द्रव्यवती नदी के दोनों तरफ कितना हो बफर जोन, JDA ने नगरीय विकास विभाग से मांगा मार्गदर्शन, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजधानी की द्रव्यवती नदी को लेकर जेडीए असमंजस में है, यह असमंजस नदी के दोनों तरफ नियोजित विकास को लेकर है, इसे दूर करने के लिए जेडीए ने राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है. 

राजधानी में करीब 48 किलोमीटर की लंबाई में भूतेश्वर महादेव से लेकर ढूंढ नदी तक द्रव्यवती नदी का प्रवाह है. इस नदी के किनारे से कितनी सुरक्षित दूरी छोड़कर विभिन्न गतिविधियों की स्वीकृति दी जाए, नदी के दोनों तरफ बफर जोन की चौड़ाई कितनी हो, इसको लेकर जेडीए के अधिकारियों में है असमंजस. इस असमंजस के पीछे बड़ा कारण टाउनशिप पॉलिसी व मास्टर प्लान के तहत लागू जोनल डवलपमेंट प्लान के प्रावधानों में भिन्नता है. इसके साथ ही मामले में समय-समय पर दी गई विधिक राय भी अलग-अलग है. इसी के चलते जेडीए की ओर राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा गया है. अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता ने जेडीए में पहली समीक्षा बैठक ली थी. इस बैठक में जेडीए की ओर से यह मामला उठाया गया था. आपको सबसे पहले बताते हैं कि नदी की चौड़ाई को लेकर वर्तमान में क्या स्थिति है और जेडीए नदी के दोनों तरफ क्यों चाहता है बफर जोन का निर्धारण

द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र की चौड़ाई, संरक्षण के संबध में मामला है विचाराधीन
पीएन मैंदौला बनाम राज्य सरकार एव अन्य प्रकरण हाई कोर्ट में विचाराधीन
मास्टर प्लान 2025 वॉल्यूम 2 में कहा गया है कि
हाई कोर्ट ने इस मामले में अंतरिम आदेश दिए हैं
नदी की चौड़ाई 150 फीट से 210 फीट रखने के दिया है अंतरिम आदेश
मास्टर प्लान में नदी की न्यूनतम चौड़ाई 150 फीट रखने और
अधिकतम चौड़ाई मौके पर वास्तविक चौड़ाई के अनुसार अथवा
भूमि के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार रखने की की गई है सिफारिश
नदी के दोनों तरफ जेडीए स्वामित्व की है कई जमीनें
इन जमीनों के निस्तारण से जेडीए चाहता है राजस्व प्राप्ति
यहीं कारण है जेडीए चाहता है बफर जोन का निर्धारण
नदी के दोनों तरफ खाली क्षेत्र में नियोजित विकास करना भी है कारण
इसके अलावा कई निजी भूमि भी है प्रभावित
बफर जोन के निर्धारण नहीं होने के चलते हैं प्रभावित
कितनी दूरी छोड़कर इन जमीनों पर दी जाए स्वीकृति
विभिन्न गतिविधियों को देकर दी जाए स्वीकृति
इसको लेकर वर्तमान में नहीं हैं स्पष्ट स्थिति
जेडीए की भवन मानचित्र समिति ले आउट प्लान की हुई थी बैठक
26.2.26 को हुई बैठक में हालांकि माना गया है उचित
समिति ने न्यूनतम 30 मीटर का बफर जोन रखना माना है उचित
नदी की बाहरी फैंसिंग से न्यूनतम 30 मीटर चौड़ा जोन रखना माना है उचित
मार्गदर्शन के लिए भेजे गए पत्र में दिया गया है हवाला
समिति की इस सिफारिश का दिया गया है हवाला

शहर में लागू मास्टर प्लान 2025 के तहत लागू जोनल डवलपमेंट प्लान में द्रव्यवती नदी के दोनों तरफ 30 मीटर का बफर जोन दिखाया गया है. इसका भू उपयोग रिक्रिशनल निर्धारित रखा गया है. इसी के चलते जेडीए नदी के दोनों तरफ स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स,एम्युजमेंट पार्क आदि के लिए भूमि चिन्हित कर रहा है. यही कारण है कि जेडीए चाहता है कि नदी के बफर जोन का जल्द से जल्द निर्धारण किया जाए. आपको बताते हैं कि बफर जोन की चौड़ाई को लेकर किस तरह असमंजस की स्थिति है.

जेडीए के जोनल डवलपमेंट प्लान में है प्रदर्शित
नदी के दोनों तरफ करीब 30 मीटर का बफर जोन है प्रदर्शित
यह बफर जोन रिक्रिएशनल के तौर पर है प्रदर्शित
इस जोन में रिक्रिएशनल से जुड़ी गतिविधियां की जा सकती हैं
प्लान में अंकित नोट में यह भी कहा गया है कि
नदी की चौड़ाई हाई कोर्ट के निर्णय के होगी अधीन

प्रदेश में लागू टाउनशिप नीति के अनुसार
ऐसी नदी जो किसी कानून,मास्टर प्लान अथवा
जोनल डवलपमेंट प्लान में नहीं हैं अधिसूचित
उसके दोनों तरफ 30 मीटर का रखा जाना चाहिए बफर जोन
ऐसी नदी या नाला जिसे चैनलाइज्ड किया गया है
उसका बफर जोन होगा जोनल डवलपमेंट प्लान के मुताबिक
या फिर बफर जोन की न्यूनतम चौड़ाई होगी 9 मीटर
इनमें से जो भी अधिक,उस हिसाब से होगी बफर जोन की चौड़ाई

समय-समय पर मामले में दी गई विधिक राय में है भिन्नता
तत्कालीन AAGअनिल मेहता ने 17.6.22 को दी थी विधिक राय
एक मामले में विधिक राय में मेहता ने कहा था
कि नदी से 150 फीट की दूरी पर की जा सकती है विकसित
150 फीट की दूरी पर विकसित की जा सकती है फार्म हाउस योजना

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के AAG शिवमंगल शर्मा ने दी विधिक राय
17.6.25 को दी विधिक राय में शर्मा ने कहा था कि
नदी के मध्य बिंदु से 75 मीटर की दूरी के बाद दी जा सकती है स्वीकृति
नियम व कानून के तहत गतिविधियों की दी जा सकती है स्वीकृति
बाद में इसी विधिक राय की निरंतरता में शर्मा ने जेडीए को भेजा पत्र
22.8.25 को भेजे पत्र में शिव मंगल शर्मा ने किया स्पष्ट
75 मीटर की दूरी को लेकर उनकी दी विधिक राय को लेकर किया स्पष्ट
शर्मा ने इस पत्र में कहा कि जेडीए को करनी चाहिए पालना
वर्तमान में लागू जोनल डवलपमेंट के अनुसार करनी चाहिए पालना
नदी के मध्य बिंदु से यूनिफॉर्म दूरी की करनी चाहिए पालना    

अधिवक्ता अमित कुड़ी ने आवासन मंडल को दी विधिक राय में कहा था
कि जेडीए के मास्टर प्लान 2025 के वॉल्यूम 4 के बिंदु संख्या 10.11 के अनुसार
नदी योजना की पैरापेट दीवार से 30 मीटर की होनी चाहिए दूरी