस्टम, उत्सर्जन स्तर सहित सभी आवश्यक मानकों की जांच के बाद ही फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किया जा सकेगा. यदि निरीक्षण अधूरा पाया गया तो संबंधित ATS संचालक और अधिकृत निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी. विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन फिटनेस जांच की अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी है. प्रति घंटे अधिकतम 6 LMV/HMV वाहनों की ही जांच की जा सकेगी. इससे जल्दबाजी में औपचारिक जांच कर फिटनेस जारी करने पर रोक लगेगी.हर वाहन की फिटनेस प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करना अब जरूरी होगा. दोपहिया वाहनों के लिए कम से कम 7 मिनट और अन्य वाहनों (LMV/HMV) के लिए न्यूनतम 10 मिनट की रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है. वीडियो में वाहन का नंबर, चेसिस नंबर, चालक की उपस्थिति और पूरी निरीक्षण प्रक्रिया स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए. इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है 

जब तक AFMS पोर्टल पर वीडियो अपलोड की सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तब तक प्रत्येक सोमवार जिला परिवहन अधिकारी (DTO) को पेन ड्राइव के माध्यम से सभी रिकॉर्डिंग उपलब्ध करानी होगी. साथ ही हर माह की 10 तारीख तक इन वीडियो का संकलन मुख्यालय भेजना अनिवार्य रहेगा.वीडियो रिकॉर्ड कम से कम 6 माह तक सुरक्षित रखना भी आवश्यक किया गया है, ताकि भविष्य में किसी शिकायत या जांच की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहे.जिला परिवहन अधिकारी को भी जवाबदेह बनाया गया है. उन्हें प्रत्येक माह की 5 तारीख तक वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कर प्रमाण-पत्र मुख्यालय को भेजना होगा. यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई संभव है.यदि जांच में यह पाया गया कि बिना सही निरीक्षण के फिटनेस जारी की गई है, तो ATS मालिक और अधिकृत निरीक्षक के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी. कार्रवाई भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 318, 336, 340, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 43 और 72 तथा मोटर वाहन नियमों के तहत की जाएगी.परिवहन विभाग के इस फैसले को सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. विभाग का मानना है कि सख्ती से फिटनेस जांच होने पर सड़कों पर चलने वाले असुरक्षित और खराब हालत के वाहनों की संख्या में कमी आएगी. अब ATS संचालकों और वाहन मालिकों को नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा, अन्यथा सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहना पड़ेगा.