जयपुरः देशभर में चलने वाले टूरिस्ट वाहनों के लिए 1 अप्रैल से नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ऑल इंडिया टूरिस्ट व्हीकल (परमिट) नियम, 2023 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए सख्ती बढ़ा दी है. इन बदलावों का सीधा असर टूर ऑपरेटरों, बस मालिकों और टैक्सी संचालकों पर पड़ेगा.
अब सभी ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLT) डिवाइस और पैनिक बटन अनिवार्य होगा. बिना ट्रैकिंग सिस्टम और इमरजेंसी बटन के वाहन का परमिट जारी नहीं किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सकेगी.चालान और टोल बकाया को लेकर भी सख्ती की गई है. यदि किसी वाहन पर 45 दिन से अधिक पुराना चालान लंबित है, तो उसका परमिट प्रभावित होगा. इसके अलावा जिन वाहनों पर नेशनल हाईवे का अनपेड यूजर फीस (टोल बकाया) होगा, उन्हें नया परमिट नहीं मिलेगा. यानी अब नियमों की अनदेखी करना सीधे तौर पर व्यवसाय पर भारी पड़ सकता है.डिजिटल वेरिफिकेशन को भी अनिवार्य कर दिया गया है. वाहन का बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट, PUC, टैक्स भुगतान और संचालक की आधार/CIN/GST जानकारी की ऑनलाइन जांच होगी. बिना डिजिटल सत्यापन के परमिट स्वीकृत नहीं होगा. इससे फर्जी दस्तावेजों और कागजी हेरफेर पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है.
एक बड़ा बदलाव संचालन व्यवस्था को लेकर भी है. टूरिस्ट परमिट वाहन अब स्टेज कैरिज (सामान्य सवारी) की तरह संचालन नहीं कर सकेंगे. यानी ये वाहन रास्ते में आम यात्रियों को उठाकर किराया नहीं ले सकेंगे. केवल पूर्व निर्धारित समूह या बुकिंग के आधार पर ही संचालन की अनुमति होगी. यदि कोई वाहन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो परमिट रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है.अब हर यात्रा का पूरा विवरण वाहन में रखना अनिवार्य होगा. मूल स्थान, गंतव्य, तय मार्ग और यात्रियों की सूची इलेक्ट्रॉनिक या फिजिकल रूप में साथ रखना जरूरी होगा. जांच के दौरान दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर दंडात्मक कार्रवाई संभव है.होम स्टेट से बाहर संचालन की समय सीमा भी तय कर दी गई है. टूरिस्ट वाहन अपने गृह राज्य से बाहर 60 दिन से अधिक नहीं रह सकेगा. इससे दूसरे राज्यों में स्थायी रूप से संचालन करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी.सभी टूरिस्ट वाहनों की निगरानी अब कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी. ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी, जिससे नियमों के उल्लंघन की स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव होगी.