कोटा में फिर लौटी कोचिंग की रौनक, स्टूडेंट्स बढ़े तो पटरी पर लौटी अर्थव्यवस्था, देखिए खास रिपोर्ट

कोटाः कोचिंग सेक्टर लङखङाने से गङबङायी कोटा की अर्थव्यवस्था को एक बार फिर से कोचिंग सेक्टर ही रफ्तार देने को तैयार हैं और मेहमान कोचिंग स्टूडेन्ट्स का बढता ग्राफ कोटा सांसद और लोक सभा के अध्यक्ष ओम बिरला से लेकर कोटा के आम कारोबारी से लेकर आम नागरिक तक को फील गुड करा रहा हैं. अपने बेहतर कोचिंग इन्फ्रा और लगातार बरकरार टॉपर्स की लिस्ट के साथ बतौर सिटी ऑफ कोचिंग कमबैक मोड में नजर आ रहे.

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला का एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिया गया ये बयान न सिर्फ कोचिंग सिटी कोटा में अब तेजी से वायरल हैं बल्कि कोटा कोचिंग में उत्साह की एक नयी लहर के संचार का काम भी कर रहा हैं.क्योंकि गुजिश्ता सालों में मेहमान कोचिंग स्टूडेन्ट्स की तेजी से घटती तादाद के बीच कोटा के कई कोचिंग हॉस्टल खाली पङे थे तो रीयल एस्टेट से लेकर होटल-पर्यटन-यातायात और परिवहन-कन्जयुमर सर्विस के सारे कारोबार तक इसकी चपेट में आकर मंदी का शिकार हो गये थे.लेकिन समय एक बार फिर से करवट ले रहा हैं और 'कोचिंग के लिये कोटा जैसा कोई नहीं' इस शहर से निकलकर देश के कई शहरों तक फैलता जा रहा हैं--एक बार फिर उत्तर-पश्चिम से दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत तक का स्टूडेन्ट देश के सभी शहरों को बाइपास करके कोचिंग करने सीधा कोचिंग कैपिटल कोटा की पहुंच रहा हैं. 

असल में किसी मैट्रो सिटी के 15 से 25 हजार के मासिक खर्च के मुकाबले कोटा में औसतन 10 हजार मासिक के खर्च में ही किसी कोचिंग स्टूडेन्ट को बेसिक कोचिंग इन्फ्रा मिल जाता हैं. कोटा की फेकल्टी और कन्टेन्ट की क्वालिटी के साथ ही बिते 2 सालों में लगातार जेईई-नीट में दिये जा रहे ऑल इंडिया टॉपर एक बार फिर से कोटा की तरफ देशभर के कोचिंग स्टूडेन्ट्स को आकर्षित कर रहे हैं.मिनि इंडिया बन चुका कोटा का अकेडमिक इको सिस्टम देश के अलग-अलग हिस्सों के स्टूडेन्ट्स को यहां रचने-बसने और खुद का आंकलन करने और अपग्रेड करने का बेहतर माहौल देता हैं और इसीलिये एक अंतराल के बाद कोटा में कोचिंग स्टूडेन्ट्स की तादाद में 20 से 25 फीसदी तक की ग्रोथ देखी जा रही हैं. इन आंकङों से कोटा के आम से लेकर खास नागरिक तक उत्साहित नजर आ रहे हैं और अब कोटा का भविष्य 'बेहतर' देख पा रहे हैं.    

पोस्ट-कोविड कोटा ने रिकॉर्डतोङ स्टूडेन्ट्स के आंकङे के साथ एकबारगी तो 2 लाख कोचिंग विद्दार्थियों के आंकङे को पार किया था लेकिन इसके बाद जैसे कोटा को किसी की नजर लग गयी. वर्ष 2023 में करीब 20 फीसदी की गिरावट से ये आंकङा 1.60 लाख पर आया और 2024 में  1.45 लाख से गिरकर साल 2025 में 1.25 लाख तक ही सिमटकर रह गया. लेकिन लगता हैं कि देश को मेडिकल-इंजीनियर देने की खान कहा जाने वाला ये शहर अब एक बार फिर से अपने बेहतर परिणामों और बेजोङ कोचिंग इंफ्रा के बूते फिर से देश की कोचिंग कैपिटल का खिताब रि-गेन करने के सफर पर हैं. क्योंकि कोचिंग ही कोटा की सबसे मूल्यवान आधुनिक धरोहर और इस शहर की कार्य-संस्कृति हैं.