जयपुर : SMS स्टेडियम में शौर्य संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सेना दिवस के इस मौके पर आपके बीच होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. आज के दिन उन जवानों और वीरों की वीरता को नमन.
राजस्थान की इस धरती ने शौर्य परंपरा को हमेशा आगे बढ़ाया है. यहां के वीरों ने भारत माता की सेवा में अपने जिस्म का रक्त बहाया. महाराणा प्रताप की तलवार से लेकर राणा सांगा के शौर्य, त्याग और मीराबाई की भक्ति प्रसिद्ध है. यहां के सभी समुदाय के वीरों ने सेवा में अपनी अंतिम छाप छोड़ी है.
आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से सोच समझकर की गई:
आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से सोच समझकर और मानवीय मूल्य को ध्यान में रखकर की गई. इसी कारण से ऑपरेशन सिंदूर भारत के इतिहास में सिर्फ एक सैनिक कार्रवाई के रूप में नहीं बल्कि साहस और संतुलन के रूप में याद रखा जाएगा.
ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ:
ऑपरेशन सिंदूर में जिस साहस का परिचय आप लोगों ने दिया. उसके लिए मैं अपने सभी सेना के जवानों को हार्दिक बधाई देता हूं.साथियों यह भी सच है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है. क्योंकि जब तक आतंक की सोच खत्म नहीं होगी. तब तक शांति के लिए हमारा यह प्रयास लगातार चलता रहेगा. मैं राजस्थान की वीर धरती से यह घोषणा कर रहा हूं.
हमारी सेना दुनिया के लिए शांति दूत बनकर उभरी है:
जनता सेना पर अटूट विश्वास करती है. मैं मानता हूं कि यही विश्वास सेना की सबसे बड़ी ताकत है. सैनिक जानते हैं कि वह जनता की रक्षा कर रहे हैं. वह उनके परिवार का हिस्सा है. और जनता जानती है कि उनके सैनिक कभी भी उन्हें निराश नहीं कर सकते हैं. यह पारस्परिक विश्वास का बंधन ही राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की नींव है. हमारी सेना दुनिया के लिए शांति दूत बनकर उभरी है.
हम 2047 में भारतीय सेना को दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने की ओर बढ़ रहे हैं:
हमारी वसुधैव कुटुम्बकम की भावनाओं को इससे बल मिला है. रिफॉर्म को तेजी से लागू करने में कोई समस्या नहीं आती है. साथियों हम 2047 में भारतीय सेना को दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने की ओर बढ़ रहे हैं. और उसके लिए आप सभी से लेकर 2047 के रोड मैप को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. साथियों इस समय हमारे आसपास दुनिया की जो स्थिति चल रही है.
दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है:
उससे हम वाकिफ है हम कैसे दौर से गुजर रहे हैं. जहां स्थापित धारणाएं टूट रही है या तोड़े जा रहे हैं. दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है ऐसे में पूरी तरह से स्पष्ट है कि सेना का मजबूत रहना. सेवा का मॉर्डनाइजेशन और आत्मनिर्भर किसी भी देश के अस्तित्व के लिए जितना महत्वपूर्ण हो चुका है. उतना पहले कभी नहीं रहा ऐसी स्थिति में सेना का मजबूत रहना जरूरी है.