जयपुर: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने VAHAN पोर्टल में बड़ी संख्या में हो रही “बैकलॉग एंट्री” को लेकर राजस्थान सहित पांच राज्यों को सख्त एडवाइजरी जारी की है. मंत्रालय ने राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और गोवा के मुख्य सचिवों को भेजा गया है. पत्र में कहा गया है कि संबंधित राज्यों में VAHAN डेटाबेस में बैकलॉग एंट्रियों की संख्या “अत्यधिक” पाई गई है.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अपने पत्र में लिखा है कि इस तरह की बैकलॉग एंट्री से संदिग्ध गतिविधियों की आशंका पैदा हो रही है. मंत्रालय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2023 और 2024 में भी इस संबंध में दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिनमें बैकलॉग एंट्री की प्रक्रिया और शर्तें स्पष्ट रूप से तय की गई थीं. बावजूद इसके कई राज्यों में स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.नई एडवाइजरी के तहत अब कोई भी बैकलॉग एंट्री संबंधित राज्य के परिवहन सचिव या परिवहन आयुक्त की पूर्व स्वीकृति के बिना फाइनल नहीं की जा सकेगी. इसके साथ ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को प्रत्येक तिमाही में स्वीकृत बैकलॉग एंट्रियों की समेकित सूची केंद्र सरकार को भेजनी होगी. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैकलॉग एंट्री केवल मूल पंजीयन प्राधिकरण द्वारा ही शुरू की जा सकेगी. साथ ही जिस तारीख को कोई राज्य VAHAN पोर्टल पर माइग्रेट हो चुका है, उसके बाद जारी रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्रों के लिए बैकलॉग एंट्री करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.
सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह लिया गया है कि अब VAHAN सिस्टम में की जाने वाली प्रत्येक बैकलॉग एंट्री पर एक स्थायी और स्पष्ट पहचान चिन्ह लगाया जाएगा. यह मार्कर रिकॉर्ड के पूरे जीवनकाल तक सिस्टम में बना रहेगा, जिससे भविष्य में किसी भी रिकॉर्ड की आसानी से पहचान और निगरानी की जा सकेगी. मंत्रालय का मानना है कि इससे फर्जी या संदिग्ध एंट्रियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.केंद्र सरकार बैकलॉग एंट्री के जरिए वाहन पंजीकरण और रिकॉर्ड में संभावित अनियमितताओं को गंभीरता से देख रही है. माना जा रहा है कि इस सख्ती के बाद परिवहन विभागों में लंबित और संदिग्ध मामलों की व्यापक जांच भी हो सकती है. मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए. गौरतलब है कि राजस्थान में बैकलॉग एंट्री का खेल बहुत लंबे समय से चल रहा है , राज्य सरकार के स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के बाद अब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसमें दखल दिया है.